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Delhi NCR News: बढ़ती उम्र की रफ्तार थामने पर 17 फीसदी लोग ही कर रहे काम
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विश्व स्वास्थ्य दिवस
-जीवनशैली, खान-पान, व्यायाम, सप्लीमेंट्स और थेरेपी के जरिए उम्र बढ़ने की गति को धीमा करने पर काम कर रहे
-लोकल सर्कल्स की ओर से किए गए सर्वे में सामने आई जानकारी
-64 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके नेटवर्क में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जबकि 6 फीसदी ने कहा कि एक व्यक्ति ऐसा है
केवल 17 फीसदी भारतीय ही सक्रिय रूप से उम्र बढ़ने की गति धीमी करने पर कर रहे काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
देश में बहुत कम ही लोग सक्रिय रूप से अपनी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 पर लोकल सर्कल्स की ओर से किए एक नए सर्वे में सामने आई है। इसमें 28,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे में शामिल 17 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके करीबी सोशल नेटवर्क दोस्त, परिवार, सहकर्मी या पड़ोसी में कोई या कुछ लोग अपनी जीवनशैली, खान-पान, व्यायाम, सप्लीमेंट्स और थेरेपी के जरिये उम्र बढ़ने की गति को धीमा करने पर काम कर रहे हैं। गणित के हिसाब से औसतन हर व्यक्ति के नेटवर्क में 15 लोग होते हैं, जिससे पता चलता है कि केवल 7.3 फीसदी भारतीय सक्रिय रूप से स्वस्थ बुढ़ापे की दिशा में काम कर रहे हैं।
स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूक हुए लोग : सर्वे में पाया कि 64 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके नेटवर्क में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जबकि 6 फीसदी ने कहा कि एक व्यक्ति ऐसा है। इसके अलावा, 11 फीसदी ने 2-3 लोग और 19 फीसदी ने 4 या उससे अधिक लोग बताए। इसका मतलब है कि अधिकांश भारतीय अपने स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लोग अब स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम, योग और संतुलित आहार के महत्व को समझने लगे हैं। निवारक स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान बढ़ा है, जिसमें शुरुआती जांच, टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग शामिल हैं। साथ ही, बायोटेक्नोलॉजी और दीर्घायु विज्ञान में शोध के माध्यम से कोशिकाओं की मरम्मत, आनुवंशिक हस्तक्षेप और बुढ़ापा-रोधी थेरेपी पर काम किया जा रहा है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान और तनाव प्रबंधन को भी अब स्वस्थ बुढ़ापे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
कोविड में जीवन प्रत्याशा बढ़ी :
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कोविड-19 महामारी से पहले भारत में जीवन प्रत्याशा 63.2 साल से बढ़कर 2021 तक 67.3 साल हो गई। 2050 तक यह महिलाओं में 79.8 साल और पुरुषों में 76.2 साल तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, यह अतिरिक्त साल स्वास्थ्य चुनौतियों के साथ गुजर सकते हैं, इसलिए नियमित व्यायाम और सही खान-पान जरूरी है। सर्वे में शामिल लोग टियर 1 महानगर, 2 तेजी से बढ़ते शहर और 3-4 ग्रामीण या विकासशील जिलों के थे, जिसमें 61 पुरुष और 39 फीसदी महिलाएं थीं। इससे साफ होता है कि जबकि जागरूकता बढ़ रही है, बहुत कम लोग इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। स्वस्थ और सक्रिय बुढ़ापे के लिए और अधिक प्रयास और जन जागरूकता जरूरी है।
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-जीवनशैली, खान-पान, व्यायाम, सप्लीमेंट्स और थेरेपी के जरिए उम्र बढ़ने की गति को धीमा करने पर काम कर रहे
-लोकल सर्कल्स की ओर से किए गए सर्वे में सामने आई जानकारी
-64 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके नेटवर्क में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जबकि 6 फीसदी ने कहा कि एक व्यक्ति ऐसा है
केवल 17 फीसदी भारतीय ही सक्रिय रूप से उम्र बढ़ने की गति धीमी करने पर कर रहे काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
देश में बहुत कम ही लोग सक्रिय रूप से अपनी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 पर लोकल सर्कल्स की ओर से किए एक नए सर्वे में सामने आई है। इसमें 28,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे में शामिल 17 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके करीबी सोशल नेटवर्क दोस्त, परिवार, सहकर्मी या पड़ोसी में कोई या कुछ लोग अपनी जीवनशैली, खान-पान, व्यायाम, सप्लीमेंट्स और थेरेपी के जरिये उम्र बढ़ने की गति को धीमा करने पर काम कर रहे हैं। गणित के हिसाब से औसतन हर व्यक्ति के नेटवर्क में 15 लोग होते हैं, जिससे पता चलता है कि केवल 7.3 फीसदी भारतीय सक्रिय रूप से स्वस्थ बुढ़ापे की दिशा में काम कर रहे हैं।
स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूक हुए लोग : सर्वे में पाया कि 64 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके नेटवर्क में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जबकि 6 फीसदी ने कहा कि एक व्यक्ति ऐसा है। इसके अलावा, 11 फीसदी ने 2-3 लोग और 19 फीसदी ने 4 या उससे अधिक लोग बताए। इसका मतलब है कि अधिकांश भारतीय अपने स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लोग अब स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम, योग और संतुलित आहार के महत्व को समझने लगे हैं। निवारक स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान बढ़ा है, जिसमें शुरुआती जांच, टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग शामिल हैं। साथ ही, बायोटेक्नोलॉजी और दीर्घायु विज्ञान में शोध के माध्यम से कोशिकाओं की मरम्मत, आनुवंशिक हस्तक्षेप और बुढ़ापा-रोधी थेरेपी पर काम किया जा रहा है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान और तनाव प्रबंधन को भी अब स्वस्थ बुढ़ापे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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कोविड में जीवन प्रत्याशा बढ़ी :
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कोविड-19 महामारी से पहले भारत में जीवन प्रत्याशा 63.2 साल से बढ़कर 2021 तक 67.3 साल हो गई। 2050 तक यह महिलाओं में 79.8 साल और पुरुषों में 76.2 साल तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, यह अतिरिक्त साल स्वास्थ्य चुनौतियों के साथ गुजर सकते हैं, इसलिए नियमित व्यायाम और सही खान-पान जरूरी है। सर्वे में शामिल लोग टियर 1 महानगर, 2 तेजी से बढ़ते शहर और 3-4 ग्रामीण या विकासशील जिलों के थे, जिसमें 61 पुरुष और 39 फीसदी महिलाएं थीं। इससे साफ होता है कि जबकि जागरूकता बढ़ रही है, बहुत कम लोग इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। स्वस्थ और सक्रिय बुढ़ापे के लिए और अधिक प्रयास और जन जागरूकता जरूरी है।