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Rain Water Harvesting: दिल्ली में 100 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर वर्षा जल संचयन जरूरी, उल्लंघन पर जुर्माना

नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 30 Mar 2026 03:36 AM IST
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सार

एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के निर्देशों के बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी प्लॉटों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) सिस्टम लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है।

Rainwater harvesting mandatory on plots larger than 100 square metres in Delhi
एनजीटी - फोटो : संवाद
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विस्तार

दिल्ली में भूजल स्तर को बचाने और पानी की कमी से निपटने के लिए अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के निर्देशों के बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने 100 वर्ग मीटर से बड़े सभी प्लॉटों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) सिस्टम लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है।

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डीपीसीसी के वरिष्ठ पर्यावरण इंजीनियर डॉ. अनवर अली खान ने एनजीटी के 4 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने या सिस्टम का सही रखरखाव न करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए), जिला उपायुक्त (डीसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) शामिल है। डीपीसीसी ने दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस नियम का पालन नहीं करती है या सिस्टम लगाकर भी उसे ठीक से संचालित नहीं करती, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
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जुर्माने की स्पष्ट व्यवस्था प्रस्तावित
दिल्ली सरकार ने वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाने के लिए जुर्माने की स्पष्ट व्यवस्था प्रस्तावित की है। 17 मई 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, 100 से 500 वर्ग मीटर के आवासीय प्लॉट पर नियम न मानने पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगेगा, जबकि 501 से 2000 वर्ग मीटर पर 1 लाख, 2001 से 5000 वर्ग मीटर पर 2 लाख और 5000 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना देना होगा। गैर-आवासीय भवनों के लिए यह राशि 50 प्रतिशत अधिक होगी। यह जुर्माना दिल्ली जल बोर्ड, डीपीसीसी, जिला प्रशासन या एमसीडी अधिकारी वसूलेंगे और राशि वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने में खर्च की जाएगी।

एक नई संयुक्त समिति बनाई जाएगी
डीपीसीसी की एक्शन टेकन रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा जल संचयन को प्रभावी बनाने के लिए एक नई संयुक्त समिति बनाई जाएगी। इस समिति में डिवीजनल कमिश्नर अध्यक्ष होंगे, जबकि डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीईओ और एमसीडी कमिश्नर सदस्य होंगे। डीजेबी को इसका कन्वीनर बनाया जाएगा। यह समिति एनजीटी और सीजीडब्ल्यूए के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करेगी, साथ ही लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान भी चलाएगी और हर तीन महीने में मुख्य सचिव को रिपोर्ट देगी। इसके अलावा, सभी जिलों के उपायुक्त 100 वर्ग मीटर से बड़े भवनों में वर्षा जल संचयन सिस्टम लगाने और उसके रखरखाव की निगरानी करेंगे। शिकायत मिलने पर जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एमसीडी बड़े भवनों का डेटा तैयार करेगी, जबकि डीजेबी तकनीकी सहायता, निरीक्षण और जुर्माना वसूली का काम संभालेगी।

डीडीए-डीजेबी के साथ मिलकर करेंगे जल स्रोतों का संरक्षण
रिपोर्ट के अनुसार, वर्षा जल संचयन व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने के लिए अलग-अलग विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) भूजल प्रबंधन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े नियम तय करेगी। जिला उपायुक्त (राजस्व) अपने-अपने क्षेत्रों में इसकी निगरानी करेंगे। नगर निगम (एमसीडी) 100 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर निर्माण की अनुमति (एनओसी) देते समय यह सुनिश्चित करेगा कि वर्षा जल संचयन सिस्टम लगाया गया हो। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) इस सिस्टम के डिजाइन और तकनीकी दिशा-निर्देश जारी करेगा, साथ ही नियम तोड़ने वालों से जुर्माना भी वसूलेगा। यदि बड़े भवनों या सोसाइटियों में यह सिस्टम नहीं लगाया गया, तो पानी के बिल पर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। ऐसे में डीडीए डीजेबी के साथ मिलकर जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल प्रदूषण रोकने का काम करेगा।

दिल्ली में वर्षा जल संचयन पर भ्रष्टाचार के आरोप, एनजीटी से सख्त कार्रवाई की मांग
दिल्ली में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता महेश चंद्र सक्सेना ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दूसरी अतिरिक्त रिपोर्ट दाखिल कर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की है। सक्सेना का आरोप है कि वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) सेल में लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण दिल्ली की कई सोसाइटियों में यह व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर टैंक या तो खराब हैं, गंदे पड़े हैं या केवल दिखावे के लिए हैं। इससे बारिश का पानी सही तरीके से संग्रहित नहीं हो पा रहा और भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है।

उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीईओ को पत्र लिखकर खासतौर पर द्वारका की ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में सही और कार्यशील वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाने की मांग की है। साथ ही, पूरे दिल्ली में इस व्यवस्था का सर्वे कर मरम्मत और सुधार के निर्देश देने की बात कही है। अपनी रिपोर्ट में सक्सेना ने यह भी बताया कि एनजीटी के पुराने आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

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