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सर्दी में दिल को संभाले: कम पानी पीने और बीपी बढ़ने से बढ़ेंगी मुश्किलें, एंजाइना और हार्ट अटैक का जोखिम

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 13 Jan 2026 03:41 AM IST
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सार

सर्दी में दिल को संभालें, कम पानी पीने और बीपी अधिक होने से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शरीर में पानी की मात्रा कम होने से खून गाढ़ा हो जाता है जिससे एंजाइना और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। 

Take care of your heart this winter Drinking less water and rising blood pressure will increase problems raisi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : adobe stock images
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विस्तार
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सर्दी में दिल को संभालें, कम पानी पीने और बीपी अधिक होने से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शरीर में पानी की मात्रा कम होने से खून गाढ़ा हो जाता है जिससे एंजाइना और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी के मौसम में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, ब्रोंकियल अस्थमा, सीओपीडी, साइनोसाइटिस, फैरिंजाइटिस, निमोनिया जैसी दूसरी समस्या बढ़ जाती है। इन दिनों इस तरह की शिकायत लेकर इमरजेंसी में अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। सर्दी से बचाव को लेकर एम्स के अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर इसके लिए चेताया।

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एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. राजीव नारंग ने कहा कि सर्दी के मौसम में दिल संबंधी बीमारियों के मरीजों को खुद ख्याल रखना चाहिए। सर्दियों में ब्लड प्रेशर (बीपी) का बढ़ना स्वाभाविक है। ब्लड वेसल्स में सिकुड़न होने लगती है। कई मरीज ऐसे होते हैं जिनका ब्लड प्रेशर पहले दवाओं से नियंत्रित था मगर, सर्दी के मौसम में बढ़ने लगता है। इसके लिए उन्हें दवा की खुराक बढ़ानी पड़ती है। बीपी के बढ़ने से कई बार मरीजों को चलने-फिरने में दिक्कत से लेकर सांस संबंधी दिक्कत होती है। पैरों में सूजन आ सकती है। जिनका बीपी ज्यादा रहता है वह नियमित तौर पर चेक करवाएं। अच्छा है कि घर पर मशीन रख लें।

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हफ्ते में दो बार बीपी की करें जांच
उन्होंने बताया कि बीपी को हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर चेक करें। ब्लड प्रेशर 140/90 से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर बीपी ज्यादा है तो अपने डॉक्टर से जरूर बात कर दवा लें। खाने में नमक लेने से भी बीपी बढ़ता है। इस बात का ध्यान रखें कि नमकीन चीजें ज्यादा न खाएं। ब्लड सप्लाई कम होने से हार्ट अटैक और एंजाइना का जोखिम होता है।

सर्दी में पानी पीना न करे बंद
डॉ. राजीव नारंग ने कहा कि सामान्य तौर पर इस मौसम में सुबह और शाम बाहर घूमने की सलाह नहीं देते हैं। दोपहर के समय घूमना ज्यादा अच्छा है। यही नहीं सर्दियों में लोग पानी भी कम पीते हैं क्योंकि प्यास कम लगती है। उससे ब्लड गाढ़ा होने लगता है जिससे हार्ट अटैक के मामले बढ़ते हैं। पानी के साथ चाय, दूध जैसे तरल पदार्थ जरूर लेते रहें। सर्दियों में पानी पीना बिल्कुल बंद न करें। इसके अलावा सर्दियों में प्रदूषण भी बढ़ा होता है जो दिल की बीमारियों के लिए खतरनाक है।

सांस की नली सिकुड़ जाती है
एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रो. डॉ. संजीव सिन्हा ने कहा कि इस मौसम में शीत लहर से फेफड़े संबंधी बीमारियां होती हैं। ठंडी हवा को जब अंदर लेते है तो ब्रोन्कोस्पाज्म हो जाता है। सांस की नली में सिकुड़न होने लगती है। आजकल ओपीडी और इमरजेंसी में काफी मरीज आ रहे है जिनको सीओपीडी है। मरीज खांसी, बलगम के लक्षणों के साथ पहुंच रहे है। कुछ लोगों को ठंड में अधिक एक्सपोजर होने के कारण निमोनिया भी हा जाती है। यह बैक्टीरियल, वायरल और फंगल भी हो सकता है।

जरूरत होने पर ही घर से निकले बुजुर्ग
उन्होंने बताया कि बुजुर्ग लोग जो क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, एम्फिसीमा, सीओपीडी, ब्रोंकियल अस्थमा से जूझ रहे हैं उनको अपना ध्यान रखना चाहिए। अगर जरूरी काम हो तभी घर से बाहर निकलें। चेहरे और सिर को ढककर रखें। अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक इन्फेक्शन भी काफी देखा जा रहा है। मरीज को फैरिंजाइटिस, साइनोसाइटिस भी हो सकता है। मरीज को छींक, नाक बहने, गला में खराश और खांसी आने लगती है। ऐसे लक्षण होने पर मरीज को डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।


 

डायबीटिज के मरीज खाने-पीने का करें परहेज

एम्स के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में प्रो. डॉ. राजेश खड़गावत ने कहा कि सर्दी के मौसम में डायबिटीज मरीजों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। तापमान कम होने के कारण बाहर निकलना बंद हो जाते हैं। शराीरिक तौर पर सक्रिय रहना जरूरी है। घर में योग और शारीरिक अभ्यास को बिल्कुल न छोड़े। घर में छत या बरामदे में घूमे जरूर। सर्दी के मौसम खुराक भी बढ़ जाता है जो कि डायबिटीज मरीजों के लिए ठीक नहीं है। गुजिया, नमकीन जैसी चीजों को खाने से परहेज करें। 65 साल से से अधिक उम्र वाले मरीजों को वैक्सीन भी लगाई जाती है ताकि मरीज संक्रमण से बचा रहें।


 

ठंड लगने पर बच्चा हो जाता है सुस्त
एम्स के पीडियाट्रिक विभाग में प्रो. डॉ. राजेश लोढ़ा ने कहा कि ऐसे नवजात शिशु जिनका समय पूर्व जन्म और वजन कम होता है तो ऐसे बच्चों का सर्दी में ख्याल रखना जरूरी है। बच्चों को ठंड लगने पर वायरल, सर्दी, खांसी, जुकाम के लक्षण बढ़ जाते हैं। सांस लेने में परेशानी होने लगती है। फीडिंग कम हो जाती है। अगर ऐसा कुछ है तो उसका बचाव जरूरी है।

इमरजेंसी में बुजुर्ग निमोनिया के लक्षणों के साथ रहे आ

एम्स के जीरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में डॉ. अभिजीत आर राव ने कहा कि सर्दी में बुजुर्गों को लेकर ज्यादा जोखिम रहता है। बॉडी टेंप्रेचर मैकेनिज्म थोड़ा धीमा होता है। ऐसे में बुजुर्ग लोग सुबह और शाम के समय सैर से बचें। बुजुर्गों में डायबिटीज, सीओपीडी, किडनी, लिवर रोग और दिल संबंधी बीमारी रहती है। धूप में ही घर से बाहर निकले। गर्मी पानी से नहाएं और पीने में उसका इस्तेमाल करें। ओपीडी में आने वाले ज्यादा बुजुर्गों में सर्दी, जुकाम, खांसी और दूसरे संक्रमण के लक्षण देखने को मिलते हैं।

किडनी मरीजों के लिए जरूरी
एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में प्रो. डॉ. संदीप महाजन ने कहा कि सर्दी के मौसम में किडनी की बीमारी से ग्रसित मरीजों का भी बीपी बढ़ जाता है। करीब 90 फीसदी मरीज बीपी के होते हैं। किडनी मरीजों के खाने को लेकर काफी पाबंदिया होती है।



 

डीहाइड्रेशन से बढ़ रहा किडनी रोगों का खतरा
बदलती जीवनशैली और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों में डीहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर किडनी से जुड़ी बीमारियों पर देखने को मिल रहा है। सर्दी में ज्यादातर लोग पानी पीने से बचते हैं ऐसे में बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर में पानी की कमी से किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे पथरी, यूरिन इंफेक्शन और पेशाब से जुड़ी अन्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से पेशाब गाढ़ा हो जाता है, जिससे किडनी में मिनरल्स जमा होकर पथरी का रूप ले लेते हैं। वहीं, कम पानी पीने से बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिलता है, जिससे यूरिन इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है। कई मामलों में मरीजों को जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द और बुखार जैसी शिकायतें होती हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि किडनी को स्वस्थ रखने के लिए दिनभर में पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है। इससे टॉक्सिन्स शरीर से बाहर निकलते हैं और किडनी पर दबाव कम होता है। साथ ही हाइड्रेट रहने से स्किन से जुड़ी कई समस्याओं में भी राहत मिलती है। पानी त्वचा को नमी प्रदान करता है, जिससे ड्राइनेस, मुंहासे और समय से पहले झुर्रियां आने की समस्या कम होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी पिया जाए। चाय, कॉफी या सॉफ्ट ड्रिंक की जगह सादा पानी, नारियल पानी और तरल फलों का सेवन अधिक फायदेमंद होता है। अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना भी जरूरी है।

गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. प्रवीन कुमार ने बताया कि, डीहाइड्रेशन किडनी से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों की जड़ है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पथरी और यूरिन इंफेक्शन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिन में 8–10 गिलास पानी जरूर पिएं, पेशाब का रंग गहरा हो तो पानी की मात्रा बढ़ाएं, गर्मी और शारीरिक मेहनत के दौरान तरल पदार्थ का सेवन अधिक करें।

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