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नालंदा यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह: राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ने युवाओं को किया प्रेरित, दिए कामयाबी के मंत्र

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Tue, 31 Mar 2026 02:19 PM IST
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सार

Nalanda University: नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने छात्रों को संबोधित कर उन्हें सफलता और भविष्य की दिशा के लिए प्रेरित किया।

Nalanda University Convocation 2026: President Murmu and FM Jaishankar Inspire Students with Success Mantras
नालंदा यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह - फोटो : PTI
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विस्तार

President Murmu: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि दुनिया अब “अधिक बहुध्रुवीय” होती जा रही है, क्योंकि अब कई अलग-अलग संस्कृतियां और समाज अपनी राय और आवाज़ व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नालंदा परंपरा इस वैश्विक बदलाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभा सकती है।

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बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, "यह आवश्यक है कि भारत दुनिया के लिए तैयार हो और दुनिया भी भारत के लिए तैयार हो।"

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Nalanda University Convocation 2026: President Murmu and FM Jaishankar Inspire Students with Success Mantras
नालंदा यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह - फोटो : PTI

जयशंकर ने नए नालंदा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को सराहा

यह विश्वविद्यालय भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) देशों के सहयोग से स्थापित किया गया है और इसका उद्देश्य प्राचीन नालंदा की महिमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, दर्शन, इतिहास और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए फिर से जीवित करना है। 

ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय, जिसके प्रसिद्ध अवशेष यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, आज के बिहार के नालंदा जिले में स्थित है। नए विश्वविद्यालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून, 2024 को किया था।

जयशंकर ने कहा कि ऐसी प्रत्येक उपलब्धि एक उभरते संस्थान के विकास का प्रतीक है और अपने आप में उत्सव का कारण है। उन्होंने आगे कहा, "शुरुआत से ही इस विश्वविद्यालय से जुड़े रहना मेरा सौभाग्य रहा है।"

विदेश मंत्री ने कहा, "अब, अपने समय में स्वयं एक नए विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के बाद, मैं इस संस्थान के भविष्य के लिए इस आयोजन के महत्व को समझता हूं।"

नालंदा विश्वविद्यालय: भारत और दुनिया को जोड़ने का पुल

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह विश्वविद्यालय अपने अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में अद्वितीय है, और हालांकि इसका महत्व हमेशा से रहा है, वैश्वीकरण के इस युग में यह और भी अधिक जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, यह आवश्यक है कि भारत विश्व के लिए तैयार हो और विश्व भी भारत के लिए तैयार हो।"

जयशंकर ने कहा कि इसके लिए आने वाली पीढ़ियों को वैश्विक घटनाक्रमों से "अधिक जुड़ाव और अधिक संवेदनशीलता" की आवश्यकता है, और उन्होंने सुझाव दिया कि स्नातक होने वाले छात्र इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय छात्र अपने-अपने देशों में भारत का प्रचार कर सकते हैं। मुझे पता है कि आप सभी ने यहां अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और मैं यह भी जानता हूं कि आप भारत का एक अंश अपने साथ वापस ले जा रहे हैं।”

विश्वविद्यालय में बौद्धिक और सांस्कृतिक गौरव का पुनरुत्थान

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की तरह, जो उस समय छात्रों को आकर्षित करता था, इस नए विश्वविद्यालय में भी विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में अंतरराष्ट्रीय छात्र नामांकित हैं।

राजगीर में स्थित विशाल परिसर भी नालंदा के प्राचीन शिक्षण संस्थान के खंडहरों से कुछ ही दूरी पर है।

जयशंकर ने कहा, "नालंदा शब्द सुनते ही भारत की बौद्धिक विरासत और सांस्कृतिक गौरव की यादें ताजा हो जाती हैं। इस संस्थान में उस परंपरा का पुनरुद्धार न केवल भारत के उत्थान का, बल्कि स्वयं एशिया के उत्थान का भी सूचक है। आज विश्व में विकास और प्रगति की भविष्य की दिशाओं पर गहन बहस चल रही है। स्वाभाविक रूप से इसका अधिकांश हिस्सा प्रौद्योगिकी के इर्द-गिर्द केंद्रित है।"

तकनीक और परंपरा का संतुलन जरूरी

उन्होंने कहा, "लेकिन जैसा कि नालंदा की भावना हमें याद दिलाती है, हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि मानवीय पक्ष भी हमेशा मौजूद रहता है।"

उन्होंने कहा, "दुनिया अधिक बहुध्रुवीय होती जा रही है क्योंकि कई और संस्कृतियां और समाज अपनी आवाज उठा रहे हैं। नालंदा परंपरा वैश्विक व्यवस्था के इस लोकतंत्रीकरण में एक शक्तिशाली प्रभाव डाल सकती है। और यह इस बात का भी स्मरण दिलाती है कि प्रौद्योगिकी और परंपरा - विकास भी, विरासत भी - को साथ-साथ चलना चाहिए।"

विदेश मंत्री ने स्नातक छात्रों से कहा कि आज डिग्री प्राप्त करने वाले आप में से प्रत्येक, आप में से प्रत्येक जो एक सहपाठी या शिक्षक के रूप में डिग्री में योगदान दे रहा है, उसे "गर्व का उचित एहसास" होगा।

उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि आज स्नातक होने वाले, डिग्री प्राप्त करने वाले सभी लोग, अपनी क्षमता के अनुसार, जहां कहीं भी हों, नालंदा विश्वविद्यालय के विकास में योगदान देकर अपना योगदान देंगे।"

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