Exclusive: 'बेटे का नाम बिमल राय क्यों रखा?'; 'OMG 2' निर्देशक अमित राय बोले- 'उनकी फिल्मों ने मेरी सोच बदली'
Amit Rai Exclusive Interview: निर्देशक अमित राय फिल्म 'ओह माय डॉग' को लेकर सुर्खियों में हैं। अपनी इस आगामी फिल्म की रिलीज से पहले उन्होंने सिनेमा को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा कीं।
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'रोड टू संगम', 'ओएमजी 2' और अब 'ओह माय डॉग' जैसी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बना चुके निर्देशक अमित राय मानते हैं कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है। उनके मुताबिक, अच्छी फिल्म वही होती है जो समाज में बदलाव की शुरुआत करे और लोगों को सोचने पर मजबूर करे। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बिमल रॉय की फिल्मों से मिली प्रेरणा, सिनेमा की जिम्मेदारी और 'ओएमजी 2' के असर को लेकर खुलकर बात की।
'बिमल रॉय की फिल्मों ने सोच बदल दी'
अमित राय बताते हैं कि फिल्मकार बनने की उनकी सोच पर सबसे गहरा असर बिमल रॉय का रहा है। अमित के मुताबिक, 'मैं जिन फिल्मकारों को देखकर इस क्षेत्र में आया, उनके पात्र आज भी मेरे भीतर जिंदा हैं। 'प्रेम रोग' का नरेंद्र हो, 'प्यासा' का विजय हो ... इन फिल्मों में सिर्फ कहानी नहीं थी, समाज के प्रति जिम्मेदारी भी थी। इन्हें देखकर समझ आया कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से संवाद करने का माध्यम भी है।'
'बेटे का नाम भी बिमल राय रखा'
बिमल रॉय के प्रभाव का जिक्र करते हुए वह आगे कहते हैं, 'जब मैंने 'दो बीघा जमीन' देखी तो सोचने लगा कि कोई इंसान इतनी ईमानदारी से फिल्म कैसे बना सकता है। 'मैं बिमल रॉय से कभी मिला भी नहीं, लेकिन उनकी फिल्मों ने मुझे बदल दिया। लोग कहते हैं कि उनका मुझ पर इतना प्रभाव है कि मैंने अपने बेटे का नाम भी बिमल राय रख दिया। उनकी फिल्मों ने मेरी सोच बदल दी।'
'अगर सिनेमा समाज को नहीं बदल सकता, तो कुछ भी नहीं बदल सकता'
सिनेमा की ताकत पर अमित का नजरिया बिल्कुल साफ है। उनकी मानें तो, 'लोग पूछते हैं कि क्या सिनेमा समाज को बदल सकता है? मैं कहता हूं कि अगर सिनेमा समाज को नहीं बदल सकता, तो फिर कुछ भी नहीं बदल सकता'।
'ओएमजी 2' के बाद देखने को मिला बदलाव'
अमित राय का कहना है कि अच्छी फिल्म का असर सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहता। वह बताते हैं कि 'ओएमजी 2' के बाद उन्हें इसका एक उदाहरण भी देखने को मिला। वह कहते हैं, 'उल्हासनगर की सिंधु एजुकेशन सोसाइटी ने बिना सरकार की मंजूरी का इंतजार किए यौन शिक्षा पढ़ाना शुरू कर दिया। उन्हें लगा कि फिल्म ने एक जरूरी बात कही है। उन्होंने कहा कि आज से ही इसे पढ़ाना शुरू करते हैं। तब मुझे लगा कि फिल्म ने कहीं न कहीं अपना काम किया है।'
'फिल्मकार की भी नैतिक जिम्मेदारी होती है'
अमित का मानना है कि फिल्मकार समाज से अलग नहीं हो सकता। वह कहते हैं, 'हम समाज का हिस्सा हैं। इसलिए फिल्मकार होने के नाते हमारी भी नैतिक जिम्मेदारी है। कोई बंदूक रखकर हमसे यह नहीं कहता कि ऐसी फिल्म बनाओ, लेकिन समाज की इकाई होने के नाते यह जिम्मेदारी अपने आप आ जाती है। अगर फिल्मों में हम सिर्फ रिश्तों के टूटने, हिंसा या गलत बातों को ही सही ठहराने लगेंगे, तो उसका असर समाज पर पड़ेगा। अगर बच्चे अपने माता-पिता को सड़क पर छोड़ रहे हों... हम उसी को सही बताने लगें, तो समाज कैसे टिकेगा। हमें प्रेम, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों की कहानियां भी सुनानी होंगी।'
'मेरा काम सिर्फ बीज बोना है'
बातचीत के दौरान कहते हैं, 'मैं बदलाव थोपने में विश्वास नहीं रखता। मेरा काम सिर्फ बीज बोना है। वह कहां उगेगा, कब उगेगा और किसकी सोच बदलेगा, यह मैं तय नहीं कर सकता। बीज बोना मेरा काम है, अपना रास्ता वह खुद ढूंढ़ लेगा। अगर किसी एक इंसान तक भी बात पहुंच जाए, तो मुझे लगता है कि मेरी फिल्म ने अपना काम कर दिया।'
कौन थे बिमल रॉय?
बिमल रॉय हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक थे। उन्होंने 'दो बीघा जमीन', 'मधुमती', 'सुजाता', 'बंदिनी' और 'परिणीता' जैसी कई यादगार फिल्में बनाईं। उनकी फिल्में समाज से जुड़े मुद्दों और सादगी भरी कहानी के लिए आज भी याद की जाती हैं।
'ओह माय डॉग' 31 जुलाई को होगी रिलीज
अमित राय की अगली फिल्म 'ओह माय डॉग' 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, पवन मल्होत्रा, राजेश कुमार, गीता अग्रवाल शर्मा और माही राय अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म एक बच्चे और उसके पालतू कुत्ते के रिश्ते के जरिए प्यार, वफादारी और करुणा का संदेश देती है।