मदर्स डे स्पेशल: ‘जब दुनिया साथ नहीं देती, तब मां संभाल लेती है’, टीवी सेलेब्स ने सुनाईं दिल छूने वाली बातें
Mother's Day 2026: आज रविवार को मदर्स डे मनाया जा रहा है। इस अवसर पर टेलीविजन जगत के तमाम सितारों ने अपनी मां से जुड़े किस्से साझा किए हैं।
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मां... एक ऐसा रिश्ता, जो बिना कहे हर दर्द समझ लेता है। कभी उनकी दुआएं हमारी ढाल बन जाती हैं, तो कभी उनका भरोसा जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा। मदर्स डे के मौके पर टीवी सितारों ने अपनी मां से जुड़ी यादें, भावनाएं और वह बातें साझा कीं।
निया शर्मा - ‘वह हर मुश्किल पल को खूबसूरत याद में बदल देती हैं’
‘मेरी ताकत मुझे मेरी मां से विरासत में मिली है। मैंने उन्हें जिंदगी की हर मुश्किल का बेहद मजबूती से सामना करते देखा है और वही हिम्मत आज मेरे आत्मविश्वास की वजह है। लोग मेरे व्यक्तित्व में जो निडरता देखते हैं, उसके पीछे मेरी मां का भरोसा और परवरिश है। मुझे हमेशा लगता है कि जिंदगी में बहुत बड़ी चीजों की जरूरत नहीं होती, बस अपने माता-पिता साथ हों तो हर पल खास बन जाता है। मुझे आज भी वह ट्रिप याद है जब हम उन्हें बस में खो बैठे थे और घंटों बाद पता चला कि वह बस की छत पर बैठकर पूरे शहर के वीडियो बना रही थीं, जबकि हम सब परेशान हो रहे थे। यही उनकी खूबी है, वह हर मुश्किल पल को खूबसूरत याद में बदल देती हैं। इस साल मदर्स डे इसलिए भी खास है क्योंकि मुझे उनके साथ ‘लाफ्टर शेफ्स’ में शूट करने और खाना बनाने का मौका मिला। मैं जिंदगी में चाहे जो कर लूं, लेकिन उन्होंने मेरे लिए जो किया है उसकी बराबरी कभी नहीं कर सकती।’
दीपिका सिंह - ‘अपने बेटे की मां होना मेरे जीवन का सबसे अहम रोल है’
‘मां बनना मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और बदल देने वाला अनुभव है। एक कलाकार के तौर पर मैंने कई किरदार निभाए हैं, लेकिन अपने बेटे सोहम की मां होना मेरे जीवन का सबसे अहम रोल है। वह मुझे हर दिन जिंदगी के छोटे-छोटे पलों की अहमियत समझाता है। जब मैं बच्चों के साथ दृश्य करती हूं, तो कई बार ऐसा लगता है जैसे मैं अपने बेटे के साथ हूं। मैं अपने बेटे से कहती हूं कि जैसे मुझे अपने आसपास के बच्चों में उसकी झलक दिखाई देती है, वैसे ही उसे भी अपने आसपास की मजबूत महिलाओं में मेरी झलक दिखनी चाहिए। सेट पर कई दिन ऐसे होते हैं जब मैं उसे बहुत मिस करती हूं, लेकिन उसकी हंसी, उसकी वीडियो कॉल और छोटी-छोटी बातें मुझे फिर से ऊर्जा दे देती हैं। मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा मुझे एक कामकाजी मां के रूप में जाने, क्योंकि जब बच्चे अपनी मां को काम करते देखते हैं, तो वे समझते हैं कि एक महिला की पहचान कई रूपों में होती है।’
स्नेहा वाघ - ‘मैंने अपनी मां को चुपचाप पूरा परिवार संभालते देखा है’
‘बचपन में मां घर संभालने का हर काम इतना आसान बना देती थीं कि कभी एहसास ही नहीं हुआ कि इसके पीछे कितनी मेहनत होती है। जब मैं खुद घर से बाहर निकली और जिम्मेदारियां संभालीं, तब समझ आया कि मां कितनी खामोशी से पूरे परिवार को संभालती हैं। आज मेरे अंदर जो भी संस्कार और अच्छाइयां हैं, वह सब उनकी परवरिश की देन हैं। मेरे किरदार विद्या को निभाते हुए मुझे अपनी मां की झलक दिखाई देती है, क्योंकि वह भी पूरे परिवार को बिना जताए जोड़कर रखने वाली महिला हैं। मैंने अपनी जिंदगी में ऐसी महिला को बहुत करीब से देखा है। इस मदर्स डे पर मैं कुछ बड़ा नहीं कहना चाहती, बस इतना कहना चाहती हूं कि मैं उनसे जितना प्यार करती हूं और उनकी जितनी इज्जत करती हूं, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। मैं जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से हूं।’
संगीता घोष - ‘मां बनने के बाद हर मां का डर और प्यार समझ में आया’
‘जब मैंने पहली बार अपनी बेटी देवी को गोद में लिया, तो मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। उस एहसास को शायद मैं कभी पूरी तरह शब्दों में बयां नहीं कर पाऊंगी। उस पल के बाद मुझे हर मां के प्यार की गहराई समझ में आई। मां बनने के बाद मैंने महसूस किया कि बच्चे को प्यार देना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसे आजादी देना भी है। मेरा किरदार अपने बेटे को लेकर बेहद सुरक्षात्मक है, लेकिन यह कहानी उस बारीक फर्क को भी दिखाती है जहां मां अपने बच्चे को बचाना चाहती है, लेकिन उसे आगे बढ़ने की आजादी देना भी जरूरी होता है। एक मां के लिए यही सबसे मुश्किल और सबसे बहादुर प्यार होता है।’
राजीव खंडेलवाल - ‘उनका साथ और भरोसा ही मेरा आत्मविश्वास था’
‘मैं कई ऐसी मांओं से मिल रहा हूं, जो अपने परिवार को संभालने के लिए हर दिन निस्वार्थ भाव से मेहनत करती हैं और अनगिनत जिम्मेदारियों को संतुलित करती हैं। उनकी कहानियां और अनुभव सुनना मेरे लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहा है। मेरी अपनी मां हमेशा मेरी सबसे बड़ी ताकत रही हैं। उन्हें ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ती थी, उनका साथ और मुझ पर विश्वास ही मुझे आत्मविश्वास देता था। मेरे लिए मदर्स डे हर उस मां के प्रति आभार जताने का दिन है, जो हर मुश्किल दौर में अपने परिवार की ताकत बनकर खड़ी रहती है।’
अंकिता लोखंडे - ‘मेरी जिंदगी में दो मांओं का प्यार और आशीर्वाद है’
‘जिंदगी में कुछ लोगों को दोगुना आशीर्वाद मिलता है और मैं खुद को उन्हीं में से एक मानती हूं, क्योंकि मुझे दो मांओं का प्यार मिला है। एक मां जिन्होंने मुझे जन्म दिया और दूसरी मेरी सास, जिन्होंने मुझे बेटी की तरह अपनाया। दोनों ने मुझे हमेशा प्यार, ताकत और अपनापन दिया है। उनकी दुआएं ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं और उनकी खुशी मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है। मेरे लिए यह बहुत खास बात है कि मुझे अपनी मां के प्यार और उस शो के साथ जुड़ने का मौका मिला, जो मेरे दिल के बेहद करीब है।’
लॉरेन गॉटलिब - ‘जब भी मैं टूटती हूं, मां की आवाज मुझे संभाल लेती है’
‘घर और परिवार से दूर रहने के बाद मुझे मां की अहमियत और ज्यादा समझ आई। कई बार मुश्किल दिनों में मैं उन्हें फोन करती हूं और रोने लगती हूं, लेकिन बिना सब कुछ बताए भी वह समझ जाती हैं कि मुझे क्या सुनने की जरूरत है। जब भी मैं अकेलापन, घबराहट या थकान महसूस करती हूं, उनकी आवाज मुझे संभाल लेती है और याद दिलाती है कि जिंदगी में सबसे जरूरी परिवार का प्यार होता है। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें अपनी मां के त्याग, उनके डर और उनकी ताकत का एहसास होने लगता है। मेरी मां ने हमेशा मुझे बड़े सपने देखने की हिम्मत दी। बचपन में वह रोज मुझे डांस स्टूडियो छोड़ने और वापस लाने के लिए घंटों सफर करती थीं। वह हर प्रतियोगिता में मेरी सबसे बड़ी हौसला बढ़ाने वाली थीं। सच कहूं तो आज भी मुझे लगता है कि मैंने उनके निस्वार्थ प्यार और त्याग के लिए उन्हें उतना धन्यवाद नहीं कहा, जितना कहना चाहिए था।’
अभिषेक कुमार - ‘मां ने सिर्फ इतना कहा था- जा, मैं हूं ना’
‘मेरी मां कैमरे से दूर रहना पसंद करती हैं, लेकिन उन्हें मेरे काम की दुनिया देखना बहुत अच्छा लगता है। जब मैंने उनसे कहा था कि मैं मुंबई जाकर अभिनेता बनना चाहता हूं, तब उन्होंने मुझसे कोई सवाल नहीं किया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था, ‘जा, मैं हूं ना।’ उनकी यही बात मेरी सबसे बड़ी ताकत बन गई। जब मेरे पास सिर्फ अनिश्चितता थी, तब भी उनका भरोसा मुझे आगे बढ़ाता रहा। अगर मैं आज यहां तक पहुंचा हूं, तो सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने मेरे सपनों पर दुनिया से पहले भरोसा किया।’
तेजस्वी प्रकाश - ‘मां का प्यार शब्दों में कभी पूरा नहीं उतर सकता’
‘मैं अपनी मां के बारे में जितना भी कहूं, वह हमेशा अधूरा लगेगा, क्योंकि मां का प्यार शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह हमेशा मेरी ताकत और मेरी ढाल बनकर खड़ी रही हैं। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें उनकी मेहनत, त्याग और हिम्मत की सबसे बड़ी भूमिका है। उनके साथ वक्त बिताना और यादें बनाना मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादों में से एक रहेगा।’
गुलकी जोशी - ‘उनकी खामोश मौजूदगी मुझे शब्दों से ज्यादा ताकत देती थी’
‘मदर्स डे मुझे हमेशा उन छोटी-छोटी बातों की याद दिलाता है, जो मेरी मां ने मेरे लिए कीं और जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। अभिनय के शुरुआती दिनों में जब मैं खुद को बेहद परेशान और असमंजस में महसूस करती थी, तब वह बिना कुछ कहे सिर्फ मेरे पास बैठ जाती थीं। उनका वह खामोश साथ मुझे शब्दों से ज्यादा ताकत देता था। उन्होंने मुझे सिखाया कि जिंदगी कहीं भी ले जाए, हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहिए। आज मैं जो भी हूं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने तब भी मुझ पर भरोसा किया, जब मुझे खुद पर विश्वास नहीं था।’
स्नेहलता वसईकर -‘मां हर हाल में अपने बच्चे के साथ खड़ी रहती है’
‘मुझे लगता है कि मां का प्यार सबसे सच्चा और सबसे मजबूत एहसास है, जिसे कोई भी महसूस कर सकता है। चाहे मां कितनी भी सख्त या सुरक्षात्मक क्यों न लगे, उनकी हर बात के पीछे परिवार के लिए देखभाल और प्यार ही होता है। मां की फितरत हमेशा अपने बच्चे को बचाने और हर हाल में उसके साथ खड़े रहने की होती है। चाहे जिंदगी कितनी भी कठिन क्यों न हो, मां का प्यार हर बार सामने आ ही जाता है। मदर्स डे उन चुपचाप किए गए त्याग और बिना शर्त दिए गए सहारे को सराहने का दिन है, जो मां हर दिन देती हैं।’
अमृता धोंगडे - ‘मां का प्यार हमारी जिंदगी को आकार देता है’
‘मेरे लिए मां सच में सबसे मजबूत इंसान होती हैं, क्योंकि वो हर चीज को धैर्य, प्यार और देखभाल के साथ संभालती हैं। चाहे जिंदगी कितनी भी व्यस्त या मुश्किल क्यों न हो, वो हमेशा अपने परिवार को सुरक्षित और सहारा महसूस कराती हैं। मां की मौजूदगी कितनी जरूरी होती है, यह बात हमें अक्सर बाद में समझ आती है। उनका प्यार, मार्गदर्शन और भावनात्मक सहारा हमें ऐसे आकार देता है, जिसे हम अक्सर बाद में महसूस करते हैं। मदर्स डे उन चुपचाप किए गए त्याग और बिना शर्त दिए गए प्यार का खूबसूरत जश्न है, जो मां बिना किसी उम्मीद के हर दिन देती हैं।’
मिलिंद दास्ताने - ‘मां की मौजूदगी हमेशा सुकून का एहसास देती है’
‘मां हर परिवार की भावनात्मक ताकत होती है और मुझे लगता है कि यह रिश्ता लोगों के दिल से बहुत गहराई से जुड़ता है। चाहे हम कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं, मां की मौजूदगी हमेशा सुकून और सुरक्षा का एहसास देती है। मुझे लगता है कि मां अपने बच्चों और परिवार के लिए चुपचाप बहुत कुछ त्याग करती हैं, बिना किसी उम्मीद के। मदर्स डे हमें रुककर उनकी मोहब्बत, देखभाल और ताकत के लिए शुक्रिया अदा करने का सही मौका देता है, जो वो हर दिन हमारी जिंदगी में लाती हैं।’
दीक्षा जोशी - ‘वह आज भी मेरी सबसे सुरक्षित जगह हैं’
‘बचपन से ही मेरी मां मेरी सबसे बड़ी हौसला बढ़ाने वाली और सबसे सुरक्षित जगह रही हैं। मुझे आज भी याद है कि वह मेरी छोटी-छोटी उपलब्धियों को भी ऐसे सेलिब्रेट करती थीं, जैसे वह बहुत बड़ी बात हो। उन्होंने मुझे सिखाया कि जिंदगी को हमेशा धैर्य और दयालुता के साथ जीना चाहिए। जब भी जिंदगी मुश्किल लगती है, मैं सबसे पहले उन्हीं के पास जाती हूं और उनकी बातें सब कुछ हल्का कर देती हैं। सच कहूं तो वह हर उस चीज की भावनात्मक ताकत हैं, जो मैं आज करती हूं।’
नितिन बाबू - ‘उनका भरोसा आज भी मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता है’
‘मेरी मां ने हमेशा मुझे अपनी राह चुनने के लिए प्रेरित किया। घर से दूर जाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी मुझे अकेला महसूस नहीं होने दिया। वह हमेशा कहती थीं कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, खुद के प्रति सच्चे रहो। यही सीख मुझे निजी जिंदगी और करियर दोनों में मदद करती है। आज भी उनका भरोसा मुझे हर दिन बेहतर करने और आगे बढ़ने की ताकत देता है।’
ऋषि सक्सेना - ‘मां हर मुश्किल में चुपचाप सब संभाल लेती हैं’
‘मदर्स डे मुझे मां की उस खामोश ताकत की याद दिलाता है, जिसे वह हर दिन अपने भीतर लेकर चलती हैं। हाल ही में मुझे बचपन की एक पुरानी तस्वीर मिली, जिसने उनकी कुर्बानियों और साथ की कई यादें ताजा कर दीं। वह हमेशा पर्दे के पीछे रहकर सब कुछ संभालती रहीं। उन्होंने मुझे सबसे बड़ी सीख दी कि हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, कभी हार नहीं माननी चाहिए। उनकी ताकत ही मेरी जिंदगी की सबसे मजबूत नींव है और मैं उनके होने के लिए हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा।’