‘उद्देश्य कहानी सुनाना नहीं है, एक सच्चाई सामने लाना है’; ‘द केरल स्टोरी 2’ को लेकर बोले विपुल शाह
Producer Vipul Shah Exclusive Interview: साल 2023 में आई फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की सफलता के बाद अब निर्माता विपुल शाह 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' लेकर आए हैं। इन दिनों यह फिल्म विवादों में है। हाल ही में विपुल शाह ने अमर उजाला से अपनी फिल्म को लेकर लंबी बातचीत की। इस बातचीत में कई मुद्दों पर चर्चा की है।
विस्तार
चार साल पहले जब फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ रिलीज हुई तो इसे लेकर खूब विवाद हुआ, खूब आलोचना भी की गई। लेकिन फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की। अब इसके प्रोड्यूसर विपुल शाह फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म को लेकर फिर से बवाल खड़ा हो चुका है। कई लोग इसे क्रिटिसाइज कर रहे हैं। इन्हीं बातों के बीच विपुल शाह ने ‘द केरल स्टोरी 2’ की कास्टिंग से लेकर क्रिएटिव फ्रीडम जैसी बातों को साझा किया है। पढ़िए, विपुल शाह की इस बातचीत के प्रमुख अंश…
'द केरल स्टोरी' के बाद आपको क्यों लगा कि पार्ट 2 की जरूरत है?
'द केरल स्टोरी' में जो केरल वाला मॉड्यूल दिखाया गया था, वो पूरी कहानी का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा था। वो एक नेटवर्क था, जो केरल में काम करता है, लेकिन यह मान लेना गलत है कि मामला सिर्फ वहीं तक सीमित है। हमारी रिसर्च में साफ दिखा कि ये मुद्दा देश के और भी हिस्सों में मौजूद है।
हमें यह भी पता चला कि पूरे भारत में डेमोग्राफी बदलने के लिए लव जिहाद का इस्तेमाल किया जा रहा है। लड़कियों को मैनिपुलेट किया जाता है, कंवर्जन कराया जाता है। हमारी बेटियों-बहनों की जिंदगी को एक बड़े राजनीतिक साजिश का हिस्सा बना दिया जाता है। उनको किसी एक्सपेरिमेंट की तरह इस्तेमाल किया जाता है और उनकी जिंदगी से खेला जाता है। इसीलिए हमने महसूस किया कि यह टॉपिक बहुत बड़ा है। सिर्फ एक राज्य की कहानी नहीं है। यही वजह है कि ‘द केरल स्टोरी 2’ बनाना जरूरी था। जिससे यह बड़ी सच्चाई और विस्तार से सामने आ सके।
जब विषय इतना संवेदनशील हो, तो क्या सच दिखाना और क्रिएटिव फ्रीडम दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है?
हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही थी कि हम सच को बिल्कुल सच्चे तरीके से सामने रखें। जब हम किसी घटना को शूट करते हैं, तो बहुत ध्यान रखते हैं कि उसका असली मतलब कहीं कमजोर न पड़े, उसका सच कहीं बिगड़ ना जाए। दर्शकों तक कोई गलत मैसेज न जाए।
क्रिएटिव फ्रीडम हमारे पास पूरी होती है। हम बोल्ड और ईमानदार होकर फिल्म शूट करते हैं। लेकिन जिम्मेदारी हम कभी नहीं भूलते। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बहुत संवेदनशील मुद्दा है। ऐसे में हर सीन सोच-समझकर, पूरी जिम्मेदारी के साथ शूट किया गया, जिससे सच भी बना रहे और दर्शकों तक बिल्कुल साफ तरीके से बात पहुंच भी जाए।
इस फिल्म की शूटिंग कितने दिनों में पूरी हो गई। इसे कहां-कहां शूट किया गया?
हमारी फिल्म की शूटिंग लगभग पचास दिनों में पूरी हो गई थी। हमने शूटिंग को बहुत अच्छी तरह प्लान किया था, इसलिए काम आसानी से चलता रहा। ज्यादातर शूटिंग मुंबई में हुई, कुछ हिस्से जोधपुर, आगरा और ग्वालियर में फिल्माए गए। केरल से जुड़े कुछ सीन हमने सुविधा के हिसाब से बंगलूरू के पास शूट किए। लोकेशन ऐसे चुने कि कहानी बिल्कुल असली लगे।
फिल्म के पार्ट 2 में एक्ट्रेस की कास्टिंग का प्रोसेस क्या था?
कास्टिंग की पूरी जिम्मेदारी हमारे कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा की थी। हम उन्हें कहानी और किरदारों की पूरी ब्रीफ देते हैं, जैसे किस तरह का चेहरा चाहिए? कैसी पर्सनैलिटी चाहिए? कितना इमोशन चाहिए? उसके बाद वो और उनकी टीम बहुत मेहनत करती है। कई कलाकारों के ऑडिशन होते हैं, कई राउंड होते हैं। अलग–अलग टेस्ट लिए जाते हैं। फिर वो चुने हुए ऑडिशन हमें भेजते हैं और वहीं से हमारा फाइनल सेलेक्शन होता है। इन तीनों एक्ट्रेस ने (उल्का गुप्ता, ऐश्वर्या ओझा, अदिति भाटिया) ने इतना दमदार और इमोशनल ऑडिशन दिया था कि सच में इनके अलावा किसी और का चेहरा हमारे दिमाग में आया ही नहीं। जिस तरह इन्होंने किरदार को समझा और निभाया, उसी वक्त तय हो गया था कि यही हमारी फिल्म का चेहरा होंगी।
क्या आपने कभी इंडस्ट्री के अंदर इस तरह का कोई मामला या घटना सुनी है, जिसे आप ‘केरल स्टोरी 2’ की स्टोरी से जोड़ पाए?
नहीं, अभी तक मेरे पास इंडस्ट्री के अंदर ऐसा कोई सीधा मामला नहीं आया है। जिसे मैं इसी कैटेगरी में रख सकूं। कम से कम मेरे अनुभव में ऐसा कोई खास किस्सा सामने नहीं आया।
‘द केरल स्टोरी’ पार्ट पहले के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन का कहना है कि वो एक कहानी को खींचकर पार्ट टू बनाने में विश्वास नहीं रखते। आप इस राय को कैसे देखते हैं?
देखिए, इस फिल्म की जो कहानी थी, उसके लिए हमें लगा कि जिस डायरेक्टर के पास इसके लिए सही संवेदनशीलता, सही विजन और सही ट्रीटमेंट होगा, हमें उसी के साथ काम करना चाहिए। इसलिए हमने इस बार कामाख्या नारायण सिंह के साथ काम किया। वो नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर हैं, नामी डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर हैं। उनका क्राफ्ट कितना मजबूत है, ये तो आप ट्रेलर देखकर ही समझ सकते हैं।
जहां तक सुदीप्तो जी की राय का सवाल है, पहले कभी इस बारे में थोड़ी बहुत बात हुई थी। बाद में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई। ईमानदारी से कहूं, मेरे और उनके बीच जो भी बातें होती हैं, वह मैं इंटरव्यू में बताना पसंद नहीं करूंगा। उन्होंने जो कहा, वह उनकी अपनी राय है। मैं उस राय से सहमत हूं या नहीं, इससे ज्यादा कुछ फर्क पड़ने वाला नहीं है।
हम इस बात को लेकर सच में बहुत जिम्मेदारी महसूस करते हैं। हम चाहते हैं कि जितना हो सके, ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देखें, क्योंकि हमारा उद्देश्य सिर्फ कहानी सुनाना नहीं है, बल्कि एक सच्चाई सामने लाना है। हम मानते हैं कि इस देश की लाखों युवा लड़कियों और उनके परिवारों के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। अगर यह फिल्म देखकर किसी एक भी परिवार को समझ आए कि अपनी बच्चियों की सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं, तो यह हमारे लिए सबसे बड़ी सफलता है।
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