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UPSC: सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रीन रीडर व्यवस्था पर यूपीएससी से मांगा हलफनामा, एक हफ्ते की मोहलत

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 16 Feb 2026 04:42 PM IST
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सार

UPSC: सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर लागू करने की योजना पर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने स्क्राइब बदलने की समयसीमा और तकनीकी मानकीकरण पर भी निर्देश दिए हैं।
 

Supreme Court Grants UPSC One Week to File Compliance on Screen Reader for Visually Impaired
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को एक हफ्ते का समय दिया है ताकि वह स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर के उपयोग को लेकर अपनी अनुपालन (कंप्लायंस) हलफनामा दाखिल कर सके। यह व्यवस्था दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए परीक्षाओं में लागू की जानी है।

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पहले दिए थे स्पष्ट निर्देश

शीर्ष अदालत ने 3 दिसंबर के अपने आदेश में यूपीएससी को कहा था कि परीक्षा की हर अधिसूचना में यह प्रावधान शामिल किया जाए कि पात्र अभ्यर्थी परीक्षा से कम से कम सात दिन पहले तक अपना लेखक (स्क्राइब) बदलने का अनुरोध कर सकें।

साथ ही कोर्ट ने दो महीने के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा था, जिसमें स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर लागू करने की योजना, समयसीमा और प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण हो।

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सॉफ्टवेयर की जांच और सुरक्षा पर भी जोर

अदालत ने कहा था कि हलफनामे में यह भी बताया जाए कि सॉफ्टवेयर और उससे जुड़ी व्यवस्था की जांच, मानकीकरण और सभी परीक्षा केंद्रों पर लागू करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि अगली परीक्षा चक्र से यह सुविधा सभी पात्र अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है या नहीं, इसकी जानकारी भी दी जाए।

अगली सुनवाई 23 फरवरी को

यह मामला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। यूपीएससी की ओर से पेश वकील ने कहा कि आयोग अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन कर रहा है, लेकिन हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय चाहिए।

पीठ ने यूपीएससी को एक सप्ताह की मोहलत देते हुए अगली सुनवाई 23 फरवरी तय की।

दिव्यांग अधिकार दया नहीं, संवैधानिक अधिकार

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए अधिकार कोई दया नहीं हैं, बल्कि समानता, गरिमा और भेदभाव रहित व्यवहार के संवैधानिक वादे का हिस्सा हैं।

यह फैसला मिशन एक्सेसिबिलिटी (Mission Accessibility) नामक संस्था की याचिका पर आया था। संस्था ने सिविल सेवा परीक्षा में स्क्राइब पंजीकरण की समयसीमा में बदलाव और पात्र अभ्यर्थियों को स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर से लैस लैपटॉप व सुलभ डिजिटल प्रश्नपत्र की अनुमति देने की मांग की थी।

अन्य निर्देश भी दिए

सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को यह भी निर्देश दिया था कि लेखक बदलने के अनुरोध पर तीन कार्य दिवस के भीतर कारण सहित फैसला लिया जाए।

इसके अलावा आयोग को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि विकलांग संस्थान (National Institute for the Empowerment of Persons with Visual Disabilities) के साथ मिलकर स्क्रीन-रीडर और अन्य सहायक तकनीकों के उपयोग के लिए एक समान दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल तैयार करने को कहा गया है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया सुरक्षित, मानकीकृत और सुलभ हो सके।

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