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बेटे को पीट-पीटकर मारा गया, हत्या का केस बने : पिता
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पंकज धामा के परिवार ने जांच पर उठाए सवाल, आर्थिक सहायता की भी मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। शाहदरा रेलवे स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो के गार्ड पंकज धामा की मौत के मामले में परिवार ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं। पिता राजेंद्र सिंह धामा का कहना है कि उनके बेटे को पीट-पीटकर मारा गया है, ऐसे में गैर इरादतन हत्या नहीं बल्कि हत्या है।
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने उनसे संपर्क नहीं किया। राजेंद्र सिंह धामा ने कहा कि पुलिस ने जिन आठ लोगों को पकड़ा है, वही आरोपी हैं। वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से साफ है कि पंकज पर सामूहिक हमला किया गया था। उन्होंने कहा कि परिवार पुलिस की अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। राजेंद्र सिंह धामा ने कहा कि उनके बेटे की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। परिवार की मांग है कि दोषियों को फांसी की सजा मिले। पंकज धामा की शादी 14 दिसंबर 2018 को हुई थी। परिवार में पत्नी, पांच वर्षीय बेटा और डेढ़ वर्षीय बेटी है। पिता ने बताया कि दोनों बच्चे अभी बहुत छोटे हैं और परिवार के सामने अब भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से आर्थिक सहायता देने की मांग की है ताकि बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा की व्यवस्था हो सके। राजेंद्र सिंह धामा ने कहा कि पंकज परिवार के प्रमुख कमाने वाले सदस्य थे।
मुजफ्फरनगर स्थित अपने गांव जा रहे थे आरोपी
पुलिस ने प्रिंस, सागर, आकाश समेत पांच लोगों को पकड़ा है। इससे पूर्व आठ संदिग्धों को पकड़े जाने की बात कही जा रही थी। पता चला है कि यह सभी शाहदरा से मुजफ्फरनगर स्थिति अपने गांव जा रहे थे। आरोपी शाहदरा इलाके के ही रहने वाले हैंं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में जांच की जा रही है। घटना के दिन शाम को उत्तर रेलवे की ओर से जारी बयान में इसे दो यात्रियों के बीच हुआ विवाद बताया गया था। रेलवे ने यह भी कहा था कि जीआरपी के जवान ने दोनों पक्षों को अलग कर घायल को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि बाद में पुलिस जांच में पांच आरोपियों के पकड़े जाने, वायरल वीडियो सामने आने और घायल को एंबुलेंस के बजाय ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाने जैसी बातें सामने आईं। ऐसे में रेलवे के शुरुआती बयान और बाद में सामने आए तथ्यों के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। डीसीपी रेलवे भरत रेड्डी ने बताया है कि मामले में तीन बालिग आरोपियों सागर, प्रिंस और आकाश को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो नाबालिगों को पकड़कर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। तीनों बालिगों को अदालत से जमानत मिल गई है, जबकि दोनों नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। शाहदरा रेलवे स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो के गार्ड पंकज धामा की मौत के मामले में परिवार ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं। पिता राजेंद्र सिंह धामा का कहना है कि उनके बेटे को पीट-पीटकर मारा गया है, ऐसे में गैर इरादतन हत्या नहीं बल्कि हत्या है।
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने उनसे संपर्क नहीं किया। राजेंद्र सिंह धामा ने कहा कि पुलिस ने जिन आठ लोगों को पकड़ा है, वही आरोपी हैं। वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से साफ है कि पंकज पर सामूहिक हमला किया गया था। उन्होंने कहा कि परिवार पुलिस की अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। राजेंद्र सिंह धामा ने कहा कि उनके बेटे की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। परिवार की मांग है कि दोषियों को फांसी की सजा मिले। पंकज धामा की शादी 14 दिसंबर 2018 को हुई थी। परिवार में पत्नी, पांच वर्षीय बेटा और डेढ़ वर्षीय बेटी है। पिता ने बताया कि दोनों बच्चे अभी बहुत छोटे हैं और परिवार के सामने अब भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से आर्थिक सहायता देने की मांग की है ताकि बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा की व्यवस्था हो सके। राजेंद्र सिंह धामा ने कहा कि पंकज परिवार के प्रमुख कमाने वाले सदस्य थे।
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मुजफ्फरनगर स्थित अपने गांव जा रहे थे आरोपी
पुलिस ने प्रिंस, सागर, आकाश समेत पांच लोगों को पकड़ा है। इससे पूर्व आठ संदिग्धों को पकड़े जाने की बात कही जा रही थी। पता चला है कि यह सभी शाहदरा से मुजफ्फरनगर स्थिति अपने गांव जा रहे थे। आरोपी शाहदरा इलाके के ही रहने वाले हैंं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में जांच की जा रही है। घटना के दिन शाम को उत्तर रेलवे की ओर से जारी बयान में इसे दो यात्रियों के बीच हुआ विवाद बताया गया था। रेलवे ने यह भी कहा था कि जीआरपी के जवान ने दोनों पक्षों को अलग कर घायल को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि बाद में पुलिस जांच में पांच आरोपियों के पकड़े जाने, वायरल वीडियो सामने आने और घायल को एंबुलेंस के बजाय ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाने जैसी बातें सामने आईं। ऐसे में रेलवे के शुरुआती बयान और बाद में सामने आए तथ्यों के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। डीसीपी रेलवे भरत रेड्डी ने बताया है कि मामले में तीन बालिग आरोपियों सागर, प्रिंस और आकाश को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो नाबालिगों को पकड़कर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। तीनों बालिगों को अदालत से जमानत मिल गई है, जबकि दोनों नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया है।