BCI: बीसीआई ने अंतिम वर्ष के विधि छात्रों को AIBE परीक्षा में बैठने की दी अनुमति, साल में दो बार होगी एग्जाम
Supreme Court: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अंतिम वर्ष के विधि छात्रों को अखिल भारतीय बार परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए नियम बना लिए गए हैं। साथ ही, यह परीक्षा अब साल में दो बार आयोजित की जाएगी।
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Bar Council of India: बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने ऐसे नियम बना लिए हैं, जिनके तहत कानून की पढ़ाई के अंतिम वर्ष के छात्र अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) में बैठ सकेंगे। इसके साथ ही यह परीक्षा अब साल में दो बार कराई जाएगी। अखिल भारतीय बार परीक्षा एक ऐसी परीक्षा है, जिसे पास करने के बाद ही कानून की पढ़ाई पूरी कर चुके छात्र वकील के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ, जो 2024 में दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को एआईबीई में बैठने की अनुमति देने के निर्देश मांगे गए थे, ने इस बात को दर्ज किया और याचिका का निपटारा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद BCI ने 2026 नियम बनाए
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वकील ने बताया, "एआईबीई वर्ष में दो बार आयोजित की जाएगी और एलएलबी के अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी।"
वकील ने कहा कि उसने इस संबंध में बीसीआई नियम 2026 बना लिए हैं। साल 2024 में अदालत ने अंतरिम आदेश पारित कर अंतिम वर्ष के छात्रों को उस वर्ष आयोजित एआईबीई में बैठने की अनुमति दी थी। 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने बीसीआई को इस संबंध में नियम बनाने का निर्देश दिया था।
20 सितंबर, 2024 को अंतिम वर्ष के छात्रों को मिली एक बड़ी राहत में सर्वोच्च न्यायालय ने बीसीआई को निर्देश दिया कि उन्हें इस वर्ष एआईबीई परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। अंतिम वर्ष के एलएलबी छात्रों को अधर में नहीं छोड़ा जा सकता, यह देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि उन्हें उस वर्ष बार परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाती है, तो उनका एक वर्ष व्यर्थ हो जाएगा।
अंतिम वर्ष के एलएलबी छात्रों को AIBE से रोकने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
सर्वोच्च न्यायालय ने 10 फरवरी, 2023 को एआईबीई आयोजित करने के बीसीआई के अधिकार की पुष्टि की थी।
न्यायालय ने पात्रता के उचित प्रमाण प्रस्तुत करने पर अंतिम सेमेस्टर के विधि छात्रों को एआईबीई परीक्षा में बैठने की अनुमति देने के लिए एक एमिकस क्यूरी (न्यायालय के मित्र) के सुझाव को भी स्वीकार कर लिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नीलाय राय सहित नौ एलएलबी छात्रों की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ए वेलन और नवप्रीत कौर की दलीलों पर ध्यान दिया और उन्हें 24 नवंबर, 2024 को परीक्षा देने की अनुमति दी।
याचिका में बीसीआई की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई थी जिसमें अंतिम वर्ष के एलएलबी छात्रों को एआईबीई परीक्षा में बैठने से रोका गया था। विधि स्नातक को राज्य बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकरण के लिए एआईबीई परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
याचिका में कहा गया है कि यदि अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा देने से रोक दिया जाता है, तो अधिसूचना से उनके पेशेवर करियर को आगे बढ़ाने में लगने वाला बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाएगा।