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Delhi NCR News: बढ़ता स्क्रिन टाइम धुंधली कर रहा नजर
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मोतियाबिंद ने तोड़ी उम्र की सीमा, बुजुर्गों के बाद बच्चे भी करा रहे ऑपरेशन
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के 5,654 ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कभी बुजुर्गों की बीमारी माने जाने वाला मोतियाबिंद, अब उम्र की सीमा तोड़ता नजर आ रहा है। इसने अपनी चपेट में अब बच्चों को भी ले लिया है। धुंधलापन, आंखों में जलन और कम दिखाई देने की शिकायत लेकर रोजाना बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में 40 वर्ष से ऊपर के मरीजों में भी बढ़ोतरी हुई है। बढ़ते स्क्रीन टाइम को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के 5,654 ऑपरेशन किए गए। अप्रैल में 358, मई में 509, जून में 397, जुलाई में 280, अगस्त में 302, सितंबर में 445, अक्टूबर में 404, नवंबर में 526, दिसंबर में 632, जनवरी में 584, फरवरी में 441 और मार्च में 442 मरीजों को नई रोशनी मिली।
असंतुलित जीवनशैली बड़ी वजह
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. पंकज त्रिपाठी बताते हैं कि पहले 60 वर्ष से अधिक के लोगों में मोतियाबिंद आम था, लेकिन अब 40 की उम्र पार करते ही आंखों की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। बच्चों में इसके मामले आना चिंता का विषय है।
जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अजय राणा का मानना है कि बढ़ता स्क्रीन टाइम, मोबाइल-लैपटॉप का अधिक उपयोग और असंतुलित जीवनशैली इसकी बड़ी वजह है। इन पर नियंत्रण की आवश्यकता है।
फरवरी में 2537 महिलाओं ने कराई जांच
डॉक्टरों के अनुसार, पिछले एक साल में ओपीडी में 22,416 पुरुष और 24,542 महिलाएं आंखों की समस्या लेकर पहुंचीं। फरवरी में 1922 पुरुष, 2537 महिलाएं और 151 बच्चे जांच के लिए आए।
तीन केस, जो बताते हैं हकीकत
मामला 1: 14 साल के अनुज को मिली नई रोशनी
सेक्टर-82 निवासी 14 वर्षीय अनुज को आंखों में दर्द और कम दिखाई देने की शिकायत थी। जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई। समय पर ऑपरेशन होने से अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
मामला 2: 18 साल में ही ऑपरेशन की नौबत
सेक्टर-73 के 18 वर्षीय अनुनीश कुमार की नजर धीरे-धीरे कमजोर हो गई। शुरुआत में नजरअंदाज किया, लेकिन समस्या बढ़ने पर अस्पताल पहुंचे। ऑपरेशन के बाद उनकी स्थिति बेहतर है।
मामला 3: देरी पड़ी भारी
सेक्टर-5 निवासी सूरज गुप्ता फरवरी में पिता के साथ अस्पताल पहुंचे। लंबे समय से नजर कमजोर होने के बावजूद इलाज में देरी की। बाद में ऑपरेशन कराने पड़ दृष्टि में सुधार हुआ।
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अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के 5,654 ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कभी बुजुर्गों की बीमारी माने जाने वाला मोतियाबिंद, अब उम्र की सीमा तोड़ता नजर आ रहा है। इसने अपनी चपेट में अब बच्चों को भी ले लिया है। धुंधलापन, आंखों में जलन और कम दिखाई देने की शिकायत लेकर रोजाना बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में 40 वर्ष से ऊपर के मरीजों में भी बढ़ोतरी हुई है। बढ़ते स्क्रीन टाइम को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के 5,654 ऑपरेशन किए गए। अप्रैल में 358, मई में 509, जून में 397, जुलाई में 280, अगस्त में 302, सितंबर में 445, अक्टूबर में 404, नवंबर में 526, दिसंबर में 632, जनवरी में 584, फरवरी में 441 और मार्च में 442 मरीजों को नई रोशनी मिली।
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असंतुलित जीवनशैली बड़ी वजह
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. पंकज त्रिपाठी बताते हैं कि पहले 60 वर्ष से अधिक के लोगों में मोतियाबिंद आम था, लेकिन अब 40 की उम्र पार करते ही आंखों की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। बच्चों में इसके मामले आना चिंता का विषय है।
जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अजय राणा का मानना है कि बढ़ता स्क्रीन टाइम, मोबाइल-लैपटॉप का अधिक उपयोग और असंतुलित जीवनशैली इसकी बड़ी वजह है। इन पर नियंत्रण की आवश्यकता है।
फरवरी में 2537 महिलाओं ने कराई जांच
डॉक्टरों के अनुसार, पिछले एक साल में ओपीडी में 22,416 पुरुष और 24,542 महिलाएं आंखों की समस्या लेकर पहुंचीं। फरवरी में 1922 पुरुष, 2537 महिलाएं और 151 बच्चे जांच के लिए आए।
तीन केस, जो बताते हैं हकीकत
मामला 1: 14 साल के अनुज को मिली नई रोशनी
सेक्टर-82 निवासी 14 वर्षीय अनुज को आंखों में दर्द और कम दिखाई देने की शिकायत थी। जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई। समय पर ऑपरेशन होने से अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
मामला 2: 18 साल में ही ऑपरेशन की नौबत
सेक्टर-73 के 18 वर्षीय अनुनीश कुमार की नजर धीरे-धीरे कमजोर हो गई। शुरुआत में नजरअंदाज किया, लेकिन समस्या बढ़ने पर अस्पताल पहुंचे। ऑपरेशन के बाद उनकी स्थिति बेहतर है।
मामला 3: देरी पड़ी भारी
सेक्टर-5 निवासी सूरज गुप्ता फरवरी में पिता के साथ अस्पताल पहुंचे। लंबे समय से नजर कमजोर होने के बावजूद इलाज में देरी की। बाद में ऑपरेशन कराने पड़ दृष्टि में सुधार हुआ।