पार्टी, खाना और फिर नहर: दिल्ली में तीन दोस्त मुनक कैनाल में डूबे, उजड़ गए दो परिवारों के सपने, एक जिंदा बचा
रविवार और सोमवार शाम तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी दोनों युवकों का सुराग नहीं लग पाया। देर शाम तक बचाव का काम जारी रहा। डूबे हुए दोनों दोस्तों की पहचान गांव बहरिया, प्रयागराज निवासी सत्यम (20) और कुंडा, प्रतापगढ़ निवासी प्रशांत पांडेय (19) के रूप में हुई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बाहरी-उत्तरी दिल्ली के बवाना इलाके में रविवार दोपहर नहर में नहाने के दौरान तीन दोस्त डूबने लगे। शोर-शराबा हुआ तो वहां मौजूद लोगों ने रस्सी डालकर किसी तरह एक युवक को बाहर निकाल लिया जबकि दो दोस्त पानी में डूब गए। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस के अलावा दमकल विभाग और बोट क्लब की टीम मौके पर पहुंची।
एक प्रयागराज तो दूसरा प्रतापगढ़ का
रविवार और सोमवार शाम तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी दोनों युवकों का सुराग नहीं लग पाया। देर शाम तक बचाव का काम जारी रहा। डूबे हुए दोनों दोस्तों की पहचान गांव बहरिया, प्रयागराज निवासी सत्यम (20) और कुंडा, प्रतापगढ़ निवासी प्रशांत पांडेय (19) के रूप में हुई है। दोनों के डूबने की खबर मिलने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
सत्यम और प्रशांत की पृष्टभूमि
पुलिस के मुताबिक सत्यम परिवार के साथ दुर्गा चौक, प्रेम नगर, किराड़ी इलाके में रहता है। इसके परिवार में पिता लल्लू राम सोनी, मां सरोज देवी के अलावा बड़ा भाई शिवम और एक बहन मोनिका है। सत्यम का एरिया में झाड़ू सप्लाई करने का काम है। वहीं प्रशांत भी इसके पड़ोस में रहता है। इसके परिवार में पिता गिरिजा रामा शंकर पांडेय, मां, छोटा भाई प्रसंत औश्र बहन प्राची है।
मनीष ने पकड़ी रस्सी से तो बची जान
प्रशांत का अपने पिता के साथ शटरिंग का काम है। वहीं इनका तीसरा दोस्त मनीष तिवारी भी एरिया में रहता है। रविवार दोपहर के समय तीनों दोस्तों का प्रोग्राम बवाना नहर में नहाने का बना। इस बीच तीनों सत्यम की स्कूटी से बवाना नहर पर हनुमान मंदिर के पास पहुंचे। तीनों ही दोस्तों को तैरना नहीं आता था। नहाने के दौरान तीनों गहरे पानी में चले गए। इस बीच वह पानी के बहाव में बहने लगे। शोर-शराबा होने पर वहां मौजूद लोगों ने पास पड़ी रस्सी उठाकर नहर में डाली। मनीष ने किसी तरह रस्सी पकड़ ली, लेकिन सत्यम और प्रशांत को नहीं बचाया जा सका। दोनों डूब गए। इसके बाद बचाव दल को सूचना दी गई।
पापा मैं थोड़ी देर में घर पहुंच रहा हूं...
दोपहर करीब 2.10 बजे सत्यम ने अपने पिता लल्लू राम सोनी को कॉल किया। पिता ने घर आने के बारे में पूछा तो सत्यम ने कुछ देर बाद ही आने की बात की। पुलिस की पूछताछ में मनीष ने बताया कि वह अपने काम पर था। वह प्लाई की गाड़ी खाली करवा रहा था। इस बीच सत्यम का कॉल उसके पास आया और पार्टी करने की बात करने लगा।
हादसे से पहले तीनों ने खाया खाना
मनीष ने आने से मना किया तो प्रशांत ने सत्यम से फोन लेकर मनीष को जल्द पहुंचने के लिए दबाव बनाया। मनीष पहुंच भी गया। इसके बाद तीनों दोस्तों ने एक होटल पर बैठकर खाना खाया। बाद में तीनों हनुमान मंदिर के पास पहुंचे और कपड़े व मोबाइल स्कूटी की डिग्गी में रखकर नहाने लगे। बाद में सत्यम और प्रशांत डूब गए।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल...
सत्यम और प्रशांत के डूबने की खबर मिलते ही दोनों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार को आस है कि शायद उनके बच्चे वापस आ जाएंगे। सत्यम के बड़े भाई शिवम ने बताया कि वह गुरुग्राम में रहकर अपना काम करता था। रविवार दोपहर के समय उसे भाई के डूबने का पता चला। खबर मिलते ही वह तुरंत घर पहुंच गया।
दूर तक ढूंढते रहे परिजन
सत्यम के डूबने की खबर मिलने के बाद से ही पिता लल्लू और मां सरोज का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरा परिवार रविवार दोपहर से देर शाम तक नहर किनारे बैठा रहा। रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद दोबारा परिवार बवाना नहर के पास पहुंच गया। इस बीच उनके रिश्तेदार और बाकी परिजन बवाना नहर में दूर तक सत्यम को ढूंढते रहे।
भाई-बहनों में सबसे बड़ा था प्रशांत
सोमवार सुबह 9 बजे एक बार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। देर शाम तक दोनों का पता नहीं चल सका है। वहीं प्रशात के परिजन भी बेटे के डूबने की खबर मिलने के बाद से गमगीन हैं। प्रशांत भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। दोनों युवकों के घरों पर रिश्तेदारों का भी तांता लगा हुआ है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।