CBSE: सीबीएसई ने बताया कैसे हुई 12वीं की कॉपियों की जांच; दिए विद्यार्थियों के मन में उठ रहे 27 सवालों के जवाब
CBSE: सीबीएसई ने 12वीं रिजल्ट में ओएसएम सिस्टम को लेकर उठे सवालों पर सफाई दी है। बोर्ड ने बताया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में स्कैनिंग, क्वालिटी चेक, शिक्षक प्रशिक्षण और मार्किंग सिस्टम को पारंपरिक तरीके जैसा बनाया गया था। बोर्ड ने अभ्यर्थियों के मन में इसी प्रकार के उठ रहे 27 सवालों के जवाब दिेए हैं।
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सीबीएसई ने ओएसएम सिस्टम से जुड़े कई सामान्य सवालों के जवाब दिए हैं और बताया है कि यह डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया कैसे तैयार और लागू की गई।
OSM सिस्टम पर सीबीएसई ने दिए 27 सवालों के जवाब
1. OSM की अवधारणा कैसे बनी?
सीबीएसई ने वर्ष 2014 में ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की योजना बनाई थी। उस समय जरूरी तकनीक उपलब्ध नहीं थी, इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सका। बाद में नई तकनीक आने और अन्य बोर्डों में इसके सफल उपयोग को देखते हुए इसे 2025-26 से लागू करने की मंजूरी दी गई।
2. ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) क्या है?
यह एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके शिक्षकों के लिए कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध कराया जाता है।
3. पारंपरिक मूल्यांकन और OSM में क्या अंतर है?
सीबीएसई के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं है। केवल कॉपी जांचने का माध्यम बदला है। पहले शिक्षक कागज पर कॉपी जांचते थे, अब वही कॉपी स्क्रीन पर दिखाई जाती है।
4. इस प्रणाली को पारंपरिक मूल्यांकन जैसा कैसे बनाया गया?
सिस्टम को मार्किंग स्कीम से जोड़ा गया है। शिक्षक जैसे ही किसी प्रश्न के अंक दर्ज करते हैं, सिस्टम उन्हें अपने आप जोड़ लेता है, जिससे जोड़ में गलती की संभावना खत्म हो जाती है।
5. फीडबैक प्राप्त करने के लिए ड्राई रन कैसे किया गया?
सीबीएसई ने पांच स्कूलों में शिक्षकों के साथ OSM सिस्टम का ट्रायल किया। शिक्षकों को पहले प्रशिक्षण दिया गया और फिर उनके सुझावों के आधार पर सिस्टम में सुधार किए गए।
6. फीडबैक के आधार पर सिस्टम में क्या अपडेट किए गए?
सिस्टम में “सेव” विकल्प जोड़ा गया, अंक हटाने की प्रक्रिया आसान बनाई गई और अलग-अलग स्तर के परीक्षकों के लिए रंग कोड की सुविधा जोड़ी गई।
7. शिक्षकों को कैसे प्रशिक्षित किया गया?
शिक्षकों को वेबिनार, ऑनलाइन ट्रेनिंग, मॉक इवैल्यूएशन, वीडियो ट्यूटोरियल और दिशा-निर्देशों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया।
8. अभ्यास के लिए शिक्षकों को प्लेटफॉर्म कैसे उपलब्ध कराया गया?
सीबीएसई ने एक अलग प्रैक्टिस पोर्टल उपलब्ध कराया था, जहां शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार सिस्टम का अभ्यास कर सकते थे।
9. उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग कैसे की गई?
उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग क्षेत्रीय कार्यालयों में विशेष “लैंप स्कैनर” की मदद से की गई, जिससे कॉपियों को बिना नुकसान पहुंचाए स्कैन किया जा सका।
10. स्कैनिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या जांच की गई?
गुणवत्ता जांच तीन स्तरों पर हुई। पहला स्कैनिंग के समय, दूसरा क्वालिटी कंट्रोल टीम द्वारा और तीसरा मूल्यांकन करने वाले शिक्षक द्वारा।
11. क्या शिक्षकों को खराब स्कैनिंग वाली कॉपियों को रिजेक्ट करने की सुविधा थी?
हां, अगर कोई स्कैन धुंधला या पढ़ने में कठिन होता था तो शिक्षक उसे रिजेक्ट कर सकते थे।
12. शिक्षक द्वारा कॉपी रिजेक्ट करने के बाद क्या किया जाता था?
ऐसी कॉपियों को दोबारा स्कैन किया जाता था और गुणवत्ता जांच के बाद फिर से मूल्यांकन के लिए भेजा जाता था।
13. ऑन स्क्रीन मार्किंग की पूरी प्रक्रिया क्या है?
उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप में पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद शिक्षक लॉगिन कर स्क्रीन पर कॉपियां जांचते हैं।
14. 2026 में OSM किस कक्षा के लिए लागू किया गया?
यह प्रणाली फिलहाल सीबीएसई की कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा में लागू की गई है।
15. OSM के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इससे अंकों के जोड़ में गलती कम होती है, मूल्यांकन तेज होता है, पारदर्शिता बढ़ती है और यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर माना जाता है।
16. क्या कंप्यूटर उत्तरों की जांच कर रहे हैं?
नहीं, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अब भी अनुभवी शिक्षक ही कर रहे हैं। कंप्यूटर केवल डिजिटल माध्यम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
17. OSM सिस्टम कैसे काम करता है?
परीक्षा केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाएं क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजी जाती हैं, जहां उन्हें स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। शिक्षक लॉगिन करके डिजिटल कॉपियों की जांच करते हैं।
18. स्कैनिंग के दौरान क्या कॉपियों को फाड़ा जाता है?
नहीं, स्कैनिंग बिना कॉपियों की बाइंडिंग काटे या नुकसान पहुंचाए की गई।
19. क्या स्कैनिंग की गुणवत्ता की जांच हुई थी?
हाँ, यदि किसी स्कैन में अस्पष्टता पाई जाती थी तो उत्तर पुस्तिका को दोबारा स्कैन किया जाता था।
20. गुणवत्ता जांच (Quality Check) क्यों की गई थी?
यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्कैन साफ, पूर्ण और बारकोड से सही तरीके से जुड़े हुए हों।
21. सीबीएसई ने स्कूलों को इसके लिए कैसे तैयार किया?
बोर्ड ने स्कूलों को कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और बिजली बैकअप की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही बड़े स्तर पर लाइव वेबकास्ट भी आयोजित किए गए।
22. प्रधानाचार्यों की इसमें क्या भूमिका थी?
प्रिंसिपलों के लिए एक विशेष डैशबोर्ड बनाया गया था, जिससे वे यह देख सकें कि उनके स्कूल के किन शिक्षकों ने ट्रेनिंग और मॉक मूल्यांकन पूरा किया है।
23. सीबीएसई ने OSM क्यों शुरू किया?
मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज बनाने तथा मानवीय गलतियों को कम करने के उद्देश्य से यह प्रणाली शुरू की गई।
24. OSM गलतियों को कैसे कम करता है?
यह सिस्टम अंक अपने आप जोड़ता है और किसी प्रश्न को बिना जांचे छोड़ने जैसी गलतियों को रोकता है।
25. तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए क्या व्यवस्था थी?
सीबीएसई ने क्षेत्रीय कार्यालयों और मुख्यालय में तकनीकी सहायता के लिए विशेष कॉल सेंटर और सपोर्ट टीम तैनात की थी।
26. क्या OSM से मार्किंग ज्यादा सख्त हो जाती है?
नहीं, मार्किंग स्कीम और मूल्यांकन मानक वही रहते हैं। केवल कॉपी जांचने का तरीका डिजिटल हुआ है।
27. क्या धुंधली छवियों को लेकर छात्रों के आरोप सही हैं?
सीबीएसई के अनुसार स्कैनिंग की जांच कई स्तरों पर हुई थी और शिक्षकों को खराब स्कैन अस्वीकार करने का अधिकार भी दिया गया था, इसलिए ऐसी शिकायतों की संभावना काफी कम थी।
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