Aizawl: 'बदल रही है उत्तर-पूर्व की पहचान', मिजोरम यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में बोले उपराष्ट्रपति
C P Radhakrishnan: उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन शनिवार को मिजोरम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। यहां उन्होंने युवाओं से रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजन पर ध्यान देने और नशे के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।
विस्तार
C P Radhakrishnan: भारत के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा है कि अब उत्तर-पूर्वी भारत को केवल भौगोलिक दूरी से नहीं, बल्कि नए आर्थिक अवसरों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने यह बात मिजोरम विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।
दीक्षांत समारोह आइजोल में आयोजित किया गया था, जहां उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में क्षेत्र के विकास की कहानी में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को महत्वपूर्ण बताया।
केंद्र सरकार की योजनाओं पर भी हुई बात
राधाकृष्णन ने कहा कि हाल ही में शुरू हुई बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन जैसी परियोजनाएं और केंद्र की योजनाएं, जैसे उडान (UDAN) और PM‑DevINE, उत्तर-पूर्व को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें विकसित भारत के 'निर्माता' बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सुंदर पहाड़ियों के बीच स्थित मिजोरम विश्वविद्यालय यह दिखाता है कि शांति और उद्देश्य के साथ जुड़ी शिक्षा किस तरह परिवर्तन ला सकती है।
रोजगार के अवसर पैदा करने वाले बनें: राधाकृष्ण
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने पर्यटन, बांस आधारित उद्योग, ऑर्गेनिक खेती, हस्तशिल्प और डिजिटल सेवाओं को ऐसे क्षेत्र बताया जहां उत्तर-पूर्व वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकता है।
नशे की समस्या पर चिंता जताई
उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या पर भी चिंता जताई और छात्रों से अपने समाज में नशे के खिलाफ अभियान चलाने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग और डिजिटल तकनीक को समाज के हित में इस्तेमाल करने की सलाह दी।
दीक्षांत समारोह में मिजोरम के राज्यपाल एवं मिजोरम विश्वविद्यालय के मुख्य रेक्टर जनरल (सेवानिवृत्त) विजय कुमार सिंह, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा, मिजोरम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिबाकर चंद्र डेका, संकाय सदस्य, विशिष्ट अतिथि, अभिभावक और स्नातक होने वाले विद्यार्थी उपस्थित थे।
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