दिल्ली में विनयांजलि सभा आयोजित: संतों और नेताओं की मौजूदगी, संलेखना की महत्ता पर जोर
नई दिल्ली में आयोजित विनयांजलि सभा में प्रदीप जैन आदित्य के पिता मुनि श्री 108 विष्णु सागर जी महाराज को श्रद्धांजलि दी गई। प्रज्ञा सागर जी महाराज सहित संतों ने संलेखना के महत्व पर प्रकाश डाला। इस दौरान कई लोग मौजूद रहे।
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मुनि श्री 108 विष्णु सागर जी महाराज की स्मृति में विनयांजलि सभा 18 मार्च को सायं पांच बजे आयोजित हुई। यह सभा नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में अत्यंत श्रद्धा और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुई। मुनिश्री गृहस्थ जीवन में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के पिताजी थे। कार्यक्रम में आचार्य प्रज्ञा सागर जी महाराज, लोकेश मुनि और श्री योगभूषण जी महाराज सहित अनेक संतों का मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ। देशभर से आए समाज के गणमान्य नागरिकों, धार्मिक नेताओं और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
सभा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। सांसद मनोज तिवारी, वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी और प्रदीप जैन आदित्य सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। आचार्य 108 श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ने अपने प्रेरक उद्बोधन में संलेखना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संलेखना का भारतवर्ष में आदि काल से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, त्याग और संयम की सर्वोच्च साधना है।
उन्होंने कहा कि यह मनुष्य को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है। आचार्य ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने भी अपने जीवन के अंतिम समय में संलेखना धारण की थी। उन्होंने कर्नाटक के प्रसिद्ध तीर्थ श्रवणबेलगोला में तपस्या करते हुए आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया। यह दर्शाता है कि संलेखना केवल साधु-संतों तक सीमित नहीं है। महान शासकों और गृहस्थों द्वारा भी इसे अपनाया गया है। आचार्य ने कहा कि संलेखना के माध्यम से व्यक्ति अपने समस्त कषायों, राग-द्वेष और मोह का त्याग कर आत्मा को निर्मल बनाता है। यह साधना जीवन के अंतिम क्षणों को भी पवित्र, शांत और सार्थक बना देती है। यह मृत्यु को भी एक उत्सव के रूप में स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि प्रदीप जैन आदित्य वास्तव में धन्य हैं। उन्हें इतने धार्मिक एवं संस्कारित पिताजी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने जीवन में सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और धार्मिकता का अद्भुत उदाहरण संलेखना लेकर प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने प्रसिद्ध गीत 'वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है' के माध्यम से भगवान महावीर के सिद्धांतों की प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया।
पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज जब विश्व में अराजकता का वातावरण है। तब अहिंसा और ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत अत्यंत आवश्यक हो गया है। भगवान महावीर का संदेश वर्तमान समय में समाज को सही दिशा देने वाला है। संलेखना से मानव कल्याण होता है। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भी विनयांजलि अर्पित की।
मुनि श्री विष्णु सागर जी महाराज की गृहस्थ जीवन की बड़ी पुत्री सुधा जैन ने अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। विदिशा निवासी सुधा जैन लेखिका एवं कवि भी हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि जैन धर्म हमें सिखाता है कि मृत्यु शोक का विषय नहीं है। यह आत्मा की यात्रा का उत्सव है। यद्यपि पिता के वियोग से मन अत्यंत व्यथित है। लेकिन यह संतोष भी है कि उन्होंने मुनि दीक्षा लेकर संलेखना जैसे महान व्रत को धारण किया। सुधा जैन ने कहा कि संलेखना आत्मकल्याण का सर्वोच्च मार्ग है। यह त्याग, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। पूज्य मुनि श्री विष्णु सागर जी महाराज ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों को भी साधना में परिवर्तित कर हम सभी को एक अद्वितीय प्रेरणा दी है।
पूज्य मुनि 108 विष्णु सागर जी महाराज की विनयांजलि सभा में उस समय भावुक वातावरण बन गया। कांग्रेस प्रवक्ता एवं उनके पौत्र गौरव जैन ने मंच से मुनिश्री का वसीयतनामा पढ़कर सुनाया। वसीयतनामे में मुनि श्री ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि उनके जीवन में एक पैसे की भी आवश्यकता नहीं है। उनकी जितनी भी पूंजी है, वह धर्म कार्यों में लगाई जाए। उन्होंने आगे कहा कि उनकी वास्तविक पूंजी उनका परिवार है। यह परिवार धर्म की सेवा के साथ-साथ मानवता की सेवा करते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर रहे। इस संदेश को सुनते ही सभागार में उपस्थित सभी श्रद्धालु एवं गणमान्यजन भाव-विभोर हो उठे।
सभा में भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गजराज जैन गंगवाल उपस्थित रहे। ग्लोबल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमुनालाल हपावत और तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्मू प्रसाद जैन भी मौजूद थे। दिगंबर जैन परिषद के पुनीत जैन और दिगंबर जैन महासमिति के अध्यक्ष मणिन्द जैन भी शामिल हुए। गृहस्थ जीवन के पुत्र अजीत जैन, पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य और अनिल जैन सहित अनेक प्रमुख पदाधिकारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।