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'बियॉन्ड द केरल स्टोरी' से निर्देशक सुदीप्तो सेन की दूरी; बोले- ‘जो कहना था, वह एक ही फिल्म में कह दिया’

Kiran Jain किरण जैन
Updated Tue, 06 Jan 2026 08:00 AM IST
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सार

Sudipto Sen Exclusive Interview: आज के दौर में जब किसी भी सफल फिल्म का अगला हिस्सा तुरंत घोषित कर दिया जाता है, ‘द केरल स्टोरी’ के बाद ‘बियॉन्ड द केरल स्टोरी’ का आना कोई हैरानी की बात नहीं थी। इस फिल्म का निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह करेंगे। सीक्वल पर मूल फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन क्या कहते हैं? पढ़िए

The Kerala Story Director Sudipto Sen talks about sequel Beyond the Kerala Story and his Upcoming Movies
सुदीप्तो सेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला से बातचीत में फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने अपनी बात रखी। उन्होंने न सिर्फ इस नई फिल्म से अपनी दूरी जताई, बल्कि मौजूदा दौर में सीक्वल, दोहराव और सिनेमा की जिम्मेदारी को लेकर भी अपना नजरिया स्पष्ट किया।

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The Kerala Story Director Sudipto Sen talks about sequel Beyond the Kerala Story and his Upcoming Movies
द केरल स्टोरी - फोटो : सोशल मीडिया

‘जो कहना था, वह एक ही फिल्म में कह दिया’
सुदीप्तो सेन के मुताबिक, ‘द केरल स्टोरी’ में वह अपनी पूरी बात कह चुके हैं और उसे दोहराने के लिए फिल्में बनाना उनकी सोच का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘बियॉन्ड द केरल स्टोरी से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। जो कुछ भी मुझे कहना था, जिन सवालों पर बात करनी थी और जिन सच्चाइयों को सामने रखना था, मैंने वह सब द केरल स्टोरी में एक बार में कह दिया। मैं अपनी कही हुई बात को दोहराने या उसे आगे खींचने के लिए फिल्में नहीं बनाता।’

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निर्देशक सुदीप्तो सेन - फोटो : अमर उजाला

'अगर कहानी खत्म हो चुकी है, तो उसे दोबारा दिखाना मुझे सही नहीं लगता'
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं दो हिस्सों में बंटी कहानियों में विश्वास नहीं करता, क्योंकि मेरे लिए सिनेमा वही है जो एक ही बार में अपनी पूरी बात कह दे। जब कोई कहानी अपने स्वाभाविक अंत तक पहुंच जाती है, तो उसे आगे बढ़ाना मेरे हिसाब से ईमानदारी नहीं होती, न सिनेमा के साथ और न ही ऑडियंस के साथ। मेरे लिए सिनेमा सिर्फ एक माध्यम नहीं है, यह एक साफ स्टैंड है। मैं फिल्म इसलिए नहीं बनाता कि वह सुविधाजनक हो या किसी को असहज न करे।'

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सुदीप्तो सेन - फोटो : अमर उजाला

‘चरक उस भारत की कहानी है, जहां आस्था तर्क से बड़ी हो जाती है’
इसी बातचीत में सुदीप्तो सेन ने अपनी आगामी फिल्म ‘चरक’ को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘चरक उस भारत की कहानी है, जहां आस्था कई बार तर्क से ऊपर चली जाती है और विश्वास जीवन और मृत्यु जैसे फैसलों को भी प्रभावित करता है। यह फिल्म आस्था के ऐसे रूप को दिखाती है, जिसमें ठीक करने की ताकत भी है, हिम्मत देने की क्षमता भी है और नुकसान पहुंचाने की संभावना भी है।' उन्होंने आगे कहा, 'चरक ऐसी सच्चाई की बात करती है, जहां विश्वास और उसके नतीजे सामने आ जाते हैं और इंसान की इंसानियत की परीक्षा होती है। यह फिल्म आस्था से जुड़े ऐसे कामों को दिखाती है, जिन्हें देखकर कोई भी अपनी सोच और समझ पर सवाल करने लगता है। फिल्म किसी को सही या गलत साबित नहीं करती, बल्कि सच को जैसा है, वैसा ही दिखाने की कोशिश करती है।'

The Kerala Story Director Sudipto Sen talks about sequel Beyond the Kerala Story and his Upcoming Movies
सुदीप्तो सेन - फोटो : अमर उजाला

'मुझे सच कहा जाना पसंद है'
सच को दिखाने के अपने नजरिए पर सुदीप्तो सेन ने कहा, ‘मुझे सच कहा जाना पसंद है। या तो सच कहिए या फिर रास्ते से हट जाइए। मुझे राजनीतिक रूप से सही होना पसंद नहीं है। मैं अंधेरे सच से मुंह मोड़कर लोगों को उसी अंधेरे में रखना नहीं चाहता। यही काम नेता करते हैं, वे आपको वह सच नहीं बताते जो आपको जानना चाहिए। मेरा मानना है कि एक फिल्मकार का काम अपने ऑडियंस को हकीकत के केंद्र तक ले जाना है।’

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निर्देशक सुदीप्तो सेन - फोटो : अमर उजाला

'बॉलीवुड या टॉलीवुड जैसे शब्दों को सिरे से खारिज करता हूं'
सिनेमा की पहचान को लेकर भी सेन की राय साफ है। उन्होंने कहा, ‘मैं बॉलीवुड या टॉलीवुड जैसे शब्दों को सिरे से खारिज करता हूं। मेरा मानना है कि एक देश की पहचान एक होनी चाहिए और सिनेमा भी उसी पहचान से जाना जाना चाहिए। मेरे लिए यह सिर्फ इंडियन सिनेमा है। मेरा सिनेमा उन लोगों की कहानियों की तरफ देखता है जिनके हिस्से में न सुर्खियां आती हैं, न तारीफ और न ही कभी कैमरे की मौजूदगी।’

नोवा नरसंहार पर नई फिल्म की करेंगे घोषणा
इस बीच सुदीप्तो सेन इज़राइल में हुए नोवा म्यूज़िक फेस्टिवल नरसंहार पर आधारित एक नई फिल्म की घोषणा के करीब हैं। यह फिल्म उन लोगों को श्रद्धांजलि के रूप में देखी जा रही है, जो संगीत और आजादी  का जश्न मनाने आए थे, लेकिन कभी लौटकर नहीं आ सके। इस बारे में फिल्मकार ने कहा, ‘यह सिर्फ एक जगह नहीं है, यह एक ज़ख्म है। जो गवाहियां मैंने बचे हुए लोगों और पीड़ित परिवारों से सुनी हैं, वे इंसानी पीड़ा की दर्दनाक याद दिलाती हैं। यह उस संघर्ष और हिंसा की कहानी है, जिसे दुनिया तक पहुंचाया जाना ज़रूरी है। जब मैं वहां गया, यह सिर्फ एक फिल्मकार की यात्रा नहीं थी, बल्कि एक ज़िम्मेदारी थी। मैंने वहां जो देखा है, वह आगे उन कहानियों को आकार देगा, जिन्हें मैं कहूंगा।’

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