CBSE: आरटीआई मामले में सीआईसी सख्त, सीबीएसई को उत्तर-पुस्तिका खरीद टेंडर का खुलासा करने का आदेश
RTI: केंद्रीय सूचना आयोग ने एक आरटीआई मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सीबीएसई को बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर-पुस्तिकाओं की खरीद से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
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CBSE: सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने CBSE को निर्देश दिया है कि वह कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए खरीदी गई उत्तर-पुस्तिकाओं, उनकी खरीद प्रक्रिया, टेंडर से जुड़ी जानकारी और परीक्षा पर हुए खर्च का विवरण RTI के तहत उपलब्ध कराए। आयोग ने कहा कि ऐसी जानकारी को "पॉइंट-वाइज कैटेगरीकल" रूप से सार्वजनिक करें।
RTI के तहत जानकारी देने से CBSE के पहले इनकार को CIC ने खारिज कर दिया। आयोग ने CBSE को नया और संशोधित जवाब देने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि जो जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, उसे RTI एक्ट की धारा 10 के तहत हटाया जा सकता है। यदि किसी जानकारी को धारा 8(1)(d) के तहत देने से मना किया जाता है, तो उसके लिए स्पष्ट और उचित कारण बताना होगा।
RTI आवेदन में क्या जानकारी मांगी गई थी?
यह मामला एक RTI आवेदन से शुरू हुआ था, जिसमें 2023-24 और 2024-25 की CBSE बोर्ड परीक्षाओं में इस्तेमाल हुई उत्तर-पुस्तिकाओं से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी। आवेदक ने आंसर बुक की गुणवत्ता, पेजों की संख्या, आकार, खरीद लागत, कुल खर्च, GST भुगतान और इन्हें खरीदने के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया का पूरा विवरण मांगा था।
CBSE ने क्या जानकारी दी?
अपने जवाब में CBSE ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं में इस्तेमाल होने वाली उत्तर-पुस्तिकाओं के पेपर की गुणवत्ता 60 GSM से 120 GSM के बीच थी। इन कॉपियों में 8, 20, 32, 40 और 48 पेज होते थे तथा उनका आकार 22×28 सेमी और 37.5×54.5 सेमी था। बोर्ड ने यह भी कहा कि उत्तर-पुस्तिकाओं के वजन से संबंधित कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, CBSE ने उत्तर-पुस्तिकाओं की खरीद लागत, खरीदी गई कुल संख्या और उन पर हुए कुल खर्च की जानकारी देने से इनकार कर दिया। बोर्ड ने इसके लिए RTI अधिनियम की धारा 8(1)(e) का हवाला दिया।
CIC ने CBSE के जवाब पर क्या कहा?
टेंडर प्रक्रिया, भाग लेने वाली कंपनियों, उनकी दरों और विक्रेता चयन से जुड़ी जानकारी देने से CBSE ने इनकार करते हुए इसे परीक्षा से संबंधित गोपनीय और संवेदनशील मामला बताया। बोर्ड ने यह भी कहा कि परीक्षा खर्च का रिकॉर्ड वित्तीय वर्ष के आधार पर रखा जाता है, इसलिए मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
हालांकि, अपीलकर्ता ने CIC में इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि पारदर्शिता तथा जनहित के लिए यह जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त Sudha Rani Relangi ने पाया कि CBSE के CPIO ने जानकारी देने से इनकार करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं बताए। आयोग ने यह भी नोट किया कि CPIO न तो सुनवाई में उपस्थित हुए और न ही अपने फैसले के समर्थन में कोई लिखित जवाब प्रस्तुत किया।
CIC के आदेश की मुख्य बातें
- CIC ने कहा कि CBSE ने जानकारी देने से इनकार करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया, इसलिए CPIO का 18 मार्च 2025 का जवाब रद्द किया जाता है।
- आयोग ने सरकारी खरीद और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- CIC ने CPIO को RTI आवेदन की दोबारा समीक्षा कर बिंदुवार और स्पष्ट जवाब देने का निर्देश दिया।
- आयोग ने कहा कि RTI के तहत दी जा सकने वाली सभी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
- जिन जानकारियों का खुलासा नहीं किया जा सकता, उन्हें RTI एक्ट की धारा 10 के तहत हटाकर या छिपाकर बाकी जानकारी दी जा सकती है।
- यदि किसी जानकारी को धारा 8(1)(d) के तहत रोका जाता है, तो उसके लिए स्पष्ट और कानूनी कारण बताना होगा।
- धारा 8(1)(d) में व्यावसायिक गोपनीयता, व्यापारिक रहस्य और बौद्धिक संपदा से जुड़ी जानकारी शामिल होती है।
- आयोग ने कहा कि यदि किसी जानकारी के खुलासे से तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति प्रभावित होती है, तभी उसे रोका जा सकता है।
- हालांकि, व्यापक जनहित होने पर ऐसी जानकारी भी सार्वजनिक की जा सकती है।
- CIC ने यह भी पाया कि CPIO न तो सुनवाई में उपस्थित हुए और न ही जानकारी रोकने के समर्थन में कोई लिखित स्पष्टीकरण दिया।