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CJP Protest: 'पापा के सिर पर पांच टांके थे, यूनिफार्म खून से लाल थी', घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों की आपबीती

Fri, 31 Jul 2026 10:35 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Fri, 31 Jul 2026 10:35 AM IST
सार

दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन और 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों ने आपबीती सुनाई। पुलिस सिपाही की बेटी गुंजन ने बताया कि प्रोटेस्ट के दौरान मेरे पिता फ्रंटलाइन में थे। जब वो घर आते थे, तो यही कहते थे कि ये अब स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं रहा, इसमें गलत लोग जुड़ गए हैं।  20 जुलाई को मेरे पिता के साथी उन्हें रात 10 बजे घर लेकर आए। उनके सिर पर 5 टांके थे। यूनिफार्म खून से लाल थी। सोशल मीडिया में मेरे ही पिता को क्रिमिनल बता रहे थे।

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Press conference by the families of police personnel injured during the CJP protest at Jantar Mantar
सीजेपी प्रदर्शन में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों की आपबीती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शन और 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने आज प्रेस वार्ता कर आपबीती सुनाई। घायल दिल्ली पुलिस एसीपी की पत्नी ने कहा, '20 जुलाई की देर रात जब वे घायल हालत में घर लौटे, तो वह पल मेरे और मेरी दो साल की बेटी, दोनों के लिए बेहद दर्दनाक और सदमे वाला था। मेरे साथ यहां दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों के परिवार के अन्य सदस्य भी हैं और हम अपनी आपबीती आपके साथ साझा करना चाहते हैं।"

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प्रेस वार्ता के दौरान दिल्ली पुलिस में एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि मैंने 20 जुलाई शाम 7 बजे पति को कॉल मिलाया तो वो अस्पताल में थे और इलाज करा रहे थे। उन्होंने बताया कि भीड़ में शरारती तत्व एक्टिव हो गए थे। उन्होंने पत्थर और हथियारों से पुलिस बल को घायल कर दिया था। फिर उनका फोन बंद हो गया। मुझे डर लग रहा था। 11 बजे वो घर आए, उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, उसे तोड़ा और पुलिस फोर्स पर हमला किया। ड्यूटी के दौरान मिला हेलमेट पूरी तरह टूट गया था। इससे मेरी रूह काप गई थी। मैं संसद में बैठे गए प्रतिनिधियों से निवेदन करना चाहती हूं कि जो हमारे पुलिसकर्मी और परिवार है, उसने अधिकारों और हमलों के बारे में संसद में सवाल किए जाए। 20 तारीख के बाद ये ही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का दूसरा हिस्सा कुछ ओर ही है।

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एक पुलिस जवान की बेटी गुंजन के अनुसार, मेरे पिता फ्रंटलाइन में थे। जब वो घर आते थे, तो कहते थे कि ये अब स्टूडेंट प्रोटेस्ट नहीं रहा, इसमें गलत लोग जुड़ गए हैं। 20 जुलाई को मेरे पिता के साथी उन्हें रात 10 बजे घर लेकर आए। उनके सिर पर पांच टांके थे। यूनिफार्म खून से लाल थी। सोशल मीडिया में मेरे ही पिता को क्रिमिनल बता रहे थे। जिन्होंने मेरे पिता के साथ ये किया वो पुलिसवालों को क्रिमिनल साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे। इसके बाद हम भी सुप्रीम कोर्ट गए। हमारी बात रखी गई।
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घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों का कहना है कि प्रोटेस्ट में स्टूडेंट नहीं, गुंडे थे। प्रदर्शनकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए दिल्ली पुलिस के एसीपी की पत्नी अवनीत कौर ने कहा की अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि एक पुलिस अधिकारी सिर्फ एक अकेला इंसान नहीं होता। बल्कि उसके पीछे उसका एक परिवार होता है, उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़े माता पिता, जो हर पल घर पर उसके सुरक्षित लौटने का इंतजार करते हैं।

दिल्ली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में घायल हुए दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के परिजन ने कहा, 'यह छात्रों का विरोध-प्रदर्शन नहीं था, बल्कि, इसमें कुछ शरारती तत्व शामिल थे जिन्होंने छात्रों के प्रदर्शन को खराब करने और उसे बदनाम करने, साथ ही संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की। इन शरारती तत्वों को उनके कृत्यों के लिए सजा मिलनी चाहिए और उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।'
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