Exclusive: 'हम लोग 20-20 घंटे काम करते थे'; 'ब्राउन' की चर्चा के बीच बोलीं करिश्मा कपूर, कहा- कोई पछतावा नहीं
Karisma Kapoor Exclusive Interview: एक वक्त था जब करिश्मा कपूर दिन में चार-चार शिफ्ट कर रही थीं। मुंबई से हैदराबाद और एक सेट से दूसरे सेट तक भागना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।
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अब करिश्मा वही काम करती हैं जो उन्हें उत्साहित करे। हाल ही में रिलीज हुई ‘ब्राउन’ में वो एक ऐसे किरदार में नजर आई हैं, जो उनकी अब तक की इमेज से काफी अलग है। अमर उजाला से बातचीत के दौरान करिश्मा ने रीटा ब्राउन के किरदार, अपने करियर और बदलते दौर पर खुलकर बात की।
एक वक्त था जब आप लगातार काम कर रही थीं और आज चुनिंदा प्रोजेक्ट्स करती हैं। कोई खास वजह ?
करियर की शुरुआत में एक अलग दौर था। उस समय बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। एक सेट से दूसरे सेट भागना, लगातार काम करना, वह जिंदगी का दूसरा फेज था। मेरे साथ तो ऐसा भी हुआ है कि मैंने एक दिन में चार-चार शिफ्ट्स की हैं। तीन शिफ्ट्स मुंबई में और एक हैदराबाद में। कई बार रात 9 बजे निकलकर सुबह 5 बजे तक शूटिंग की, फिर वापस मुंबई आकर दूसरी शिफ्ट पकड़ ली और उसके बाद फिर अगली शूटिंग के लिए निकल गई।
लेकिन सच कहूं, वह अपने आप में एक खूबसूरत वक्त था। हम लोग 20-20 घंटे काम करते थे, लगातार अपने पैरों पर खड़े रहते थे, लेकिन उसी ने बहुत कुछ सिखाया।
आज करियर में ऐसी कौन-सी आजादी है जो 25 साल पहले नहीं थी?
आज मेरे पास अपनी शर्तों पर काम करने की आजादी है। मैं बहुत कम काम करती हूं और यह पूरी तरह मेरी पसंद है। मुझे ऐसा नहीं लगता कि मुझे रोज सेट पर जाना है या साल में सौ दिन काम करना ही है। अगर मेरा मन होगा, कोई प्रोजेक्ट मुझे सच में उत्साहित करेगा, तभी मैं उसे करूंगी और अगर मन नहीं होगा, तो मैं नहीं करूंगी।
‘ब्राउन’ की रीटा ब्राउन ने क्यों उत्साहित किया?
मुझे स्क्रिप्ट पढ़ते ही लगा कि ‘ब्राउन’ का किरदार बेहद अलग है। मैंने अपने करियर में काफी तरह के रोल किए हैं इसलिए अगर अब कुछ करूं तो वह बिल्कुल अलग होना चाहिए। मेरे लिए भी और ऑडियंस के लिए भी। रीटा ब्राउन एक ऐसी महिला है जो अंदर से टूटी हुई है और उसके ऊपर कोई बनावटी परत नहीं है। यह मेरे लिए खास था।
रीटा ब्राउन की दुनिया काफी डार्क है। स्क्रिप्ट पढ़ते वक्त ऐसा कोई पल आया जब आपने अपनी क्षमताओं पर सवाल किया हो?
दरअसल, जब अभिनय देव (निर्देशक) ने मुझे पहली बार इस किरदार के बारे में बताया तो मेरा पहला रिएक्शन यही था - 'ओह, नहीं... पता नहीं मुझे ये करना चाहिए या नहीं।' लेकिन जब मैंने पूरी स्क्रिप्ट सुनी, कहानी समझी...स्क्रीनप्ले देखा और यह जाना कि हर किरदार किस तरह एक-दूसरे से जुड़ता है, तब मुझे लगा कि मुझे यह जरूर करना चाहिए।
वैसे भी मैं बहुत ज्यादा काम नहीं करती हूं। यह बात सब जानते हैं। इसलिए जब यह रोल मेरे पास आया, तो मुझे लगा कि इसके लिए मुझे आगे बढ़ना चाहिए। मैंने इस पूरे प्रोसेस को बहुत एंजॉय किया - कॉन्सेप्ट से लेकर वर्कशॉप्स तक। अभिनय के साथ हुई डिटेल्ड डिस्कशंस ने भी मुझे किरदार को समझने में काफी मदद की।
सुना है, इस किरदार के लिए आपको सिगरेट पीना भी सीखना पड़ा ?
जी हां, इस रोल के लिए मुझे कुछ नई चीजें भी सीखनी पड़ीं। उनमें से एक सिगरेट पीना भी था। और वह कोई सामान्य सिगरेट नहीं थी, बल्कि रोल्ड सिगरेट थी। मैं तो हैरान रह गई थी। मुझे लगा- यह कैसे करूंगी? मुझे तो यह आता ही नहीं है।'
लेकिन मेरे किरदार के लिए यह बहुत जरुरी था कि वह इसे पूरी कॉन्फिडेंस के साथ करे। क्योंकि भले ही वह एक टूटी हुई महिला है... लेकिन एक बेहद स्मार्ट डिटेक्टिव भी है। उस आत्मविश्वास को पकड़ना और स्क्रीन पर दिखाना मेरे लिए काफी दिलचस्प अनुभव रहा। पूरा प्रोसेस मेरे लिए बेहद संतोषजनक रहा।
90 के दशक वाली करिश्मा से मिलें तो उसे क्या कहेंगी?
मैं उनसे यही कहूंगी कि अलग-अलग चीजें करती रहो। मेरे करियर के उस दौर में चीजें आज जैसी नहीं थीं। उस समय पैरेलल/आर्ट सिनेमा और कमर्शियल सिनेमा के बीच काफी फर्क हुआ करता था। बहुत ज्यादा लोग दोनों तरह की फिल्में नहीं करते थे।
मैंने किस्मत से दोनों तरह की सिनेमा में काम किया। एक तरफ मैं श्याम बेनेगल की 'जुबैदा' शूट कर रही होती थी तो दूसरी तरफ डेविड धवन की ‘बीवी नंबर 1’ के सेट पर होती थी।
इंडस्ट्री में 35 साल पूरे करने के बाद जब आप पीछे मुड़कर देखती हैं, तो सबसे पहला ख्याल क्या आता है?
सच कहूं तो मुझे किसी बात का पछतावा नहीं है। मैं खुद को बहुत लकी मानती हूं। हाल ही में एक डांस शो के दौरान किसी ने मुझे याद दिलाया कि इंडस्ट्री में मुझे 35 साल हो चुके हैं। तब एहसास हुआ कि यह सफर कितना लंबा रहा है। मैं इस जर्नी के लिए शुक्रगुजार हूं - हर फिल्म के लिए, हर मौके के लिए और उन सभी पलों के लिए जो मैंने इस इंडस्ट्री में जिए हैं। अगर आप मुझसे पूछे कि क्या कोई पछतावा है, तो मेरा जवाब होगा - बिल्कुल नहीं। मैं सिर्फ आभारी हूं कि मुझे यह सफर जीने का मौका मिला।