‘आज की पीढ़ी इरफान को कॉपी करती है’, दिवंगत एक्टर की जयंती पर अखिलेंद्र मिश्रा ने खोले यादों के पन्ने
Irrfan Khan Birth Anniversary: इरफान खान की 59वीं जयंती के मौके पर अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने उन्हें याद किया और उनके साथ जुड़े कई किस्से साझा किए। बातचीत में उन्होंने इरफान के संघर्ष, मेहनत और उनके स्वभाव की बात की।
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थिएटर से लेकर इंटरनेशनल सिनेमा तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले इरफान खान को लेकर अखिलेंद्र मिश्रा का कहना है कि उन्होंने यह मुकाम अपने दम पर हासिल किया।
‘उन्होंने बिना किसी सिफारिश और बिना किसी बैकिंग के अपनी जगह बनाई’
अमर उजाला से बातचीत में अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा, 'देखिए, इरफान खान हमारे रंगमंच के एक बेहद उम्दा कलाकार थे और फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे अभिनेता, जिन्होंने अपने दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने बिना किसी सिफारिश, बिना किसी नेपोटिज्म और बिना किसी बैकिंग के अपनी जगह बनाई। पता नहीं किसकी नजर लग गई कि वह इतनी जल्दी हम सबको छोड़कर चले गए। जबकि वह अपने करियर के सबसे बेहतरीन दौर में थे और लगातार उम्दा काम कर रहे थे। इरफान खान प्रतिभा के सच्चे उदाहरण थे, जिनका नाम आज भी लिया जाता है जब बात मेहनत और काबिलियत के दम पर आगे बढ़ने की होती है। आज भी अगर कोई कहता है कि ऐसा कौन सा अभिनेता है, जिसने अपने बलबूते पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, तो सबसे पहला नाम इरफान खान का ही आता है।'
‘वे चंद्रकांता के दिनों से लगातार काम कर रहे थे’
अखिलेंद्र ने बताया कि वह इरफान खान को उनके शुरुआती टेलीविजन दौर से जानते थे, जब वे लगातार काम कर रहे थे। 'मैं उन्हें चंद्रकांता के दिनों से जानता हूं। 1994–95 के आसपास हम साथ में काम कर रहे थे। तब दिन के 12, 14, कभी-कभी 18 घंटे तक शूटिंग होती थी। उन दिनों वे लगातार टेलीविजन कर रहे थे। वजह बहुत साफ थी। वे कहते थे कि मुझे घर खरीदना है। एक बार घर हो जाए, फिर फिल्मों पर ध्यान दूंगा। मैंने खुद उनसे पूछा था कि आप इतना ज्यादा टेलीविजन क्यों कर रहे हैं। उन्होंने वही बात दोहराई कि घर खरीदना है। टेलीविजन इसीलिए कर रहा हूं। और, ठीक वैसा ही हुआ। उन्होंने पहले घर खरीदा और फिर पूरे फोकस के साथ फिल्मों की ओर बढ़े।'
‘उनके जीवन में शुरू से ही बहुत स्पष्टता थी’
अभिनेता के मुताबिक, इरफान खान अपने काम और जीवन को लेकर शुरू से ही साफ सोच रखते थे। 'उनके जीवन में एक बहुत बड़ी स्पष्टता थी। उन्हें पता था कि पहले क्या करना है, फिर क्या करना है और उसके बाद क्या करना है। मेरा मानना है कि जब तक इंसान के जीवन में यह स्पष्टता नहीं होती, तब तक सफलता भी अधूरी रहती है। इस मामले में इरफान खान बेहद स्पष्ट थे। हालांकि उन्हें शुरुआती दौर में फिल्में मिल रही थीं। उन्होंने दृष्टि जैसी फिल्में की थीं और मुख्य भूमिकाएं भी निभाई थीं, लेकिन वह जगह तुरंत नहीं बन पाई थी। धीरे-धीरे, समय के साथ, उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी अदायगी में एक अलग सच्चाई थी। वे बेहद नैचुरल अभिनेता थे। उनकी डायलॉग डिलीवरी, उनका अंदाज, उनका ठहराव, सब कुछ उनका अपना था। वे किसी की नकल नहीं थे।'
‘आज की पीढ़ी अनजाने में इरफान खान की नकल करती है’
उन्होंने आगे यह भी कहा कि इरफान खान का असर आज की पीढ़ी के अभिनेताओं पर साफ दिखाई देता है। 'आज की पीढ़ी के कई अभिनेता अनजाने में ही इरफान खान की नकल करने की कोशिश करते हैं। उनका धीमे बोलना, उनका ठहराव, उनका सहज अंदाज, बिना जोर दिए बात कहना, यह सब कहीं न कहीं इरफान से ही आया है। लेकिन फर्क यह है कि इरफान कभी किसी की कॉपी नहीं थे। वे जो भी करते थे, वह उनके भीतर से आता था। उनकी अदायगी में सच्चाई थी। इसलिए वह अलग लगे। मेरा मानना है कि इरफान जैसा बनने का मतलब उनकी नकल करना नहीं है, बल्कि अपनी सच्चाई को ढूंढना है। वही बात आज की पीढ़ी को समझनी चाहिए।'
‘हम हर रोज मिलते थे, कोई एक खास मुलाकात याद नहीं’
इरफान खान के साथ बिताए वक्त को याद करते हुए अखिलेंद्र कहते हैं कि उनके साथ काम करना हमेशा सहज रहा। 'सच कहूं तो इरफान से कोई एक खास मुलाकात मुझे अलग से याद नहीं है, क्योंकि हम हर रोज मिलते थे। रोज शूट होता था। कभी 12 घंटे, कभी 14 घंटे, तो कभी 18 घंटे तक काम चलता था। हमारा ज्यादातर वक्त फिल्म सिटी में ही गुजरता था। दिन हो या रात, जिस भी शिफ्ट में शूट होता, हम साथ होते थे। कई बार एक साथ बैठकर गपशप भी होती थी। पंकज, धीर, सावाज खान, ब्रह्मचारी जी और कई अभिनेता और अभिनेत्रियां साथ बैठते थे। जैसे जैसे शूट चलता था, वैसे वैसे वक्त निकल जाता था। शॉट देते थे, फिर अगला शॉट लेने आ जाते थे। सब कुछ बहुत सहज और अपनेपन वाला माहौल था।'
‘वे सिगरेट पीते थे.. हर किसी से मुस्कराकर मिलते थे’
उन्होंने इरफान खान की आदतों और उनके स्वभाव का भी जिक्र किया। 'उनकी कुछ आदतें भी थीं। वे सिगरेट पीते थे और काफी ज्यादा पीते थे। लेकिन इसके अलावा उनकी एक बहुत खास आदत थी, जो मुझे हमेशा याद रहती है। वे हर किसी से मुस्कुराकर मिलते थे। यह उनकी स्वभाविक आदत थी और बहुत खूबसूरत भी। एक और बात जो उनमें साफ दिखाई देती थी, वह थी सम्मान की भावना। वे हमेशा खड़े होकर बात करते थे, बैठे-बैठे नहीं। अपने से बड़ों का सम्मान करना, अपने साथ काम करने वालों को बराबरी से देखना, यह उनके व्यवहार का हिस्सा था।'
‘वे बहुत जल्दी चले गए, अभी बहुत काम बाकी था’
बात के अंत में अखिलेंद्र मिश्रा ने इरफान खान को याद करते हुए कहा, 'अगर आज उनके बारे में एक बात कहने का मौका मिलता, तो बस यही कहता कि वे बहुत जल्दी चले गए। उन्हें इतनी जल्दी नहीं जाना चाहिए था। अभी बहुत काम बाकी था। जिस तरह वे आज की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं, उसी तरह वे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल बन सकते थे। उनका सफर अभी अधूरा था और उसी अधूरेपन का अहसास सबसे ज्यादा खलता है।'