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JNU: जेएनयू ने उमर खालिद की किताब पर होने वाले कार्यक्रम को किया रद्द, प्रशासन बोला- 'पूरे तथ्य नहीं बताए गए'

Sun, 09 Aug 2026 03:18 PM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Sun, 09 Aug 2026 03:18 PM IST
सार

JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने उमर खालिद की किताब पर प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी है। विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने का हवाला देते हुए SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग भी निरस्त कर दी है।

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JNU Cancels Auditorium Booking for Discussion on Umar Khalid’s Book
जेएनयू, JNU - फोटो : JNU: @www.jnu.ac.in/main/

विस्तार

Umar Khalid: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने पूर्व छात्र और कार्यकर्ता उमर खालिद की किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' पर होने वाली परिचर्चा के लिए दी गई SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी है। यह कार्यक्रम 10 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होना था। 

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विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी, इसलिए डीन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) ने ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द करने का फैसला लिया। JNU ने कहा कि विश्वविद्यालय एक लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान है और कार्यक्रम की अनुमति और उसे रद्द करने की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है।
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कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे ये लोग

कार्यक्रम के पोस्टर के अनुसार, इसमें प्रोफेसर प्रभु महापात्र, प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, हर्ष मंदर और बनोज्योत्सना लाहिड़ी वक्ता के रूप में शामिल होने वाले थे। वहीं, बुकिंग रिकॉर्ड में प्रोफेसर अविनाश कुमार का नाम संकाय प्रतिनिधि के रूप में दर्ज था। SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग 7 अगस्त को मंजूर की गई थी। हालांकि, JNU प्रशासन ने यह नहीं बताया है कि कार्यक्रम से जुड़ी कौन-सी जानकारी पूरी तरह साझा नहीं की गई थी, जिसके आधार पर अनुमति रद्द की गई।

बता दें कि उमर खालिद की पुस्तक 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' आदिवासी इतिहास और सत्ता की राजनीति पर आधारित है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले JNU में इस्कॉन का एक कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया था। उस मामले में छात्र संघ ने विश्वविद्यालय के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आपत्ति जताई थी।

इसी बीच, जेएनयूएसयू ने विश्व आदिवासी दिवस पर उमर खालिद की पुस्तक 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' पर होने वाली चर्चा के लिए एसएसएस-आई सभागार की बुकिंग रद्द करने के जेएनयू प्रशासन के "मनमानी" और "तानाशाही" फैसले की निंदा की।

JNUSU ने फैसले का विरोध किया

जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि किसी पुस्तक पर चर्चा करना विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक और लोकतांत्रिक संस्कृति का अहम हिस्सा होता है।

कहा, "इस कार्यक्रम के आयोजन स्थल को रद्द करके, जेएनयू प्रशासन ने एक बार फिर अपने विद्यार्थी-विरोधी और बुद्धिजीवी-विरोधी एजेंडे को उजागर किया है, जो विश्वविद्यालय के स्वतंत्र विचार-विमर्श को बढ़ावा देने के बजाय आलोचनात्मक चिंतन को दबाने और असहमति की आवाजों को चुप कराने का प्रयास करता है।"

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