Aakhri Sawal Review: इतिहास के बंद पन्ने खोलती है फिल्म’, संजय दत्त से ज्यादा नमाशी चक्रवर्ती ने छोड़ा असर
Movie Aakhri Sawal Review: संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘आखिरी सवाल’ ने आज सिनेमाघरों में दस्तक दी है। जानिए, कैसी है ये फिल्म? पढ़िए फिल्म ‘आखिरी सवाल’ का रिव्यू।
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विस्तार
राजनीतिक गलियारों से लेकर यूनिवर्सिटी कैंपस तक उनके बारे में सवाल किए जाते हैं। तमाम आरोप लगाते जाते हैं। इतिहास के पन्नों में उनसे जुड़े कई विवाद भी लिखे गए हैं। भारत की आजादी के सफर में वो एक संस्था हमेशा सुर्खियों का हिस्सा रही। लेकिन कभी खुद पर लगे आरोपों और सवालों का जवाब उस संस्था ने नहीं दिया। हम जिस संस्था का जिक्र कर रहे हैं, वो कोई और नहीं आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है। फिल्म ‘आखिरी सवाल’ संघ की अनकही हकीकत को बयां करने की कोशिश करती है। जानिए, क्या यह फिल्म अपनी कहानी और अभिनय से प्रभावित करती है?
पांच सवालों के साथ शुरू होती है कहानी
फिल्म ‘आखिरी सवाल’ की शुरुआत प्रो. गोपाल नाडकर्णी (संजय दत्त) और उनके स्टूडेंट विक्की हेगड़े (नमाशी चक्रवर्ती) की बीच एक तकरार से शुरू होती है। इस तकरार की वजह आरआरएस यानी संघ है। विक्की ने संघ को देशद्रोही घोषित करते हुए शोध किया है, जिसे प्रो. गोपाल नाडकर्णी नकार देते हैं। इस बात पर विक्की आक्रोश में आकर प्रोफेसर गोपाल पर सवाल उठाता है और संघ पर आरोप लगाता है तो उसे बदले में थप्पड़ मिलता है। विक्की के गालों पर पड़ा थप्पड़ स्टूडेंट्स के बीच गुस्सा पैदा कर देता है। प्रोफेसर के खिलाफ विरोध के स्वर उठते हैं, प्रदर्शन होते हैं। फिर अचानक कहानी में एक बड़ा मोड़ आता है, विक्की संघ के बारे में प्रो. नाडकर्णी से पांच सवाल पूछने की बात कहता है। यह कोई मामूली सवाल नहीं है, इन सवालों के जरिए संघ के इतिहास के बंद पन्ने खुलते हैं। महात्मा गांधी की हत्या, बाबरी विध्वंस और संस्था पर बैन लगने से लेकर तमाम मुद्दों पर चर्चा होती है। शुरुआती दो सवाल विक्की, प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी से कॉलेज कैंपस में पूछता है। बाकी के तीन सवाल टीवी डिबेट में लाइव टेलीकास्ट में पूछे जाते हैं। इन सवालों के जो जवाब प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी देते हैं, वो दर्शकों को चौंकाते हैं और इतिहास के एक अनकहे सच से रूबरू करवाते हैं।
किरदारों में उतरने की कोशिश करते दिखे कलाकार
फिल्म में संजय दत्त प्रो. गोपाल नाडकर्णी के किरदार में फिल्म के शुरुआत में रमते हुए नजर आते हैं। लेकिन कई दृश्यों में किरदार से ज्यादा उन पर अपनी यानी संजय की पर्सनालिटी हावी होने लगती है। वह गुस्से वाले दृश्यों में जरूरत से ज्यादा चीखते-चिल्लाते हुए नजर आते हैं। लेकिन स्टूडेंट विक्की हेगड़े के रोल में नमाशी चक्रवर्ती (मिथुन चक्रवर्ती के छोटे बेटे) जरूर असर छोड़ते हैं, उनका अभिनय सधा हुआ लगता है। सहायक कलाकारों के तौर पर अमित साध, नीतू चंद्रा जितनी देर भी स्क्रीन पर नजर आए, ठीक-ठाक ही लगे। वहीं समीरा रेड्डी का किरदार काफी हटकर रहा, इसके नेगेटिव शेड्स को उन्होंने पर्दे पर बखूबी उतारा है।
निर्देशक से कहां हुई चूक
‘आखिरी सवाल’ को एक फिल्म के तौर पर बनाया गया लेकिन यह हर दर्शक वर्ग के लिए नहीं है। साथ ही ‘धुरंधर’ जैसी फिल्म देखने के बाद दर्शकों को यह उम्मीद रहने लगी है कि राजनीतिक परिदृश्य के ईद-गिर्द बुनी गई कहानियों में मनोरंजन भी भरपूर हो, जिसकी कमी ‘आखिरी सवाल’ में खलती है। किरदारों का विकास ठीक से नहीं हो पाता है, इतिहास के गंभीर मुद्दों पर चर्चा और तर्क प्रभावित नहीं करते हैं। हां, फिल्म का अंत जरूर चौंकाता है। क्योंकि यहां सवाल करने वाला शख्स ही, आपके सामने एक बड़ा सवाल छोड़ जाता है।
फिल्म की सबसे बड़ी कमी क्या रही?
‘आखिरी सवाल’ ने एक ऐसे मुद्दे पर फिल्म बनाने की हिम्मत की है, जो फिर से पुराने विवादों को जन्म दे सकता है। फिल्म देखने के बाद वैचारिक स्तर पर दर्शक बंट सकते हैं। यह मौका दर्शकों को फिल्म की कहानी ही देती है। यह ज्वलंत और विवादित मुद्दों पर स्तही स्तर पर बात करती है, गहराई में नहीं उतरती है। आखिर तक आते-आते यह फिल्म एक डॉक्यूमेंट्री में बदलती हुई नजर आती है। जो थिएटर से बाहर आने के बाद भी ज्यादा देर तक याद नहीं रहती है।
संगीत ने नहीं निभाई कोई खास भूमिका
इस फिल्म का संगीत मोंटी शर्मा ने तैयार किया है और गीत कुमार विश्वास ने लिखे हैं। लेकिन फिल्म की कहानी को इसके गीत और संगीत कोई ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा पाए। कई दृश्यों में तो बैकग्राउंड म्यूजिक जरूरत से ज्यादा महसूस हुआ।
देखें या ना देखें
आप एक आम दर्शक की तरह अपना वीकएंड मनोरंजन से भरपूर चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। लेकिन आपकी रुचि देश के इतिहास, राजनीति में हैं। आप किसी विचारधारा विशेष से जुड़े हैं तो ‘आखिरी सवाल’ के जरिए कई मुद्दों के बारे में जान सकते हैं, एक अलग नजरिया इनके बारे में देख और समझ सकते हैं। यदि आप ऐसे शख्स हैं तो संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’ एक बार जरूर देखी जा सकती है। अगर थोड़ा इंतजार करें तो इसे ओटीटी पर भी देख सकते हैं।