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ABVP: जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर एबीवीपी का विरोध प्रदर्शन, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Wed, 25 Feb 2026 10:45 AM IST
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सार

Azim Premji University: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय पर जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे पर ‘अलगाव’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। इस आरोप को लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की।

ABVP alleges Azim Premji University promoting J&K 'secession', stages protest
ABVP - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ABVP: एबीवीपी ने मंगलवार को शहर स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम अलगाववाद और जम्मू-कश्मीर के विभाजन को बढ़ावा दे रहा था और भारतीय सेना का अपमान था। नारे लगाते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय की नेमप्लेट पर काली स्याही पोत दी और दावा किया कि यह घटना भारत और कश्मीर को "बांटने" के एक बड़े एजेंडे का हिस्सा थी।

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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) समर्थित संगठन स्पार्क द्वारा परिसर के अंदर आयोजित एक कार्यक्रम भारत का विरोध करता है और राष्ट्रविरोधी विचारों को बढ़ावा देता है।

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कैंपस में हुई अशांति की निंदा

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसने इस तरह के किसी भी कार्यक्रम को अधिकृत नहीं किया था और परिसर में किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले सख्त प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

विश्वविद्यालय ने कहा, "यह कार्यक्रम, जिसे कथित तौर पर छात्रों के एक छोटे समूह द्वारा आयोजित किया गया था, हुआ ही नहीं।" विश्वविद्यालय ने आज शाम परिसर में हुई "अशांति" और "हिंसा" की कड़ी निंदा की।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) समर्थित संगठन स्पार्क द्वारा परिसर में आयोजित कार्यक्रम भारत का विरोध करता है और राष्ट्र-विरोधी विचारों को बढ़ावा देता है।

पोस्टर में कुनान-पोशपोरा घटना का उल्लेख

प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि स्पार्क यह प्रचार कर रहा था कि जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है।

प्रदर्शनकारियों द्वारा साझा किए गए कार्यक्रम के पोस्टर से पता चलता है कि यह 23 फरवरी को हुई कुनान-पोशपोरा घटना से संबंधित था।

पोस्टर पर लिखा था, "23-24 फरवरी, 1991 की दरमियानी रात को कुनान-पोशपोरा में कथित सामूहिक बलात्कार की सबसे भयावह घटनाओं में से एक हुई।" 

जबरन घुसने और तोड़फोड़ का आरोप

छात्रों के संगठन स्पार्क द्वारा जारी पोस्टर में लिखा गया था, "35 साल बीत चुके हैं, लेकिन एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है। मामले को बंद करने के लिए लगातार दबाव के बावजूद, पीड़ित न्याय के लिए एक असमान लड़ाई लड़ रहे हैं। यह कश्मीर के लोगों पर हुए हिंसा के अनगिनत उदाहरणों में से एक है।"

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने अपने बयान में कहा, "आज (24 फरवरी) शाम करीब 6 बजे, 20 लोगों का एक समूह जबरन हमारे परिसर में घुस आया... उन्होंने नारे लगाए, कुछ संपत्ति में तोड़फोड़ की और हमारे कुछ सुरक्षा गार्डों और छात्रों पर हमला किया। हमने घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन (सरजापुरा) को दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया।" विश्वविद्यालय के अनुसार, परिसर में जबरन घुसने वाले लोग एक कार्यक्रम के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बारे में उनका दावा था कि वह हमारे परिसर में आयोजित होने वाला था।

इसमें कहा गया है, "अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने इस तरह के किसी भी कार्यक्रम को अधिकृत नहीं किया था। विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले सख्त प्रक्रियाओं का पालन करता है। छात्रों के एक छोटे समूह द्वारा कथित तौर पर आयोजित यह कार्यक्रम बिल्कुल भी नहीं हुआ।" 

दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप से विवाद और गहराया

इसमें आगे कहा गया, "बाहरी समूह द्वारा हमारे परिसर में मचाई गई उपद्रव और हिंसा की हम कड़ी निंदा करते हैं।"

एबीवीपी के प्रदर्शनकारियों ने आगे दावा किया कि जब उन्होंने कार्यक्रम का विरोध किया, तो उन्हें परिसर के अंदर हिरासत में लिया गया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "छात्रों के माध्यम से उन्होंने उन्हें भारतीय ध्वज पकड़वाया और चप्पलों से हम पर हमला किया। भारतीय ध्वज पकड़े हुए हमारे कार्यकर्ताओं पर चप्पलों से हमला किया गया। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई होने तक संगठन अपना आंदोलन जारी रखेगा।

एबीवीपी ने अमित शाह को सौंपा ज्ञापन

बेंगलुरु ग्रामीण जिला पुलिस ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा कि प्रदर्शनकारियों को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए गए हैं। मामले की जांच जारी है।

एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने एआईएसए और उसके संबद्ध संगठनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और विश्वविद्यालय परिसर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने वाले छात्रों और नेताओं के खिलाफ जांच की मांग की।

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