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दाल में काला: एक पर हथौड़ा-दूसरे पर खामोशी, एमसीडी की तोड़फोड़ पर उठ रहे सवाल; लोगों ने लगाए भेदभाव के आरोप

Mon, 14 Sep 2026 05:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 14 Sep 2026 05:50 AM IST
सार

हथौड़ा चलने के बीच स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर पांच मंजिल मकान बनाना अवैध है तो सभी पर कार्रवाई एक जैसी क्यों नहीं हो रही है? एक मकान की पांचवीं मंजिल तोड़ी जा रही है, जबकि उसी के बगल में कई मंजिला इमारतें खड़ी हैं।

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questions raised over MCD demolition drive
ध्वस्तीकरण अभियान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध निर्माण के खिलाफ शुरू की गई एमसीडी की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। हथौड़ा चलने के बीच स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर पांच मंजिल मकान बनाना अवैध है तो सभी पर कार्रवाई एक जैसी क्यों नहीं हो रही है? एक मकान की पांचवीं मंजिल तोड़ी जा रही है, जबकि उसी के बगल में कई मंजिला इमारतें खड़ी हैं। जबकि मास्टर प्लान में स्पष्ट प्रावधान है कि मकान पंद्रह मीटर यानि ग्राउंड पार्किंग के अलावा चार मंजिल से ऊपर मकान नहीं बना सकते। इससे ज्यादा के निर्माण पर नक्शा पास होना मुमकिन नहीं है। नियमों का हवाला देते हुए लोगों का कहना है कि कार्रवाई के लिए चुनिंदा मकानों की पहचान की जा रही है?

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सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी ने अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम शुरू की है। पक्की कॉलोनियों में नक्शा पास न होने पर पांचवीं मंजिल की तोड़फोड़ की जा रही है। नियमों के तहत अनधिकृत निर्माण की पहचान, शो-कॉज नोटिस, जवाब और उसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया है। एमसीडी अधिनियम के तहत उचित जवाब न मिलने पर अनधिकृत निर्माण को हटाने की कार्रवाई होती है।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना मिलीभगत के दिल्ली में एक ईंट अतिरिक्त नहीं जा सकती है। जिसने एमसीडी से साठगांठ कर ली, उनको निर्माण करने दिया गया। जिनके साथ बातचीत नहीं बनी, उनके घर पर हथौड़ा चल रहा है। लोगों की मांग है कि कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका की जांच हो।
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लोगों के सवाल....

  • नोटिस देने के लिए मकान का चुनाव कैसे?
  • एक गली में पांच मकान एक जैसे तरीके से बने हैं तो क्या पांचों का सर्वे होता है?
  • सिर्फ एक को नोटिस दिया गया तो बाकी चार को क्यों छोड़ा गया?
  • क्या एमसीडी के पास ऐसा कोई सार्वजनिक और स्पष्ट पैमाना है, जिससे लोग जान सकें कि किस आधार पर किसी निर्माण को कार्रवाई के लिए चुना गया?
  • एमसीडी क्या अवैध निर्माण देखता है या सिर्फ उस निर्माण को, जिसके खिलाफ फाइल खुल गई है?

एमसीडी अधिकारी बोले, अवैध निर्माण टूटेंगे
एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि वह पक्की काॅलोनियों के अवैध निर्माण पर कार्रवाई कर रहे हैं। संभव है कि बगल का मकान ग्राउंड पार्किंग के अलावा चार मंजिल बनाया गया हो। इसकी ऊंचाई 15 मीटर हो और इसका नक्शा भी पास हो। इस तरह की इमारत वैध होगी। अगर ऐसा नहीं है तो हर अवैध निर्माण तोड़ा जाएगा। एमसीडी अपने स्तर पर इसकी जानकारी जुटा रही है।

इमारत बनाने के प्रावधान
जमीन का दायरा 50 वर्ग मीटर या इससे ऊपर होने पर 15 मीटर की ऊंचाई तक ही मकान बन सकता है। प्लाॅट बड़ा होने पर ग्राउंड कवरेज और एफएआर कम होता जाता है। 100 वर्ग मीटर तक ग्राउंड कवरेज 90 फीसदी और एफएआर 350 है। जबकि 100-250 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 75 फीसदी ग्राउंड कवरेज और 300 एफएआर है। आगे 750 वर्ग मीटर से बड़े प्लाट का ग्राउंड कवरेज 50 फीसदी और एफएआर 200 रखा गया है। इन सभी प्लाॅट पर बने मकानों की ऊंचाई 15 मीटर से ज्यादा नहीं हो सकती।

स्थानीय निवासियों में दिख रही नाराजगी
दिल्ली में ऐसे शिकायतकर्ताओं गिरोह सक्रिय है, जो झूठी शिकायतें कर मकानों पर कार्रवाई करवा रहा है। हैरानी की बात है कि जिन लोगों की शिकायत पर कार्रवाई हो रही है, उनके खुद के पहचान पत्र भी फर्जी हैं। हमारी मांग है कि पहले शिकायत की पूरी जांच हो, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाए।


- केशव कुमार, स्थानीय निवासी, लक्ष्मी नगर

बगल में देख लो, कई मकान ऐसे ही छह से सात मंजिल बने हुए हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। एमसीडी को किसी ने बदले की भावना से शिकायत कर दी जिस की वजह से इन्हें परेशान किया जा रहा है।
-सोनू चौहान, स्थानीय निवासी, समसपुर जागीर

हमारा इस मामले में केस चल रहा है। बगैर अदालती निपटारे के एमसीडी कर्मी मकान तोड़ने लग रहे हैं। जबकि कोर्ट ने 19 दिसंबर की अगली तारीख दी है।
-सनी सिंह, स्थानीय निवासी, समसपुर जागीर

पडोसियों और बिल्डरों के कहने पर हमारे मकान पर तोड़फोड़ की जा रही है जबकि बड़े बिल्डर के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता। पड़ोसी अपना मकान बना रहे हैं और हमारी शिकायत कर रहे हैं। जबकि कोर्ट में केस चल रहा है उसके बाद भी कार्रवाई की जा रही है।
-संजीव चौहान, स्थानीय निवासी, पूर्वी दिल्ली

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