सत्य निकेतन हादसा: 55 गज में पांच मंजिल, सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं; अतिरिक्त मंजिलों ने बढ़ाया था खतरा
दिल्ली इमारत हादसे के बाद शुरुआती जांच में निर्माण और सुरक्षा इंतजामों में गंभीर खामियां सामने आई हैं। एमसीडी के अनुसार, 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत का कोई मंजूर बिल्डिंग प्लान नहीं था और बेसमेंट भी अनधिकृत था। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब दो साल पहले दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं।
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सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद हादसे की वजह और जिम्मेदारी को लेकर जांच तेज हो गई है। शुरुआती जांच में इमारत के निर्माण, बाद में किए गए बदलाव और सुरक्षा इंतजामों में गंभीर खामियां सामने आई हैं।
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत का कोई मंजूर बिल्डिंग प्लान रिकॉर्ड में नहीं मिला है। बेसमेंट का निर्माण भी अनधिकृत बताया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत में करीब दो साल पहले दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं।
पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन मंजिलों का निर्माण कब हुआ और क्या इसके लिए किसी तरह की अनुमति ली गई थी। इमारत के बेसमेंट में पानी जमा होने और वहां काम चलने की बात भी सामने आई है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों के पीजी रेंट एग्रीमेंट की एक प्रति वायरल हो रही है। इसमें तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का अग्रिम किराया लेने समेत कई शर्तें हैं। एग्रीमेंट में यह भी लिखा है कि अवधि पूरी होने से पहले कमरा छोड़ने पर सिक्योरिटी या फीस वापस नहीं होगी।
सबसे गंभीर शर्त वह है, जिसमें पीजी प्रशासन को छात्र के साथ होने वाली किसी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया है। फर्नीचर या फिक्स्चर को नुकसान होने पर उसकी भरपाई सिक्योरिटी मनी से करने का प्रावधान भी है। हादसे के बाद ऐसे एकतरफा समझौतों की वैधता और छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।