Pati Patni Aur Woh Do Review: गलतफहमियों के पुराने फॉर्मूले में फंसी आयुष्मान की फिल्म, फीकी पड़ी कॉमेडी
Pati Patni Aur Woh Do Movie Review: आयुष्मान खुराना एक और कॉमेडी फिल्म लेकर आए हैं। इस बार उनके साथ एक-दो नहीं बल्कि तीन हीरोइनें हैं। फिल्म देखने से पहले पढ़िए ये रिव्यू और जानिए कैसी है फिल्म…
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विस्तार
कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिन्हें देखने के बाद यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि सामने वाले को ऐसा क्या कह दें कि वह वो गलती ना करें जो हमने इसे देखकर कर दी है। आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह अभिनीत इस फिल्म के लेवल ट्रेलर देखकर की समझ आ गया था।
दरअसल, बॉलीवुड में शादीशुदा आदमी के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और फिर उसके बाद पनपने वाली गलतफहमियों पर कॉमेडी फिल्में बनाना सबसे आसान काम है। बस एक पुरानी दोस्त वापस ले आइए, पत्नी को शक करा दीजिए और बीच-बीच में देसी एक्सेंट में कुछ डायलॉग बुलवा दीजिए।
‘पति पत्नी और वो 2’ भी बिल्कुल इसी बासे फॉर्मूले पर चलती है। फर्क सिर्फ इतना है कि फिल्म खुद को जितना मजेदार समझती है, उतनी है नहीं। जानिए कैसी है फिल्म?
कहानी
फिल्म की कहानी प्रयागराज के फॉरेस्ट ऑफिसर प्रजापति पांडे (आयुष्मान खुराना) की है, जिनकी शादी टीवी रिपोर्टर अपर्णा (वामिका गब्बी) से हुई है। अपर्णा की दोस्त नीलोफर (रकुल प्रीत सिंह) प्रजापति के साथ वन विभाग में काम करती है।
मामला तब उलझता है, जब प्रजापति की कॉलेज फ्रेंड चंचल (सारा अली खान) अचानक वापस उनकी जिंदगी में लौटती है। चंचल अपने बॉयफ्रेंड से शादी करना चाहती है और इसी सिलसिले में वह प्रजापति की मदद लेती है।
इसके बाद फिल्म पूरी तरह गलतफहमियों के भरोसे चलती है। कोई आधी बात सुन लेता है, कोई गलत जगह पहुंच जाता है और फिर वही पुराना ‘तुम जैसा सोच रही हो वैसा कुछ नहीं है’ वाला ट्रैक शुरू हो जाता है।
दिक्कत यह नहीं कि कहानी सिंपल है, दिक्कत यह है कि फिल्म के पास इस सिंपल कहानी को इंटरेस्टिंग बनाने के लिए नया कुछ है ही नहीं। इंटरवल तक आते-आते अंदाजा लग जाता है कि आगे कौन किस पर शक करने वाला है।
निर्देशक मुदस्सर अजीज ने छोटे शहर वाली रिलेशनशिप कॉमेडी बनाने की कोशिश की है, लेकिन फिल्म कई जगह व्हाट्सऐप फॉरवर्ड वाली कॉमेडी और टीवी सीरियल वाले कन्फ्यूजन के बीच झूलती रहती है।
एक्टिंग
आयुष्मान खुराना पूरी फिल्म में वही फैमिलियर एक्सप्रेशंस देते नजर आते हैं, जिन्हें वह पिछले कई साल से अलग-अलग फिल्मों में दोहराते आ रहे हैं। कहीं ‘ड्रीम गर्ल’ वाला ऑक्वर्ड अंदाज दिखता है, कहीं ‘बाला’ वाला बेचारा आदमी और कहीं ‘शुभ मंगल सावधान’ वाला नर्वस पति। उनकी कॉमिक टाइमिंग अब भी ठीक है, लेकिन स्क्रीनप्ले इतना रिपिटेटिव है कि कई सीन में उनका अभिनय भी ऑटो मोड पर चलता महसूस होता है।
वामिका गब्बी फिल्म की सबसे ईमानदार परफॉर्मर हैं। कम से कम उनके सीन में थोड़ी गंभीरता नजर आती है।
सारा अली खान तो पूरी फिल्म में इतनी ज्यादा एनर्जी लेकर चलती हैं कि लगभग हर सीन में उनकी एक्टिंग ओवरएक्टिंग बन जाती है। उनकी डायलॉग डिलीवरी और एक्सप्रेशंस कई सीन में ऐसे लगते हैं जैसे हर मोमेंट को वायरल रील बनाना हो।
रकुल प्रीत सिंह का किरदार कहानी में मौजूद जरूर है, लेकिन स्क्रीनप्ले उन्हें बस सिचुएशन समझाने और शक बढ़ाने तक सीमित रखता है। बाकी एक्टिंग तो उनकी भी माशाअल्लाह ही है।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
मुदस्सर अजीज फिल्म को देसी फ्लेवर देने के चक्कर में कई बार जरूरत से ज्यादा जोर लगाते नजर आते हैं। यूपी एक्सेंट और लोकल स्लैंग का इस्तेमाल इतना ज्यादा है कि कई जगह किरदार इंसान कम, कैरिकेचर ज्यादा लगने लगते हैं।
फिल्म का स्क्रीनप्ले इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। पूरी फिल्म में एक ही चीज दोहराई जाती रहती है- गलतफहमी। हर दूसरे आदमी को सफाई दो, फिर नया शक पैदा करो और फिर वही साइकिल दोबारा शुरू। कई सीन ऐसे हैं जहां कॉमेडी नेचुरली पैदा होने के बजाय जबरदस्ती ठूंसी हुई लगती है। फिल्म लगातार एंटरटेनिंग बनने की कोशिश करती है, लेकिन कई बार सिर्फ शोर पैदा करती है।
देखें या नहीं
अगर आप आयुष्मान खुराना के बहुत बड़े फैन हैं और बिना ज्यादा उम्मीद के हल्की-फुल्की फिल्म देखना चाहते हैं, तो शायद फिल्म एक बार झेली जा सकती है। लेकिन अगर आप फ्रेश कॉमेडी या स्मार्ट राइटिंग की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो मामला मुश्किल हो जाएगा।
‘पति पत्नी और वो 2’ एक ऐसी फिल्म है जो बार-बार हंसाने की कोशिश करती है, लेकिन ज्यादातर समय वही पुराने बॉलीवुड कन्फ्यूजन को नई पैकिंग में बेचती नजर आती है।