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Delhi NCR News: कभी प्यास बुझाता था जोहड़, आज बीमारी बांट रहा
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- गंदे पानी, काई और कचरे से परेशान ग्रामीण बोले- सिर्फ आश्वासन नहीं, सफाई चाहिए
- बरसात के बाद बिगड़े हालात, सालों से सफाई नहीं होने का लोगों ने लगाया आरोप
सचिन कुमार
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी गांव का जोहड़ अब जल संरक्षण का स्रोत नहीं, बल्कि गंदगी और बीमारियों का केंद्र बन गया है। बरसात के बाद इसकी स्थिति और बिगड़ गई है, जिससे आसपास रहने वाले लोग तेज बदबू और मच्छरों के प्रकोप से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन की उपेक्षा के कारण कई सालों से इसकी सफाई नहीं हुई है।
जोहड़ का पानी काला पड़ गया है, उसमें काई जम गई है और प्लास्टिक व अन्य कचरा जमा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जोहड़ कभी गांव की प्यास बुझाता था और भूजल स्तर बनाए रखता था। अब यह गंदे और सड़ते पानी का तालाब बन चुका है, जिससे लोग दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने को मजबूर हैं। मच्छरों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का डर सता रहा है। पिछले साल भी आसपास डेंगू के मरीज मिले थे। स्थानीय निवासी ऋषिपाल ने बताया कि हर शाम मच्छरों से बचने के लिए धुआं करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग सावधानी बरतने की सलाह देता है लेकिन सफाई के बिना बीमारी का खतरा बना रहेगा।
अधूरी चारदीवारी और कूड़े का ढेर
जोहड़ की चारदीवारी बनाने का काम कुछ साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन वह अधूरा रह गया। कई जगह दीवार टूट चुकी है, जिससे लोग आसानी से कूड़ा जोहड़ में फेंक देते हैं। स्थानीय निवासी श्रवण पाल ने बताया कि अधूरी चारदीवारी के कारण पूरा जोहड़ गंदगी से भर गया है। अगर चारदीवारी पूरी होती और उसकी देखभाल होती तो यह हालत नहीं होती।
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कारोबार पर असर और समाधान की मांग
स्थानीय दुकानदार धर्मवीर ने बताया कि बरसात में जोहड़ का पानी गलियों तक पहुंच जाता है, जिससे सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं। बदबू और गंदगी के कारण ग्राहक भी कम आने लगे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ संजय मिश्रा ने दिल्ली में पुराने जोहड़ों के संरक्षण को जरूरी बताया। ग्रामीणों ने जोहड़ से गाद और कचरा हटाने, टूटी चारदीवारी की मरम्मत और नियमित सफाई की मांग की है। रघुवीर सिंह ने कहा कि सिर्फ नियमित सफाई और गंदगी फेंकने पर रोक से आधी समस्या खत्म हो जाएगी।
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- बरसात के बाद बिगड़े हालात, सालों से सफाई नहीं होने का लोगों ने लगाया आरोप
सचिन कुमार
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी गांव का जोहड़ अब जल संरक्षण का स्रोत नहीं, बल्कि गंदगी और बीमारियों का केंद्र बन गया है। बरसात के बाद इसकी स्थिति और बिगड़ गई है, जिससे आसपास रहने वाले लोग तेज बदबू और मच्छरों के प्रकोप से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन की उपेक्षा के कारण कई सालों से इसकी सफाई नहीं हुई है।
जोहड़ का पानी काला पड़ गया है, उसमें काई जम गई है और प्लास्टिक व अन्य कचरा जमा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जोहड़ कभी गांव की प्यास बुझाता था और भूजल स्तर बनाए रखता था। अब यह गंदे और सड़ते पानी का तालाब बन चुका है, जिससे लोग दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने को मजबूर हैं। मच्छरों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का डर सता रहा है। पिछले साल भी आसपास डेंगू के मरीज मिले थे। स्थानीय निवासी ऋषिपाल ने बताया कि हर शाम मच्छरों से बचने के लिए धुआं करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग सावधानी बरतने की सलाह देता है लेकिन सफाई के बिना बीमारी का खतरा बना रहेगा।
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अधूरी चारदीवारी और कूड़े का ढेर
जोहड़ की चारदीवारी बनाने का काम कुछ साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन वह अधूरा रह गया। कई जगह दीवार टूट चुकी है, जिससे लोग आसानी से कूड़ा जोहड़ में फेंक देते हैं। स्थानीय निवासी श्रवण पाल ने बताया कि अधूरी चारदीवारी के कारण पूरा जोहड़ गंदगी से भर गया है। अगर चारदीवारी पूरी होती और उसकी देखभाल होती तो यह हालत नहीं होती।
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कारोबार पर असर और समाधान की मांग
स्थानीय दुकानदार धर्मवीर ने बताया कि बरसात में जोहड़ का पानी गलियों तक पहुंच जाता है, जिससे सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं। बदबू और गंदगी के कारण ग्राहक भी कम आने लगे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ संजय मिश्रा ने दिल्ली में पुराने जोहड़ों के संरक्षण को जरूरी बताया। ग्रामीणों ने जोहड़ से गाद और कचरा हटाने, टूटी चारदीवारी की मरम्मत और नियमित सफाई की मांग की है। रघुवीर सिंह ने कहा कि सिर्फ नियमित सफाई और गंदगी फेंकने पर रोक से आधी समस्या खत्म हो जाएगी।