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सुई-धागे के हुनर को मिलेगी नई उड़ान: पंजीकृत कारीगरों को मिलेगा प्रशिक्षण, दिल्ली खादी कौशल विकास योजना शुरू

आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 23 Jun 2026 05:28 AM IST
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सार

राजधानी के असंगठित कारीगरों को अपना हुनर निखारने और कमाई बढ़ाने का मौका मिलेगा। दिल्ली सरकार ने ऐसे कामगारों के लिए दिल्ली खादी कौशल विकास योजना शुरू कर दी है।

Needlework skills will gain new momentum Registered artisans will receive training,Delhi Khadi Skill Developme
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : samvad
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विस्तार

राजधानी के असंगठित कारीगरों को अपना हुनर निखारने और कमाई बढ़ाने का मौका मिलेगा। दिल्ली सरकार ने ऐसे कामगारों के लिए दिल्ली खादी कौशल विकास योजना शुरू कर दी है। इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 18,000 से अधिक दर्जी वर्ग के कारीगरों के हुनर को नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसडीसी) के मानकों के साथ जोड़कर मुख्यधारा में लाना है। इसके लिए बोर्ड ने एजेंसी नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। योजना के तहत कुल 4810 उम्मीदवार प्रशिक्षित होंगे। इसमें सबसे अधिक ध्यान टेलर ट्रेड पर है, जिसके लिए 3600 सीटें हैं। बोर्ड का मानना है कि ई-श्रम पोर्टल पर दिल्ली के करीब 18,632 दर्जी पहले से रजिस्टर्ड हैं, जिन्हें उन्नत प्रशिक्षण देकर उनकी उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। 



टेलरिंग के अलावा बेकरी, परफ्यूम मेकिंग, मोमबत्ती बनाना, हेयर स्टाइलिस्ट, मेकअप आर्टिस्ट और कुम्हारी (पॉटरी) जैसे नौ विभिन्न क्षेत्रों में भी ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग के दौरान वजीफा और मुफ्त भोजन की सुविधा : यह ट्रेनिंग पूरी तरह मुफ्त होगी और प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों की जेब पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा। टेलरिंग के लिए 12 दिनों की ट्रेनिंग और अन्य कोर्सेज के लिए सात से 8.5 दिनों की ट्रेनिंग के दौरान 400 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वजीफा सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा। इसके अलावा, ट्रेनिंग सेंटर पर ही सभी प्रतिभागियों को  दोपहर का भोजन भी मुफ्त दिया जाएगा। योजना का लाभ केवल उन लोगों को मिलेगा जो पिछले 5 वर्षों से दिल्ली के निवासी हैं। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस), महिलाओं और दिव्यांगों (पीडब्ल्यूडी) को विशेष प्राथमिकता और लाभ मिलेंगे। लाभार्थियों का चयन ई-श्रम पोर्टल, कॉमन सर्विस सेंटर और बोर्ड की वेबसाइट के जरिए होगा।
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मुफ्त सिलाई मशीन और ओएनडीसी के जरिए ऑनलाइन बाजार : केवल ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टेलर ट्रेड के लाभार्थियों को मुफ्त टूलकिट (सिलाई मशीन) भी दी जाएगी। उनके उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए ई-कैटलॉग बनाया जाएगा और उन्हें केंद्र सरकार के ओएनडीसी (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) प्लेटफॉर्म पर लिस्ट किया जाएगा, ताकि वे देश भर में अपने उत्पाद बेच सकें।
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प्रमाणन मिलेगा, आसान होगी भविष्य की राह
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक कारीगर का मूल्यांकन नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनसीवीईटी) द्वारा अनुमोदित एजेंसियों द्वारा किया जाएगा। सफल होने वाले कारीगरों को मुख्यमंत्री प्रमाण पत्र और एक आधिकारिक आईडी कार्ड दिया जाएगा, जो भविष्य में उन्हें ऋण लेने और स्वरोजगार स्थापित करने में मदद करेगा। योजना के कार्यान्वयन के लिए 4 करोड़ रुपये का बजट अनुमानित है।

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