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जेजे क्लस्टर में सेवाओं की जिम्मेदारी अलग-अलग विभाग के पास : डूसिब
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दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में दाखिल किया हलफनामा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में सीवर, जल आपूर्ति और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर विभिन्न एजेंसियों की जिम्मेदारियों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल अपने हलफनामे में साफ किया है कि झुग्गी बस्तियों में सभी सेवाओं की जिम्मेदारी एक ही एजेंसी की नहीं है, बल्कि यह कई विभागों में बंटी हुई है।
डूसिब ने अपने जवाब में कहा है कि दिल्ली में करीब 675 झुग्गी बस्तियां (जेजे क्लस्टर) हैं, जो पिछले कई दशकों में बिना किसी योजना के विकसित हुई हैं। इन बस्तियों में आबादी का घनत्व अधिक है और संरचना अनियमित होने के कारण बुनियादी ढांचे का विकास चुनौतीपूर्ण हो गया है। हलफनामे के अनुसार, डूसिब मुख्य रूप से झुग्गी बस्तियों में सामुदायिक शौचालय (जन सुविधा केंद्र), सीसी पथ और सतही नालियों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है, ताकि स्थानीय स्तर पर स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके लेकिन, सीवर लाइन बिछाने और उससे जुड़ी पूरी व्यवस्था का कार्य दिल्ली जल बोर्ड (डीडेबी) के अधिकार क्षेत्र में आता है।
डूसिब ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई झुग्गी बस्तियां भौगोलिक रूप से असमान भूमि पर बसी हुई हैं, जहां सीवर लाइन डालना तकनीकी रूप से कठिन है। कुछ स्थानों पर आबादी अत्यधिक घनी होने के कारण बड़ी खुदाई या पुनर्विकास के बिना सीवरेज सिस्टम विकसित करना संभव नहीं है। संस्था ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि कई क्षेत्रों में संयुक्त निरिक्षणों के दौरान यह सामने आया है कि सीवर नेटवर्क जोड़ने या एकीकृत ड्रेनेज सिस्टम बनाने में व्यावहारिक बाधाएं हैं। यही कारण है कि कई स्थानों पर सीमित सुविधाओं के साथ ही अस्थायी व्यवस्था चलाई जा रही है। डूसिब ने यह भी कहा कि झुग्गी बस्तियों में पुनर्वास और सुधार कार्यों के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो आवास आवंटन, पुनर्वास नीति और बुनियादी सुविधाओं के समन्वय पर काम कर रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में सीवर, जल आपूर्ति और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर विभिन्न एजेंसियों की जिम्मेदारियों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल अपने हलफनामे में साफ किया है कि झुग्गी बस्तियों में सभी सेवाओं की जिम्मेदारी एक ही एजेंसी की नहीं है, बल्कि यह कई विभागों में बंटी हुई है।
डूसिब ने अपने जवाब में कहा है कि दिल्ली में करीब 675 झुग्गी बस्तियां (जेजे क्लस्टर) हैं, जो पिछले कई दशकों में बिना किसी योजना के विकसित हुई हैं। इन बस्तियों में आबादी का घनत्व अधिक है और संरचना अनियमित होने के कारण बुनियादी ढांचे का विकास चुनौतीपूर्ण हो गया है। हलफनामे के अनुसार, डूसिब मुख्य रूप से झुग्गी बस्तियों में सामुदायिक शौचालय (जन सुविधा केंद्र), सीसी पथ और सतही नालियों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है, ताकि स्थानीय स्तर पर स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके लेकिन, सीवर लाइन बिछाने और उससे जुड़ी पूरी व्यवस्था का कार्य दिल्ली जल बोर्ड (डीडेबी) के अधिकार क्षेत्र में आता है।
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डूसिब ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई झुग्गी बस्तियां भौगोलिक रूप से असमान भूमि पर बसी हुई हैं, जहां सीवर लाइन डालना तकनीकी रूप से कठिन है। कुछ स्थानों पर आबादी अत्यधिक घनी होने के कारण बड़ी खुदाई या पुनर्विकास के बिना सीवरेज सिस्टम विकसित करना संभव नहीं है। संस्था ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि कई क्षेत्रों में संयुक्त निरिक्षणों के दौरान यह सामने आया है कि सीवर नेटवर्क जोड़ने या एकीकृत ड्रेनेज सिस्टम बनाने में व्यावहारिक बाधाएं हैं। यही कारण है कि कई स्थानों पर सीमित सुविधाओं के साथ ही अस्थायी व्यवस्था चलाई जा रही है। डूसिब ने यह भी कहा कि झुग्गी बस्तियों में पुनर्वास और सुधार कार्यों के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो आवास आवंटन, पुनर्वास नीति और बुनियादी सुविधाओं के समन्वय पर काम कर रही है।