{"_id":"6a3169dd42d2207dbc02435f","slug":"rising-mental-stress-among-medical-students-special-committee-formed-for-prevention-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-141220-2026-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: मेडिकल छात्रों में बढ़ रहा मानसिक दबाव, रोकथाम के लिए बनी विशेष समिति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: मेडिकल छात्रों में बढ़ रहा मानसिक दबाव, रोकथाम के लिए बनी विशेष समिति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
आत्महत्या के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी ने उप-समिति गठित की
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मेडिकल छात्रों के बीच बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चिंता गहराती जा रही है। छात्रों में तनाव, अवसाद और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी ने एक विशेष उप-समिति का गठन किया है। समिति में देश के विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ मनोचिकित्सकों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों की पहचान कर प्रभावी समाधान तैयार करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल शिक्षा के दौरान छात्रों को लगातार परीक्षाओं, लंबे अध्ययन समय, इंटर्नशिप के दौरान अत्यधिक कार्यभार और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही नींद की कमी, सामाजिक गतिविधियों से दूरी और असफलता का भय मानसिक दबाव को और बढ़ा देता है। कई छात्र भावनात्मक अकेलेपन का भी अनुभव करते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।
मानव व्यवहार व संबद्ध संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि मेडिकल छात्रों में बढ़ता मानसिक दबाव अब एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है। उनका कहना है कि समय पर काउंसलिंग, परिवार और शिक्षकों का सहयोग तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह पहल न केवल मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी, बल्कि उन्हें अधिक सुरक्षित और संतुलित शैक्षणिक माहौल भी प्रदान करेगी।
विज्ञापन
समिति मेडिकल कॉलेजों के लिए नई सिफारिशें तैयार कर रही
समिति मेडिकल कॉलेजों के लिए नई सिफारिशें तैयार कर रही है। इसके तहत संस्थानों में काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने, नियमित मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कराने, हेल्पलाइन शुरू करने और छात्रों के लिए सपोर्ट ग्रुप बनाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही शिक्षकों और प्रशासन को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
-- -- -- -- -- -- -
मानसिक दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारण
-लगातार परीक्षाओं और प्रदर्शन का दबाव
-इंटर्नशिप के दौरान लंबी ड्यूटी
-पर्याप्त नींद और आराम की कमी
-कड़ी प्रतिस्पर्धा और असफलता का डर
-भावनात्मक और सामाजिक सहयोग का अभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मेडिकल छात्रों के बीच बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चिंता गहराती जा रही है। छात्रों में तनाव, अवसाद और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी ने एक विशेष उप-समिति का गठन किया है। समिति में देश के विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ मनोचिकित्सकों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों की पहचान कर प्रभावी समाधान तैयार करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल शिक्षा के दौरान छात्रों को लगातार परीक्षाओं, लंबे अध्ययन समय, इंटर्नशिप के दौरान अत्यधिक कार्यभार और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही नींद की कमी, सामाजिक गतिविधियों से दूरी और असफलता का भय मानसिक दबाव को और बढ़ा देता है। कई छात्र भावनात्मक अकेलेपन का भी अनुभव करते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मानव व्यवहार व संबद्ध संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि मेडिकल छात्रों में बढ़ता मानसिक दबाव अब एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है। उनका कहना है कि समय पर काउंसलिंग, परिवार और शिक्षकों का सहयोग तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। ऐसे में यह पहल न केवल मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी, बल्कि उन्हें अधिक सुरक्षित और संतुलित शैक्षणिक माहौल भी प्रदान करेगी।
समिति मेडिकल कॉलेजों के लिए नई सिफारिशें तैयार कर रही
समिति मेडिकल कॉलेजों के लिए नई सिफारिशें तैयार कर रही है। इसके तहत संस्थानों में काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने, नियमित मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कराने, हेल्पलाइन शुरू करने और छात्रों के लिए सपोर्ट ग्रुप बनाने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही शिक्षकों और प्रशासन को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
मानसिक दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारण
-लगातार परीक्षाओं और प्रदर्शन का दबाव
-इंटर्नशिप के दौरान लंबी ड्यूटी
-पर्याप्त नींद और आराम की कमी
-कड़ी प्रतिस्पर्धा और असफलता का डर
-भावनात्मक और सामाजिक सहयोग का अभाव