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Delhi News: जलभराव हुआ तो अफसर होंगे जिम्मेदार
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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ‘फ्लड कंट्रोल ऑर्डर-2026’ जारी
हर चिन्हित जलभराव वाले स्थान पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बारिश के दौरान दिल्ली में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने जवाबदेही तय कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ‘फ्लड कंट्रोल ऑर्डर-2026’ जारी किया गया है, जिसके तहत हर चिन्हित जलभराव वाले स्थान पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनने पर संबंधित अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य केवल बारिश के बाद राहत कार्य करना नहीं, बल्कि संभावित संकट को पहले से पहचान कर रोकथाम के उपाय करना है।
फ्लड कंट्रोल ऑर्डर से तय होगी विभागों की जिम्मेदारी
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि फ्लड कंट्रोल ऑर्डर सभी विभागों के लिए दिशा-निर्देश पुस्तिका की तरह काम करेगा। इसमें जल निकासी व्यवस्था, नदी के तटबंध, पंपिंग स्टेशन, रेगुलेटर, आपातकालीन ऑपरेशन प्लान, मशीनरी की उपलब्धता और कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर शामिल किए गए हैं। सभी विभाग अपनी टीमों को अलर्ट मोड पर रखें और राहत व बचाव उपकरणों की जांच पहले ही पूरी कर लें।
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जलभराव वाले इलाकों के लिए अलग जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के प्रत्येक चिन्हित जलभराव बिंदु पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था, पंपों की उपलब्धता और आपात स्थिति में कार्रवाई सुनिश्चित करें। स्थायी पंप हाउस की जांच की जाए और जरूरत वाले इलाकों में मोबाइल पंप तैनात किए जाएं, ताकि बारिश के दौरान पानी निकासी में देरी न हो।
यमुना पर 24 घंटे निगरानी, तीन स्तरीय अलर्ट प्लान
मानसून और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए यमुना नदी के जलस्तर पर तीन स्तरीय अलर्ट व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों ने बताया कि 15 जून से केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय कर दिया गया है। कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, आशीष सूद और मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में सेक्टर कमेटियां बनाई गई हैं। प्रत्येक कमेटी में जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं, जो अपने क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन की निगरानी करेंगे।
नालों की सफाई पर जोर, 30 लाख मीट्रिक टन गाद निकाली
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बताया कि इस बार नालों की सफाई का लक्ष्य बढ़ाया गया है। 22 प्रमुख नालों सहित कुल 77 नालों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद साफ की जा चुकी है। विभाग ने पंपों की संख्या बढ़ाकर 243 से अधिक कर दी है। इनमें स्थायी, मोबाइल और ट्रैक्टर माउंटेड पंप शामिल हैं। आपात स्थिति के लिए 41 नावें, 31 मोटरबोट इंजन और 12 बोट कैरियर ट्रॉलियां भी तैयार रखी गई हैं।
बुराड़ी, किराड़ी और मुंडका पर विशेष नजर
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने किराड़ी, मुंडका, रोहतक रोड, बुराड़ी सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव की समस्या उठाई। मुख्यमंत्री ने इन इलाकों में अतिरिक्त निगरानी, डी-सिल्टिंग और पंपिंग व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। खासतौर पर किराड़ी क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए नियमित मॉनिटरिंग और अतिरिक्त उपाय लागू करने को कहा गया।
सभी 12 जोन में कंट्रोल रूम बनाए
दिल्ली नगर निगम ने बैठक में बताया कि चार फीट से अधिक गहराई वाले 793 नालों की सफाई का काम तेजी से चल रहा है। सभी 12 जोन में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं और संभावित जलभराव वाले स्थानों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की गई है। नगर निगम ने अतिरिक्त मशीनरी और मैनपावर की तैनाती भी शुरू कर दी है।
तकनीक से होगी बाढ़ की निगरानी
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बताया कि आधुनिक डिजिटल सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी, पल्ला क्षेत्र में जल प्रवाह और यमुना के जलस्तर की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागों के बीच बेहतर तालमेल, आधुनिक तकनीक और समयबद्ध तैयारी के जरिये दिल्ली को मानसून की चुनौतियों से सुरक्षित रखा जाएगा।
हर चिन्हित जलभराव वाले स्थान पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बारिश के दौरान दिल्ली में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने जवाबदेही तय कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ‘फ्लड कंट्रोल ऑर्डर-2026’ जारी किया गया है, जिसके तहत हर चिन्हित जलभराव वाले स्थान पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनने पर संबंधित अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य केवल बारिश के बाद राहत कार्य करना नहीं, बल्कि संभावित संकट को पहले से पहचान कर रोकथाम के उपाय करना है।
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फ्लड कंट्रोल ऑर्डर से तय होगी विभागों की जिम्मेदारी
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि फ्लड कंट्रोल ऑर्डर सभी विभागों के लिए दिशा-निर्देश पुस्तिका की तरह काम करेगा। इसमें जल निकासी व्यवस्था, नदी के तटबंध, पंपिंग स्टेशन, रेगुलेटर, आपातकालीन ऑपरेशन प्लान, मशीनरी की उपलब्धता और कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर शामिल किए गए हैं। सभी विभाग अपनी टीमों को अलर्ट मोड पर रखें और राहत व बचाव उपकरणों की जांच पहले ही पूरी कर लें।
जलभराव वाले इलाकों के लिए अलग जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के प्रत्येक चिन्हित जलभराव बिंदु पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था, पंपों की उपलब्धता और आपात स्थिति में कार्रवाई सुनिश्चित करें। स्थायी पंप हाउस की जांच की जाए और जरूरत वाले इलाकों में मोबाइल पंप तैनात किए जाएं, ताकि बारिश के दौरान पानी निकासी में देरी न हो।
यमुना पर 24 घंटे निगरानी, तीन स्तरीय अलर्ट प्लान
मानसून और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए यमुना नदी के जलस्तर पर तीन स्तरीय अलर्ट व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों ने बताया कि 15 जून से केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय कर दिया गया है। कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, आशीष सूद और मनजिंदर सिंह सिरसा के नेतृत्व में सेक्टर कमेटियां बनाई गई हैं। प्रत्येक कमेटी में जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं, जो अपने क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन की निगरानी करेंगे।
नालों की सफाई पर जोर, 30 लाख मीट्रिक टन गाद निकाली
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बताया कि इस बार नालों की सफाई का लक्ष्य बढ़ाया गया है। 22 प्रमुख नालों सहित कुल 77 नालों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद साफ की जा चुकी है। विभाग ने पंपों की संख्या बढ़ाकर 243 से अधिक कर दी है। इनमें स्थायी, मोबाइल और ट्रैक्टर माउंटेड पंप शामिल हैं। आपात स्थिति के लिए 41 नावें, 31 मोटरबोट इंजन और 12 बोट कैरियर ट्रॉलियां भी तैयार रखी गई हैं।
बुराड़ी, किराड़ी और मुंडका पर विशेष नजर
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने किराड़ी, मुंडका, रोहतक रोड, बुराड़ी सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव की समस्या उठाई। मुख्यमंत्री ने इन इलाकों में अतिरिक्त निगरानी, डी-सिल्टिंग और पंपिंग व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। खासतौर पर किराड़ी क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए नियमित मॉनिटरिंग और अतिरिक्त उपाय लागू करने को कहा गया।
सभी 12 जोन में कंट्रोल रूम बनाए
दिल्ली नगर निगम ने बैठक में बताया कि चार फीट से अधिक गहराई वाले 793 नालों की सफाई का काम तेजी से चल रहा है। सभी 12 जोन में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं और संभावित जलभराव वाले स्थानों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की गई है। नगर निगम ने अतिरिक्त मशीनरी और मैनपावर की तैनाती भी शुरू कर दी है।
तकनीक से होगी बाढ़ की निगरानी
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बताया कि आधुनिक डिजिटल सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी, पल्ला क्षेत्र में जल प्रवाह और यमुना के जलस्तर की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागों के बीच बेहतर तालमेल, आधुनिक तकनीक और समयबद्ध तैयारी के जरिये दिल्ली को मानसून की चुनौतियों से सुरक्षित रखा जाएगा।