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Delhi NCR News: 33 साल जेल में रहने के बाद मिली राहत, बोबाजार बम धमाके के दोषी की रिहाई का आदेश
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राशिद खान को कोलकाता के चर्चित बोबाजार बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 1993 के कोलकाता के चर्चित बोबाजार बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद राशिद खान को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि करीब 33 वर्ष जेल में बिताने के बाद उनके मामले में सुधार और पुनर्वास के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि उनमें सुधार कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था प्रतिशोध के बजाय सुधारवादी दृष्टिकोण पर आधारित है।
मोहम्मद राशिद खान को 1993 के बोबाजार बम विस्फोट मामले में आतंकवाद निरोधक कानून टाडा, भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था। वह 1993 से लगातार जेल में बंद हैं। अदालत ने उनके जेल रिकॉर्ड, संतोषजनक आचरण और पुनर्वास की संभावनाओं से जुड़ी सकारात्मक रिपोर्टों को ध्यान में रखा। साथ ही यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में पैरोल पर रिहाई के दौरान उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल घटना सामने नहीं आई।
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मामले में केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने अपराध की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए रिहाई का विरोध किया। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि तीन दशक से अधिक कारावास और सुधारात्मक आचरण को देखते हुए याचिकाकर्ता को समाज में पुनः शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने इसी आधार पर उनकी समयपूर्व रिहाई का आदेश पारित किया।
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 1993 के कोलकाता के चर्चित बोबाजार बम विस्फोट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद राशिद खान को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि करीब 33 वर्ष जेल में बिताने के बाद उनके मामले में सुधार और पुनर्वास के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि उनमें सुधार कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था प्रतिशोध के बजाय सुधारवादी दृष्टिकोण पर आधारित है।
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मोहम्मद राशिद खान को 1993 के बोबाजार बम विस्फोट मामले में आतंकवाद निरोधक कानून टाडा, भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था। वह 1993 से लगातार जेल में बंद हैं। अदालत ने उनके जेल रिकॉर्ड, संतोषजनक आचरण और पुनर्वास की संभावनाओं से जुड़ी सकारात्मक रिपोर्टों को ध्यान में रखा। साथ ही यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में पैरोल पर रिहाई के दौरान उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल घटना सामने नहीं आई।
मामले में केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने अपराध की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए रिहाई का विरोध किया। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि तीन दशक से अधिक कारावास और सुधारात्मक आचरण को देखते हुए याचिकाकर्ता को समाज में पुनः शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। अदालत ने इसी आधार पर उनकी समयपूर्व रिहाई का आदेश पारित किया।