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Holi: दिल्ली के पुराने किले में सनातन जर्नी की धूम, फूलों की होली का अनूठा उत्सव मनाया; हजारों लोग साक्षी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 02 Mar 2026 06:59 AM IST
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सार
सनातन जर्नी कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भजन-कीर्तन और संकीर्तन की मधुर धुनों के बीच अध्यात्म की अविरल धारा का अनुभव किया।
अमर उजाला और जीवांजलि के सहयोग से दिल्ली के पुराना किले में भक्ति और संगीत का अनूठा कार्यक्रम सनातन जर्नी का आयोजन रविवार को हुआ। इस दौरान भक्ति संगीत की प्रस्तुति देते कलाकार और झूमते दर्शक।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी का ऐतिहासिक पुराना किला रविवार को भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक उल्लास के अद्भुत संगम का साक्षी बना। सनातन जर्नी कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भजन-कीर्तन और संकीर्तन की मधुर धुनों के बीच अध्यात्म की अविरल धारा का अनुभव किया। भारतीय संस्कृति की प्राचीन वैदिक परंपराओं को आधुनिक संगीत शैली के साथ जोड़ने की परिकल्पना पर आधारित इस महोत्सव ने युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों को आकर्षित किया।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से संरक्षित ऐतिहासिक पुराना किला पहली बार इतने बड़े स्तर पर आध्यात्मिक संगीत के आयोजन का साक्षी बना। कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक अगम अग्रवाल, लोकप्रिय माधवास रॉक बैंड, आरती खेतरपाल और आयाना डांस कंपनी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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पारंपरिक भजन-कीर्तन को ‘भजन क्लबिंग’ की शैली में प्रस्तुत किया गया, जिससे युवा वर्ग में विशेष उत्साह देखने को मिला। ‘सनातन जर्नी’ में मंच से गुलाब, गेंदा और विभिन्न सुगंधित पुष्पों की वर्षा के बीच श्रद्धालु संकीर्तन में झूमते नजर आए। बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने बड़े उत्साह से इस अनूठी होली में भाग लिया।
बिना रंग और रसायन के, केवल फूलों से खेली गई यह होली शुद्धता और सात्विकता का संदेश देती नजर आई। कार्यक्रम के दौरान बार-बार “जय श्री राम” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से ऐतिहासिक परिसर गूंज उठा। आयोजक निकुंज गुप्ता के अनुसार, ‘सनातन जर्नी’ का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ना है।
जेन जी बना सनातन जर्नी का गवाह
अक्सर यह कहा जाता है कि जेन जी पारंपरिक धार्मिक आयोजनों से दूरी बना रही है, लेकिन ‘सनातन जर्नी’ ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। हजारों श्रद्धालुओं के बीच युवाओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से कटना नहीं चाहती, बल्कि उन्हें अपने तरीके से अपनाना चाहती है। कार्यक्रम में आध्यात्मिक वातावरण के साथ प्राकृतिक उत्पादों से बने विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए, जिन्होंने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।