क्रिकेट विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में भारतीय विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स पर बने बलिदान बैज के चिन्ह से एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चूंकि धोनी द्वारा पहने गए ये दस्ताने तीन सप्ताह पहले मेरठ से ही डिलीवर हुए थे इसलिए मेरठ का नाम भी अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि किसे, कैसे और कब मिलता है बलिदान बैज... जानते हैं अगली स्लाइड में...
आखिर क्या होता है बलिदान बैज, जिसे पहनकर विवादों में घिर गए धोनी?
किसे मिलता है बलिदान बैज-
इस बैज को पाना हर सैनिक का सपना होता है पर इसे पाने के लिए एक ऐसी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है जो शरीर के साथ-साथ लोगों के हौसले तक तोड़ देती है। अपने दुश्मनों को न केवल पहचानना बल्कि बिना किसी वार किए उनका खात्मा कर देना, ऐसे जाबाज को ये बैज मिलता है।
क्या है बलिदान बैज
यह कोई मामूली बैज नहीं है। चांदी की धातु से बने इस बैज में हिंदी से बलिदान लिखा होता है। बलिदान बैज का इस्तेमाल केवल पैराशूट रेजिमेंट के विशेष बल ही कर सकते हैं। किसी और व्यक्ति को इसका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है।
विश्व कप के अपने पहले ही मैच में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को हरा दिया था। भारत के लिए यह एक बड़ा जश्न था। विवाद तो तब खड़ा हुआ जब धोनी उस मैच में ऐसे दस्ताने पहनकर उतरे जिस पर भारतीय सेना के प्रतीक चिन्हों में से एक 'बलिदान बैज' नजर आ रहा था। क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ICC ने इसी चिन्ह पर आपत्ति उठाई थी।क्या था मामला
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के नियम
- इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के लोगो और ड्रेस कोड के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी तय ड्रेस या किट से छेड़छाड़ नहीं कर सकता।
- ड्रेस पर किसी प्रकार का दूसरा रंग भी नहीं इस्तेमाल किया जा सकता।
- ड्रेस पूरी तरह से साफ होनी चाहिए और उसके रंग में भी कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
- किसी भी खिलाड़ी, बोर्ड या फिर संस्थान को किसी विशेष लोगो या बदलाव के लिए पहले से अनुमति मांगनी होगी।
- आईसीसी से अप्रूवल मिलने के बाद ही ड्रेस में कुछ बदलाव के साथ प्लेयर मैदान में उतर सकता है।
- किसी भी प्लेयर को तीन से ज्यादा लोगो अपनी ड्रेस पर इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
- ग्लव्स पर सिर्फ मैन्युफैक्चरर का ही लोगो हो सकता है।
- खिलाड़ी और टीम के अधिकारियों को आर्म बैंड या ड्रेस के जरिए कोई भी निजी मेसेज देने की अनुमति नहीं है।
- आईसीसी के क्रिकेट ऑपरेशंस डिपार्टमेंट से अनुमति लेने के बाद ऐसा किया जा सकता है।
- आईसीसी के नियमों के मुताबिक किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक संदेश को जारी के लिए अनुमति नहीं मिल सकती।
- यदि कोई बोर्ड या टीम किसी संदेश को लेकर मंजूरी देती है और आईसीसी असहमत है तो फिर अंतिम निर्णय अंतरराष्ट्रीय संस्था का ही माना जाएगा।