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Delhi High Court: 'बेटी के PPF का पैसा गुजारा-भत्ते में नहीं लगा सकते पिता', दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

Sat, 08 Aug 2026 05:07 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 08 Aug 2026 05:07 PM IST
सार

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पिता अपनी बेटी के नाम पर जमा पीपीएफ की रकम को गुजारा-भत्ता देने के लिए नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने अपनी कोर्ट में यह टिप्पणी की। 

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Father cannot pay maintenance from daughter PPF funds said Delhi High Court
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि पिता अपनी बेटी के नाम पर जमा पीपीएफ की रकम का इस्तेमाल पत्नी या बेटी को गुजारा-भत्ता देने की अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए नहीं कर सकते।  न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि बच्चे के नाम पर किया गया निवेश उसी के भविष्य के लिए होता है। उसे माता-पिता के आपसी विवाद या भरण-पोषण की जिम्मेदारी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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यह फैसला सुधीर कवात्रा बनाम शामली कवात्रा मामले में सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पिता को बेटी की पीपीएफ की पूरी रकम 8 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया गया था।
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मामले के अनुसार, सुधीर कवात्रा ने वर्ष 1999 में अपनी बेटी शामली कवात्रा के नाम पीपीएफ खाता खोला था। बेटी की पढ़ाई और भविष्य के लिए इस खाते में रकम जमा की गई थी। शामली के मुताबिक, 2017 में जब वह पीपीएफ की अवधि पूरी होने के बाद बैंक पहुंचीं तो उन्हें पता चला कि उनके पिता ने वर्ष 2016 में ही खाते से 8 लाख रुपये से अधिक की पूरी रकम निकालकर खाता बंद कर दिया था। 
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बेटी ने आरोप लगाया कि रकम उसकी पढ़ाई और भविष्य के लिए थी, लेकिन इसका इस्तेमाल उसकी शिक्षा पर नहीं किया गया। इसके बाद उसने रकम वापस पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

पिता ने गुजारा-भत्ते में रकम इस्तेमाल करने की बात कही
पिता की ओर से दलील दी गई कि माता-पिता के बीच विवाद के कारण वे अलग रह रहे थे और फैमिली कोर्ट के आदेश के तहत पत्नी के भरण-पोषण के लिए रकम खर्च की गई थी। 

उन्होंने यह भी दावा किया कि वह पत्नी को अतिरिक्त गुजारा-भत्ता भी दे रहे थे, जिसका लाभ बेटी को भी मिल रहा था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी का गुजारा-भत्ता और बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी अलग-अलग कानूनी जिम्मेदारियां हैं। पिता अपनी इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए बेटी के नाम पर जमा रकम का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

बेटी के नाम निवेश, तो रकम पर उसी का अधिकार
कोर्ट ने कहा कि पीपीएफ खाता पिता ने जरूर खोला था, लेकिन यह बेटी के लाभ और उसके भविष्य के लिए था। पिता इस खाते को केवल अभिभावक के तौर पर संचालित कर रहे थे। बेटी के बालिग होने के बाद वह इस रकम की हकदार थी। 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों की परवरिश और उनकी जरूरतों का खर्च माता-पिता की स्वतंत्र कानूनी जिम्मेदारी है। इसे बच्चे के नाम पर जमा निवेश से पूरा नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए पिता को बेटी की पूरी पीपीएफ रकम 8 प्रतिशत ब्याज समेत वापस करने का निर्देश दिया।

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