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Hindi News ›   Education ›   US F-1 Student Visa 2025: Indian Student Visas Drop 62%, CIS Report Reveals Sharp Decline

US Student Visa: भारतीय-चीनी छात्रों के स्टूडेंट वीजा में भारी गिरावट, जानें रिपोर्ट में सामने आए क्या आंकड़े

Wed, 05 Aug 2026 12:55 PM IST
Akash Kumar एएनआई, वॉशिंगटन डीसी
एएनआई, वॉशिंगटन डीसी Published by: Akash Kumar Updated Wed, 05 Aug 2026 12:55 PM IST
सार

US Student Visa Report: सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारतीय और चीनी छात्रों को जारी किए गए अमेरिकी F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में इसके संभावित असर शिक्षा, श्रम बाजार और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी बताए गए हैं।
 

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US F-1 Student Visa 2025: Indian Student Visas Drop 62%, CIS Report Reveals Sharp Decline
CIS Report On US Student Visa - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

US F-1 Student Visa Report: अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक अहम रिपोर्ट सामने आई है। सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारतीय और चीनी नागरिकों को जारी किए गए F-1 स्टूडेंट वीजा की संख्या में पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका असर अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों, श्रम बाजार और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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भारतीय और चीनी छात्र मिलकर बनाते हैं आधे से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्र

रिपोर्ट में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन (IIE) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि:

  • 2024-25 शैक्षणिक सत्र में अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों में 11,77,766 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे।
  • इनमें भारत के 3,63,019 और चीन के 2,65,919 छात्र शामिल थे। 
  • दोनों देशों के छात्र मिलाकर कुल विदेशी छात्रों का 53 प्रतिशत हिस्सा थे।
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भारतीय छात्रों को मिले सबसे कम F-1 वीजा

रिपोर्ट के अनुसार, मई से अगस्त 2025 के बीच भारतीय नागरिकों को 22,149 F-1 स्टूडेंट वीजा जारी किए गए। यह संख्या 2017-19 और 2021-24 के इसी अवधि के औसत 55,717 वीजा की तुलना में 60 प्रतिशत कम है।

यदि केवल 2024 से तुलना करें तो गिरावट और अधिक दिखाई देती है। 2024 में इसी अवधि के दौरान 58,694 वीजा जारी किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या 22,149 रह गई। यानी 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

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चीनी छात्रों के वीजा में भी आई गिरावट

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि मई-अगस्त 2025 के दौरान चीनी छात्रों को 40,034 F-1 वीजा जारी किए गए।
  • यह संख्या 2017-19 और 2021-24 के औसत 73,853 की तुलना में 46 प्रतिशत कम है।
  • वहीं 2024 में 61,075 वीजा जारी हुए थे। इसके मुकाबले 2025 में 34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मई से अगस्त की अवधि क्यों महत्वपूर्ण है?

रिपोर्ट के अनुसार, तुलना के लिए मई से अगस्त की अवधि इसलिए चुनी गई क्योंकि,

  • नए शैक्षणिक सत्र से पहले सबसे अधिक स्टूडेंट वीजा इसी समय जारी किए जाते हैं।
  • 2024 में भारतीय छात्रों को जारी कुल F-1 वीजा का 77 प्रतिशत इसी अवधि में जारी किया गया।
  • चीनी छात्रों को भी जारी कुल वीजा का 76 प्रतिशत इसी अवधि में जारी किया गया था।

क्या है ओपीटी कार्यक्रम, क्यों किया गया इसका जिक्र?

रिपोर्ट में ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम का भी जिक्र किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत डिग्री पूरी करने के बाद विदेशी छात्रों को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है। आईआईई के आंकड़ों के अनुसार:

  • 2024-25 में 2,94,253 विदेशी छात्र ओपीटी के तहत काम कर रहे थे। 
  • इनमें भारत के 1,43,740 और चीन के 61,981 छात्र शामिल थे।
  • लगभग 70 प्रतिशत ओपीटी प्रतिभागी केवल इन्ही दो देशों से थे।

एसटीईएम ओपीटी में भी भारतीय और चीनी छात्रों की बड़ी हिस्सेदारी

रिपोर्ट में अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2024 में एसटीईएम ओपीटी के तहत काम करने वाले 1,65,524 विदेशी छात्रों में से 68 प्रतिशत भारत और चीन के नागरिक थे। इनमें 79,331 भारतीय और 33,807 चीनी छात्र शामिल थे।

रिपोर्ट में क्या जताई गई चिंता?

सीआईएस का कहना है कि यदि भारत और चीन से आने वाले छात्रों की संख्या घटती है तो ओपीटी के माध्यम से अमेरिकी श्रम बाजार में आने वाले विदेशी पेशेवरों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।

रिपोर्ट में चीन के संदर्भ में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में पढ़ने वाले कुछ चीनी छात्रों को लेकर पहले भी अमेरिकी अधिकारियों ने तकनीक हस्तांतरण, जासूसी और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताई थीं।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि सभी चीनी छात्र किसी गलत उद्देश्य से अमेरिका नहीं आते। इसके बावजूद, रिपोर्ट का तर्क है कि संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे छात्रों की संख्या कम होने से संभावित जोखिम घट सकते हैं।

H-1B वीजा से भी जोड़ा गया मुद्दा

रिपोर्ट में ओपीटी और H-1B वीजा कार्यक्रम के बीच संबंध का भी विश्लेषण किया गया है। इसमें कहा गया है कि H-1B वीजा पर हर साल 65,000 का सामान्य वार्षिक कोटा है, जबकि अमेरिकी संस्थानों से उच्च डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए 20,000 अतिरिक्त छूट मिलती है।

इसके विपरीत ओपीटी कार्यक्रम पर कोई संख्यात्मक सीमा नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक ओपीटी और एसटीईएम ओपीटी के तहत काम करने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या 5,05,590 तक पहुंच गई थी, जो H-1B कार्यक्रम के स्तर के बराबर मानी गई है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि विदेशी स्नातकों पर निर्भरता कम होने से अमेरिकी छात्रों और स्थानीय श्रमिकों के लिए प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में अधिक अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

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