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Maharashtra: तीन भाषा नीति पर बढ़ा विवाद, कोकण मराठी साहित्य परिषद ने जताई चिंता; सीएम ने दिया आश्वासन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 24 Jun 2025 10:34 AM IST
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सार
Three language formula: कोकण मराठी साहित्य परिषद ने तीन-भाषा नीति को अनुचित बताया। परिषद ने कहा कि हिंदी को तीसरी भाषा बनाना छोटे बच्चों की मानसिक क्षमताओं के प्रतिकूल है। मुख्यमंत्री ने सभी हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेने की बात कही।
देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र
- फोटो : ANI
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विस्तार
Hindi as Third Language in Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार की नई तीन-भाषा नीति को लेकर अब राज्य की प्रमुख साहित्यिक संस्था कोकण मराठी साहित्य परिषद ने विरोध दर्ज कराया है। परिषद ने इसे "अनुचित और अव्यवहारिक" करार दिया है, खासकर कक्षा 1 से 5 तक के छोटे बच्चों के लिए।
पिछले हफ्ते राज्य सरकार ने एक संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी, लेकिन हिंदी के अलावा कोई अन्य भारतीय भाषा पढ़ने के लिए प्रति कक्षा कम से कम 20 छात्रों की सहमति जरूरी होगी।
परिषद ने यह भी मांग की कि ऐसी नीतियां बनाते समय शिक्षकों, बाल मनोवैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों से विस्तृत परामर्श किया जाना चाहिए, जिससे निर्णय ज़मीन से जुड़े और संतुलित हों।
फडणवीस ने यह भी कहा कि देश के अन्य राज्यों की वास्तविक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन कर एक व्यापक प्रस्तुति तैयार की जाएगी, जिससे मराठी छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
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पिछले हफ्ते राज्य सरकार ने एक संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी, लेकिन हिंदी के अलावा कोई अन्य भारतीय भाषा पढ़ने के लिए प्रति कक्षा कम से कम 20 छात्रों की सहमति जरूरी होगी।
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परिषद ने तीन-भाषा नीति को बताया 'अनुचित और अव्यवहारिक'
कोकण मराठी साहित्य परिषद ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि "कक्षा 1 से 4 तक के बच्चों की मानसिक, भावनात्मक और भाषाई क्षमताओं को देखते हुए हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करना अनुचित प्रतीत होता है। सरकार को बच्चों के दीर्घकालिक विकास की जरूरतों को समझते हुए यह निर्णय पुनः विचार करना चाहिए।"परिषद ने यह भी मांग की कि ऐसी नीतियां बनाते समय शिक्षकों, बाल मनोवैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों से विस्तृत परामर्श किया जाना चाहिए, जिससे निर्णय ज़मीन से जुड़े और संतुलित हों।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने दिए संकेत - सबकी राय के बाद होगा अंतिम फैसला
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोमवार रात दक्षिण मुंबई स्थित अपने आधिकारिक निवास पर एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें तीन-भाषा नीति के शैक्षणिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, किसी भी अंतिम निर्णय से पहले विद्वानों, साहित्यकारों, राजनीतिक नेताओं और अन्य हितधारकों के साथ संरचित परामर्श प्रक्रिया की जाएगी।फडणवीस ने यह भी कहा कि देश के अन्य राज्यों की वास्तविक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन कर एक व्यापक प्रस्तुति तैयार की जाएगी, जिससे मराठी छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।