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NEET: नीट री-एग्जाम पेपर लीक के नाम पर साइबर ठगी करने वाले Telegram गैंग का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

आईएएनएस,अहमदाबाद/जयुपर Published by: Akash Kumar Updated Mon, 15 Jun 2026 02:34 PM IST
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सार

NEET Re-Exam Scam Busted: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने नीट री-एग्जाम का पेपर दिलाने के नाम पर छात्रों और अभिभावकों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी टेलीग्राम चैनलों के जरिए फर्जी दावे कर एडवांस पैसे लेते थे और फिर गायब हो जाते थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में नीट री-एग्जाम का प्रश्नपत्र असल में लीक नहीं हुआ था।
 

NEET Re-Exam Scam Busted: Two Arrested for Cheating Students Through Fake Paper Leak Claims on Telegram
NEET Re-Exam Cyber Scam Busted - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

NEET Re-Exam Scam Busted: अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार को राजस्थान के दो लोगों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों पर टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर छात्रों और अभिभावकों से कथित ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है।



पुलिस के अनुसार, जांच में यह पता लगने के बाद कि कुछ लोग टेलीग्राम के माध्यम से री-नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी होने का दावा कर रहे थे, मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और 54 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

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पेपर लीक का झांसा देकर वसूले जाते थे पैसे

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कई टेलीग्राम चैनल, टेलीग्राम आईडी और ऑनलाइन समूह बनाए थे, जिनमें री-नीट प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने संबंधी संदेश प्रसारित किए जाते थे। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों को विज्ञापनों, पोस्ट और संदेशों के जरिए निशाना बनाया जाता था। इन माध्यमों से परीक्षा से संबंधित सामग्री और अन्य लाभ उपलब्ध कराने के दावे किए जाते थे।

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार छात्रों और अभिभावकों से प्रश्नपत्र और गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे लिए जाते थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन चैनलों का उपयोग भ्रामक जानकारी फैलाने और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया गया।

पैसे मिलते ही संपर्क तोड़ देते थे आरोपी

जांच में सामने आया कि जैसे ही छात्र या अभिभावक आरोपियों के खाते में पैसे ट्रांसफर करते थे, आरोपी उनसे संपर्क समाप्त कर देते थे। ना तो कोई प्रश्नपत्र दिया जाता था और ना ही पैसे वापस किए जाते थे। इस तरह आरोपी परीक्षा को लेकर छात्रों की चिंता और प्रतिस्पर्धा का फायदा उठाकर आर्थिक ठगी को अंजाम दे रहे थे।

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पुलिस ने कहा- री-नीट प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शरद सिंघल ने कहा कि यह मामला री-नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने से संबंधित नहीं है।

उन्होंने कहा, "सबसे पहले मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि इस मामले में री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था।"

सिंघल के अनुसार आरोपियों ने टेलीग्राम समूहों और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए यह प्रचार किया कि उनके पास 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र है।
 

जयपुर और कोटा से दो आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार टेलीग्राम चैनलों, टेलीग्राम आईडी, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के तकनीकी विश्लेषण तथा मानव स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर दो आरोपियों की पहचान की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुमेर सिंह मीणा और आकाश मीणा के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार सुमेर सिंह मीणा इलेक्ट्रॉनिक्स में आईटीआई स्नातक है। वह राजस्थान के जयपुर में महेश नगर, जेडीए पार्क के पास का निवासी है और मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले की बौंली तहसील के पुनेता गांव का रहने वाला है।

आकाश मीणा अंग्रेजी और हिंदी में बीए स्नातक है। उसे कोटा से गिरफ्तार किया गया। वह मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले के रावल गांव का निवासी है।


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इन टेलीग्राम चैनलों के नाम जांच में सामने आए

पुलिस के बयान के अनुसार आरोपियों ने निम्नलिखित टेलीग्राम चैनल संचालित किए थे:

Raghav_singh_नीट
DEEPAK WADHWA
JEET SHAH CRYPTO
PANKAJ BHARDWAY WAY2LAABH
TRADING WITH KAROL
RAJDHANI DAY KALYANI
नीट RAGHAV SIR ORIGINAL
STUDENT MONEY HELP


जांचकर्ताओं के अनुसार भुगतान ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म, क्यूआर कोड और बैंक खातों के माध्यम से मांगा जाता था।

सदस्य संख्या बढ़ाने के लिए थर्ड पार्टी सेवाओं के इस्तेमाल का आरोप

जांच एजेंसी का आरोप है कि टेलीग्राम चैनलों में सदस्यों और प्रीमियम सदस्यों की संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए थर्ड पार्टी सेवाओं और एप्लिकेशन का उपयोग किया गया। पुलिस के अनुसार बढ़ी हुई सदस्य संख्या का उपयोग टेलीग्राम चैनलों की बिक्री और आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए किया जाता था।

शरद सिंघल ने कहा कि गिरोह के सदस्य टेलीग्राम समूहों में विश्वसनीयता का माहौल बनाने के लिए अपने सहयोगियों का इस्तेमाल करते थे। उनके अनुसार जब 300-400 प्रीमियम सदस्य दिखाई देते थे, तब गिरोह के सदस्य स्वयं संदेश पोस्ट कर यह दावा करते थे कि पिछले वर्ष का प्रश्नपत्र 80 प्रतिशत तक सही साबित हुआ था।

परीक्षा से जुड़ी कोई अध्ययन सामग्री बरामद नहीं

जांचकर्ताओं के अनुसार आरोपियों के पास से नीट या किसी अन्य परीक्षा से संबंधित कोई अध्ययन सामग्री बरामद नहीं हुई है।

निवेश से जुड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों की भी जांच

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित रूप से "Trade With Karol" और "PANKAJ BHARDWAJ" नाम के टेलीग्राम चैनलों और समूहों के माध्यम से निवेश संबंधी साइबर धोखाधड़ी में भी शामिल थे। पुलिस के अनुसार इन समूहों में लोगों को अधिक रिटर्न का वादा कर निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था।

छह बैंक खाते और 12 शिकायतों का पता चला

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार आरोपियों से जुड़े छह बैंक खाते विभिन्न राज्यों से प्राप्त 12 शिकायतों से संबंधित पाए गए।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि गेमिंग वेबसाइटों पर उपयोग किए जाने वाले बैंक खातों की जानकारी हासिल कर धोखाधड़ी से प्राप्त धन के स्रोत को छिपाने के लिए उनका उपयोग किया जाता था।

पुलिस के अनुसार कथित धोखाधड़ी से प्राप्त राशि पहले ऐसे खातों में जमा की जाती थी, फिर गेमिंग वेबसाइटों के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में यह राशि सहयोगियों और अन्य व्यक्तियों के खातों के जरिए निकाली जाती थी।

44 वेबसाइट और आठ टेलीग्राम समूह मिलने का दावा

अधिकारियों के अनुसार आकाश मीणा लगभग 44 ऐसी वेबसाइट संचालित कर रहा था जो साइबर अपराध गतिविधियों से जुड़ी थीं। उसके मोबाइल फोन और लैपटॉप से करीब आठ टेलीग्राम समूह भी मिले हैं।

शरद सिंघल ने कहा कि पिछले एक वर्ष में आरोपियों के खातों में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन दर्ज किए गए थे और 1,000 से अधिक छात्रों के साथ कथित ठगी की गई थी।

कई राज्यों में जांच जारी

जांचकर्ताओं के अनुसार पिछले एक महीने में जांच के दौरान लगभग 1,000 मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम चैनलों से संपर्क किया गया।

पुलिस टीमें राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में धन हस्तांतरण, निकासी, विज्ञापन और तकनीकी सहायता से जुड़े अन्य कथित व्यक्तियों की पहचान के लिए जांच जारी रखे हुए हैं।

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