राजू पी पुथरन की कहानी: सरस्वती फाउंडेशन के जरिए कैसे बदल रहे हजारों लोगों का जीवन, जानिए प्रेरणादायक कहानी
उडुपी से मुंबई तक अपने संघर्ष व सेवा का सफर तय कर राजू पी पुथरन ने समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिसाल बने सरस्वती फाउंडेशन तहत राजू पी पुथरन की मेहनत अब रंग ला रही है। आइए इस बारे में जानें।
विस्तार
समाज में अक्सर प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ की बातें होती हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों की सेवा को ही अपना धर्म मानते हैं। भारत के कोने-कोने में कई ऐसे व्यक्ति हैं जो चुपचाप समाज की सेवा में जुटे हैं। ये लोग सुविधा संपन्न और जरूरतमंदों के बीच की दूरी को कम करने का काम कर रहे हैं। राजू पी पुथरन एक ऐसा ही नाम है, जिन्होंने अपनी मेहनत और दृढ निश्चय से हजारों लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाई है। उनके जीवन का सफर हमें सिखाता है कि कैसे एक साधारण इंसान अपनी इच्छाशक्ति से समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। सरस्वती फाउंडेशन के माध्यम से वे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
राजू पी पुथरन का जन्म उडुपी के शिरवा स्थित मायरुंजा हाउस में हुआ था। वे अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। अपनी शुरुआती पढाई शिरवा में करने के बाद वे मुंबई चले आए। यहां उन्होंने मदर मैरी नाइट हाई स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढाई बीच में ही छोडनी पडी। इसके बाद उन्होंने होटल और कैंटीन में काम करना शुरू किया। धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर वे होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में आगे बढे। शुरुआती दिनों के इसी संघर्ष ने उनके भीतर सहानुभूति और सेवा की भावना पैदा की। यही गुण आगे चलकर उनके जीवन का आधार बने।
सरस्वती फाउंडेशन की स्थापना
साल 2012 में राजू ने समाज सेवा के अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए सरस्वती फाउंडेशन की नींव रखी। एक छोटी सी पहल से शुरू हुई यह संस्था आज समाज के पिछड़े और जरूरतमंद वर्गों के लिए एक बडा सहारा बन चुकी है। यह फाउंडेशन मुख्य रूप से शिक्षा, समाज कल्याण, स्वास्थ्य और रोजगार के कार्यक्रमों पर ध्यान देता है। संस्था का उद्देश्य उन लोगों को अवसर प्रदान करना है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। फाउंडेशन की ओर से छात्रवृत्ति, मेडिकल सहायता और पुनर्वास में मदद दी जाती है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा के समय भी यह संस्था राहत कार्य में आगे रहती है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर
सरस्वती फाउंडेशन के काम में शिक्षा सबसे ऊपर है। ओरिएंट इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर यह संस्था छात्रों को फीस में 50 प्रतिशत तक की छूट दिलाती है। इसके अलावा बच्चों की रचनात्मकता बढाने के लिए समय-समय पर कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में फाउंडेशन मेडिकल सहायता देने के साथ-साथ योग और कल्याण कार्यक्रमों को भी बढावा देता है। संस्था का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा ही एक सुखी समाज की नींव है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरस्वती फाउंडेशन कुटीर उद्योगों और कृषि से जुडे कामों को बढावा देता है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं और वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो पाते हैं। इसके अलावा फाउंडेशन बेघर लोगों, बुजुर्गों और अनाथालयों की भी मदद करता है। विष्णुमूर्ति मंदिर के जीर्णोद्धार में भी संस्था ने अहम भूमिका निभाई है। राजू पी पुथरन और उनकी समर्पित टीम के निस्वार्थ प्रयासों ने आज कई समुदायों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। उनका यह सफर साबित करता है कि बदलाव के लिए बडे संसाधनों से ज्यादा नेक इरादों की जरूरत होती है।
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