Exclusive: ‘स्टार किड्स पर प्रेशर होता है’; दर्शील सफारी ने नेपोटिज्म पर रखी राय, बाबिल खान को लेकर कही ये बात
Darsheel Safary Exclusive Interview: साल 2007 में आई फिल्म 'तारे जमीन पर' में दर्शील सफारी बाल कलाकार के रूप में नजर आए। ईशान की भूमिका उन्होंने बड़ी खूबसूरती से निभाई। हाल ही में दर्शील ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में अपने करियर और इंडस्ट्री के कई पहलुओं पर चर्चा की।
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विस्तार
बचपन में ‘तारे जमीन पर’ से घर-घर में पहचान बनाने वाले दर्शील सफारी का सफर सिर्फ एक फिल्म की सफलता तक सीमित नहीं रहा। शुरुआती स्टारडम के बाद उन्हें लंबे समय तक खुद को फिर से साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ा। हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान दर्शील ने इंडस्ट्री में नेपोटिज्म, अपने स्ट्रगल, बदलती सोच और बाबिल खान को लेकर उठे विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी।
‘नेपोटिज्म की बहस में छिपी है असली सच्चाई’
वह कहते हैं, ‘लोग बाहर से इंडस्ट्री को एक ही नजर से देखते हैं। लेकिन अंदर आकर समझ आता है कि चीजें इतनी सिंपल नहीं हैं। नेपोटिज्म की बात होती है, लेकिन अगर मैं किसी को जानता हूं, उसके साथ पहले काम कर चुका हूं, तो मैं उसी के साथ काम करना चाहूंगा। किसी अनजान के साथ रिस्क लेना हर कोई नहीं चाहता। ये नेपोटिज्म का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन ये इंसानी नेचर भी है।’
‘दरवाजे बंद नहीं होते, हम कोशिश करना बंद कर देते हैं’
दर्शील आगे कहते हैं, ‘इसका मतलब ये नहीं है कि बाहर वालों के लिए दरवाजे बंद हैं। सच ये है कि दरवाजे बंद नहीं होते, हम कोशिश करना बंद कर देते हैं। अगर आप खुद जाकर अपना काम नहीं दिखाओगे, तो कोई आपको ढूंढने नहीं आएगा। आपको खुद सामने आना पड़ेगा। खुद बताना पड़ेगा कि आप क्या कर सकते हो।’
‘नेगेटिव सोच आपको लिमिट कर देती है’
अपने करियर के उतार चढ़ाव पर वह साफ कहते हैं, ‘बहुत बार ऐसा होता है कि हम बैठकर सोचते रहते हैं कि मेरे साथ ये गलत हुआ, मुझे ये मौका नहीं मिला। और उसी में हम खुद को लिमिट कर लेते हैं। मैं हमेशा यही सोचता हूं कि मेरे पास क्या है और मैं उससे क्या बेहतर कर सकता हूं। नेगेटिव सोच आपको कहीं नहीं ले जाती।’
‘स्टार किड्स पर सबसे ज्यादा प्रेशर होता है’
मई 2025 में दिवंगत इरफान खान के बेटे बाबिल खान का एक इमोशनल वीडियो चर्चा में आया था। इसमें उन्होंने बॉलीवुड को ‘फेक’ बताया था और अपनी इमोशंस जाहिर की थीं। इस पर जब दर्शील से सवाल किया गया, तो उन्होंने इस मुद्दे को संतुलित नजरिए से देखने की बात कही।
‘देखो, ये भी इंडस्ट्री का ही हिस्सा है। आप इसे कैसे देखते हो, ये बहुत मायने रखता है। आप चाहो तो हर चीज को नेगेटिव तरीके से देख सकते हो। और चाहो तो उसे समझने की कोशिश भी कर सकते हो। अगर किसी को आप स्क्रिप्ट दोगे, तो वो अपना काम करके देगा। लेकिन असली बात आपकी अप्रोच की है।’ वह आगे जोड़ते हैं, ‘अगर आप बैठकर यही सोचते रहोगे कि मेरे साथ ये गलत हो गया, मुझे साइड कर दिया गया, तो आप खुद को लिमिट कर लोगे। मेरे हिसाब से हमें इस पर ध्यान देना चाहिए कि हमारे पास क्या मौके आ रहे हैं। कौन से दरवाजे खुले हैं। क्योंकि दरवाजे बंद नहीं होते, हम उनका देखना बंद कर देते हैं।
जहां तक स्टार किड्स की बात है, जैसे बाबिल… मुझे हमेशा लगता है कि उन पर सबसे ज्यादा प्रेशर होता है। अगर आप किसी बड़े स्टार के बेटे या बेटी हो, तो एक्सपेक्टेशन भी उतनी ही बड़ी होती है। लोग आपको जज करते हैं, लेकिन वो प्रेशर नहीं देखते।’
‘मेंटैलिटी बदलो, रास्ते खुद बनेंगे’
दर्शील मानते हैं कि पूरा खेल सोच का है। वह कहते हैं, ‘मैं पर्सनली चीजों को इस तरह देखता हूं कि ये सब मेंटैलिटी की बात है। अगर आप सिर्फ ये सोचते रहोगे कि ये नहीं हुआ, वो नहीं हुआ, तो आप वहीं फंस जाओगे। लेकिन अगर आप फोकस करोगे कि आगे क्या करना है, तो रास्ते खुद बनने लगते हैं।’
‘फिल्में मेरे लिए एक सेफ स्पेस हैं’
बात खत्म करते हुए वह कहते हैं, ‘मेरे लिए फिल्मों में काम करना एक सेफ स्पेस जैसा है। मैं चलना पसंद करता हूं। सोचता हूं। चीजों को समझने की कोशिश करता हूं। कई बार जब आप किसी चीज को अलग नजरिए से देखते हो, तो आपको उसके जवाब भी मिल जाते हैं।’

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