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Tughlaqabad Fire: बंद कुंडियां, एक निकास और अव्यवस्थाओं ने बढ़ाए सवाल; लापरवाही की लपटों से पसरा मौत का मातम
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 13 Jun 2026 03:38 AM IST
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सार
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि आग के दौरान इमारत की कई मंजिलों के मुख्य दरवाजों पर बाहर से कुंडियां लगी हुई थीं।
इमारत में बाहर निकलने का केवल एक रास्ता था, जो आग लगने के बाद पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तुगलकाबाद एक्सटेंशन में पांच मंजिला रिहायशी इमारत में हुए भीषण अग्निकांड के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने हादसे की गंभीरता के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का दावा है कि आग के दौरान इमारत की कई मंजिलों के मुख्य दरवाजों पर बाहर से कुंडियां लगी हुई थीं। वहीं, इमारत में बाहर निकलने का केवल एक रास्ता था, जो आग लगने के बाद पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
स्थानीय निवासी रेनू भूटानी और उनके बेटे मानव भूटानी उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने राहत कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई। रेनू के अनुसार रात में बेटे का फोन आने पर वह मौके पर पहुंचीं तो चारों ओर धुआं फैला हुआ था। इमारत के भूतल पर सीढ़ियों के पास खड़े दोपहिया वाहन आग की चपेट में थे। वहां सात मोटरसाइकिल, एक इलेक्ट्रिक स्कूटर और एक साइकिल खड़ी थी। आग और धुएं के कारण मुख्य रास्ते से अंदर जाना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय लोग इमारत के पीछे की ओर पहुंचे। वहां से छत तक पहुंचने का प्रयास किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छत का गेट बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था। आग की गर्मी से लोहे का गेट क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद उसे तोड़कर रास्ता बनाया गया।
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धुएं का असर कम करने के लिए टंकियों में छेद कर पानी सीढ़ियों की ओर बहाया गया
रेनू बताती हैं कि छत पर रखी पानी की टंकियों में छेद कर पानी सीढ़ियों की ओर बहाया गया, जिससे धुएं का असर कुछ कम हुआ। इसके बाद राहत दल और स्थानीय लोगों ने अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया। उनका दावा है कि तीसरी मंजिल के मुख्य दरवाजे पर बाहर से लगी कुंडी खोली गई, जिसके बाद वहां फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ। इसी मंजिल पर पंकज और उनका परिवार रहता था।
आग की वजह को लेकर अलग-अलग दावे
आग लगने के कारण को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। स्थानीय निवासी मानव भूटानी का कहना है कि शुरुआती तौर पर आग इलेक्ट्रिक स्कूटर की चार्जिंग के दौरान स्पार्किंग से लगी प्रतीत होती है। उनके मुताबिक मौके पर मौजूद बिजली के बोर्डों पर आग लगने या शॉर्ट सर्किट के स्पष्ट निशान नहीं दिखे। हालांकि पुलिस की प्रारंभिक जांच में बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण बताया गया है। आग के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
साड़ी बनी जीवन रेखा, दो युवतियों की बची जान
हादसे के दौरान स्थानीय लोगों की सूझबूझ ने कई लोगों की जान बचाई। सामने की इमारत में रहने वाले सौरभ ने बताया कि धुएं के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। इसी दौरान उन्हें सामने की दूसरी मंजिल की बालकनी से मदद की आवाज सुनाई दी।सौरभ ने अपनी पत्नी की साड़ी बालकनी की ओर फेंकी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दो युवतियों ने उसी साड़ी के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई। स्थानीय लोगों ने उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
शुरुआती राहत कार्य को लेकर भी उठे सवाल
हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य की शुरुआती स्थिति को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सुबह तक सीमित संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के पहुंचने के बाद अतिरिक्त पुलिस बल और अन्य एजेंसियों की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं।
इसके बाद क्षेत्र में यातायात प्रबंधन, अतिक्रमण हटाने और राहत कार्यों को व्यवस्थित करने की कार्रवाई तेज की गई।
सवाल यहां भी उठते हैं
- लगभग 100 गज के प्लॉट पर बहुमंजिला निर्माण और घनी आबादी के बीच सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं कराया गया?
- भूतल पर वाहनों की पार्किंग के साथ चार्जिंग की व्यवस्था कैसे संचालित हो रही थी?
- इमारत में कहीं भी अग्निशमन उपकरण या फायर सेफ्टी सिस्टम क्यों मौजूद नहीं था, क्या इसकी कभी जांच की गई?
- आसपास के भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां और छोटे कारखाने कैसे संचालित हो रहे?
- हादसे के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने और मार्ग साफ कराने की कार्रवाई शुरू की, पहले ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?