Ghooskhor Pandat Controversy: फिल्म का एलान, विरोध और कोर्ट की फटकार; जानिए 'घूसखोर पंडित' विवाद में क्या हुआ?
Ghuskhor Pandat Controversy Explainer: मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म 'घूसखोर पंडित' के टाइटल पर विवाद गहराता जा रहा है। ब्राह्मण समुदाय में आक्रोश है। विरोध हो रहे हैं। वहीं, सियासी जगत में भी कई नेताओं ने विरोध किया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मेकर्स को फटकार लगाई है। जानिए इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
विस्तार
मनोज बाजपेयी अभिनीत फिल्म 'घूसखोर पंडित' का बीते 03 फरवरी को आधिकारिक एलान किया गया था। इसी के साथ फिल्म के शीर्षक को लेकर विरोध के सुर तीव्र हो गए। ब्राह्मण समाज, संत समाज सड़कों पर उतर आया। लोगों ने फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और एक्टर मनोज बाजपेयी के पुतले फूंके। राजनीतिक जगत से भी फिल्म के टाइटल का मुखर होकर विरोध किया गया। विरोध अब भी जारी है। इस बीच कई जगह शिकायतें दर्ज हुईं। मामला कोर्ट तक पहुंचा और आज 12 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी मेकर्स को टाइटल पर फटकार लगाते हुए फिल्म का नया नाम पूछा है। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? और, अब तक इस मामले में क्या हुआ? यहां पढ़िए डिटेल
सुप्रीम कोर्ट ने किस-किस को जारी किया नोटिस?
सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को फिल्म 'घूसखोर पंडित' के फिल्ममेकर नीरज पांडे को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे टाइटल का इस्तेमाल करके समाज के एक हिस्से को बदनाम नहीं कर सकते हैं। मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म ‘घूसखाेर पंडित’ की रिलीज पर रोक लगाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के नाम पर कड़ी आपत्ति जाहिर की। न्यूज एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुयान की बेंच ने फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ की एक याचिका पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन को भी नोटिस जारी किया है।
19 फरवरी को होगी मामले की अगली सुनवाई
कोर्ट ने कहा, ‘आप ऐसे टाइटल का इस्तेमाल करके समाज के एक हिस्से को बदनाम क्यों कर रहे हैं? यह नैतिकता और पब्लिक ऑर्डर के खिलाफ है। जब तक आप हमें बदला हुआ नाम नहीं बताते हैं। हम आपको फिल्म रिलीज नहीं करने देंगे।’ कोर्ट ने फिल्म मेकर्स को एक एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया कि 'घूसखोर पंडित' समाज के किसी भी वर्ग को नीचा नहीं दिखाती है। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।
कब और कैसे शुरू हुआ विवाद?
बता दें कि बीते 03 फरवरी 2026 को नेटफ्लिक्स ने अपने साल 2026 के लिए 'इंडिया प्लान' का एलान किया। एक इवेंट में कई नई फिल्मों और सीरीज से पर्दा उठाया गया। इसी कड़ी में मनोज बाजपेयी की फिल्म 'घूसखोर पंडित' का एलान भी टीजर रिलीज करके किया गया था। मगर, इसी के साथ इस फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद शुरू हो गया। उत्तर प्रदेश से लेकर देश के अलग-अलग इलाकों में इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुईं। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन अब भी जारी हैं। मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। कलाकार और निर्माता ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सफाई पेश की थी।
लखनऊ में फिल्म के खिलाफ एफआईआर, मायावती ने की थी बैन की मांग
फिल्म 'घूसखोर पंडित' विवाद के बाद उत्तर प्रदेश के लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई थी, जबकि NHRC ने एक शिकायत के बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया। कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह शिकायत दर्ज हुई। आरोप है कि फिल्म में धार्मिक और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचने की कोशिश की गई। वहीं, बसपा पार्टी प्रमुख मायावती ने भी फिल्म के टाइटल का विरोध किया था। उन्होंने फिल्म के नाम को जातिवादी और अपमानजनक बताते हुए सरकार से इस फिल्म को बैन करने की मांग की। मध्य प्रदेश में भी कई जगह फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। पोस्टरों पर जूते मारकर आक्रोश जताया गया।
Uttar Pradesh | A case has been registered at Hazratganj Police Station against the director and team of the web series 'Ghooskhor Pandat' for allegedly attempting to disrupt social harmony and hurt religious/caste sentiments.
— ANI (@ANI) February 6, 2026
The strictest possible action will be taken against… pic.twitter.com/uN35TL8Nsz
यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों…
— Mayawati (@Mayawati) February 6, 2026
वीएचपी ने जताया एतराज, सरकार से किया आग्रह
वीएचपी (विश्व हिंदू परिषद) ने 'घूसखोर पंडित' पर आपत्ति जताई और इसे समाज के 'सबसे सम्मानित' वर्ग पर हमला बताया। वीएचपी ने सरकार से इस मामले को देखने का आग्रह किया। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, 'यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। फिल्म के नाम से, आप न सिर्फ हमारे हिंदू समाज के सबसे सम्मानित वर्ग पर हमला कर रहे हैं, बल्कि देश में नफरत और अशांति फैलाने की भी कोशिश कर रहे हैं। इसे तुरंत रोकें और माफी मांगें, नहीं तो हिंदू समाज आपके ऐसे बार-बार किए जाने वाले प्रयासों के खिलाफ लोकतांत्रिक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगा'।
मनोज बाजपेयी और मेकर्स ने पेश की सफाई
फिल्म के टाइटल पर विरोध प्रदर्शन होने के बाद मनोज बाजपेयी और निर्माता नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर सफाई पेश की थी। बीते शुक्रवार को उन्होंने कहा कि 'घूसखोर पंडित' की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है, जिसमें कुछ कमियां हैं और इसका किसी जाति या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्वीकार किया कि फिल्म के टाइटल ने दर्शकों के एक वर्ग को 'दुख' पहुंचाया है और कहा कि फिल्म के सभी प्रमोशनल मटीरियल फिलहाल हटा दिए जाएंगे।
ब्रज के संतों ने जताई थी आपत्ति
इस फिल्म के विरोध में ब्रज के संतों ने भी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने फिल्म को बैन करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। साथ ही आरोप लगाया था कि 'अभिव्यक्ति की आजादी' के नाम पर जानबूझकर ब्राह्मण समाज की छवि को धूमिल किया जा रहा है। वहीं, प्रयागराज में 'घूसखोर पंडित' के विरोध में परशुराम सेना ने प्रदर्शन किया। मनोज बाजपेयी और नीरज पांडेय का पुतला दहन करते हुए नारेबाजी की। फिल्म के नाम को तत्काल बदलने की मांग की गई।
एफएमसी ने झाड़ा पल्ला, मेकर्स को भेजा नोटिस
फिल्म निर्माता संघ (एफएमसी) ने भी ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर मेकर्स को नोटिस जारी किया। एफएमसी ने कहा कि मेकर्स ने नियमों के अनुसार शीर्षक के लिए अनिवार्य अनुमति प्राप्त नहीं की थी। नोटिस में कहा गया कि फिल्म निर्माता नीरज पांडे, जो इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, उन्होंने 'घुसखोर पाण्डत' शीर्षक के उपयोग के लिए अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसे में बिना अनुमति के इसका उपयोग अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।
फिल्म 'घूसखोर पंडित' के बारे में....
फिल्म 'घूसखोर पंडित' का आधिकारिक एलान नेटफ्लिक्स के एक इवेंट में किया गया। इसमें मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभा रहे हैं। उनके किरदार का नाम अजय दीक्षित है, लेकिन पुलिस महकमे में उन्हें 'पंडित' कहा जाता है। फिल्म के निर्देशन की कमान रितेश शाह ने संभाली है। वहीं, इसे नीरज पांडे ने प्रोड्यूस किया है।