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Lukkhe Review: नशे की गोलियों से डार्क वर्ल्ड की गलियों तक, सच दिखाती है 'लुक्खे'; सब अच्छा पर रह गई यह कमी
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सार
Lukkhe Webseries Review: वेबसीरीज 'लुक्खे' 8 मई को रिलीज हो चुकी है। ड्रग, प्यार, बदले और सपनों में उलझी यह सीरीज कैसी है? पढ़ें इसका रिव्यू...
वेब सीरीज 'लुक्खे'
- फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
लुक्खे
कलाकार
लक्ष्यवीर सरन
,
पलक तिवारी
,
राशी खन्ना
,
शिवांकित सिंह
,
किंग
,
आयशा रजा मिश्रा
,
योगराज सिंह
,
कृतिका भारद्वाज
,
नकुल रोशन सचदेव
और
निहाल
लेखक
अग्रिम जोशी
और
देबोजीत दास
निर्देशक
हिमांक गौर
निर्माता
विपुल शाह
और
राजेश बहल
रिलीज डेट
8 मई 2026
रेटिंग
3.5/5
विस्तार
एक तरफ पंजाब में बढ़ता हुआ नशे का कारोबार और दूसरी तरफ एक मासूम लड़के की कहानी। ओटीटी पर रिलीज हुई नई वेब सीरीज 'लुक्खे' कुछ इस तरह से गुथी हुई है कि आप एक मिनिट के लिए भी कहीं बोर नहीं होते। इस पूरी कहानी को म्यूजिकल बैकग्राउंड के साथ पेश किया गया है। मगर कुछ एपिसोड गुजर जाने के बाद यह सीरीज आपको कहीं भटकी हुई लगने लगती है।
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वेब सीरीज 'लुक्खे'
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या है कहानी?
कहानी पंजाब के खूबसूरत शहर चंडीगढ़ की है जहां एक लड़का लक्की (लक्ष्यवीर सरन) अपने ड्रग एडिक्शन की वजह वो अपने दोस्त को खो देता है। इसके बाद वो सजा के तौर पर एक ड्रग रिहेब में पहुंचता है।
दूसरी तरफ है एमसी बदनाम (शिवांकित सिंह) जो कि एक रैपर है और साथ ही ड्रग बनाने और का अवैध धंधा भी करता है। इस काम में उसका साथ देते है उसका भाई जैज (नकुल रोशन सचदेव) और गर्लफ्रेंड पैडी (कृतिका भारद्वाज)।
उसकी एक बहन भी है सनोबर (पलक तिवारी)। रिहेब में सनोबर लक्की से मिलती है। दोनों प्यार में पड़ जाते हैं जिसके बाद लक्की सनोबर की फैमिली के करीब हो जाता है।
इसी बीच एंट्री होती है पुलिस ऑफिसर गुरबानी कौर (राशि खन्ना) की जो लक्की को ब्लैकमेल करती है। वो ड्रग के पूरे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए काम करती है और इसमें लक्की उसकी मदद करता है। क्या लक्की गुरबानी से खुद को बचा पाएगा? इन सबके बीच वो अपना और सनोबर का रिश्ता कैसे बचाएगा? ऐसे कई सवालों का जवाब जानने के लिए आपको यह वेब सीरीज देखनी होगी।
कहानी पंजाब के खूबसूरत शहर चंडीगढ़ की है जहां एक लड़का लक्की (लक्ष्यवीर सरन) अपने ड्रग एडिक्शन की वजह वो अपने दोस्त को खो देता है। इसके बाद वो सजा के तौर पर एक ड्रग रिहेब में पहुंचता है।
दूसरी तरफ है एमसी बदनाम (शिवांकित सिंह) जो कि एक रैपर है और साथ ही ड्रग बनाने और का अवैध धंधा भी करता है। इस काम में उसका साथ देते है उसका भाई जैज (नकुल रोशन सचदेव) और गर्लफ्रेंड पैडी (कृतिका भारद्वाज)।
उसकी एक बहन भी है सनोबर (पलक तिवारी)। रिहेब में सनोबर लक्की से मिलती है। दोनों प्यार में पड़ जाते हैं जिसके बाद लक्की सनोबर की फैमिली के करीब हो जाता है।
इसी बीच एंट्री होती है पुलिस ऑफिसर गुरबानी कौर (राशि खन्ना) की जो लक्की को ब्लैकमेल करती है। वो ड्रग के पूरे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए काम करती है और इसमें लक्की उसकी मदद करता है। क्या लक्की गुरबानी से खुद को बचा पाएगा? इन सबके बीच वो अपना और सनोबर का रिश्ता कैसे बचाएगा? ऐसे कई सवालों का जवाब जानने के लिए आपको यह वेब सीरीज देखनी होगी।
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वेब सीरीज 'लुक्खे'
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या है 'लुक्खे' में खास?
'लुक्खे' को एक बेहतरीन कहानी के तौर पर लिखा गया है। इसके साथ ही सीरीज का निर्देशन भी अच्छी तरह किया गया है। हर सीन एक-दूसरे से कनेक्ट करता है। पंजाब सिर्फ नाम के लिए ही नहीं दिखाया गया। हर डॉयलाग में आपको पंजाब की झलक मिलती है। पूरी सीरीज में पंजाबी बोलते हुए कलाकार बिल्कुल भी बनावटी नहीं लगते। यह सीरीज मिलेनियल और जेन -जी दोनों जेनेरेशन को पकड़ कर रखती है। यह शुरुआत से ही आपको बांध कर रखती है। म्यूजिक में रैप स्पेस को भी काफी अच्छी तरह से पेश किया गया है। जब आप सीरीज देखते हैं तो बीच में आते रैप रुकावट नहीं डालते, बल्कि एक तरह से कहानी में और रोमांच पैदा कर देते हैं।
'लुक्खे' को एक बेहतरीन कहानी के तौर पर लिखा गया है। इसके साथ ही सीरीज का निर्देशन भी अच्छी तरह किया गया है। हर सीन एक-दूसरे से कनेक्ट करता है। पंजाब सिर्फ नाम के लिए ही नहीं दिखाया गया। हर डॉयलाग में आपको पंजाब की झलक मिलती है। पूरी सीरीज में पंजाबी बोलते हुए कलाकार बिल्कुल भी बनावटी नहीं लगते। यह सीरीज मिलेनियल और जेन -जी दोनों जेनेरेशन को पकड़ कर रखती है। यह शुरुआत से ही आपको बांध कर रखती है। म्यूजिक में रैप स्पेस को भी काफी अच्छी तरह से पेश किया गया है। जब आप सीरीज देखते हैं तो बीच में आते रैप रुकावट नहीं डालते, बल्कि एक तरह से कहानी में और रोमांच पैदा कर देते हैं।
वेब सीरीज 'लुक्खे'
- फोटो : सोशल मीडिया
कैसा रहा पलक तिवारी का अभिनय?
सीरीज की कास्टिंग अच्छी है और सभी कलाकारों की एक्टिंग भी शानदार है। लक्ष्यवीर सरन अपने रोल लक्की में काफी फिट बैठे हैं। कहीं-कहीं राशी खन्ना आपको ओवर एक्टिंग करती नजर आ सकती हैं। मगर बाकी में वो अपने रोल में ठीक-ठाक लगीं। एक्टिंग में बाकी सब बढ़िया हैं पर श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी को अभी और सीखने की जरूरत है। ना तो उनका रोमांस समझ आता है और ना ही इमोशंस।
हालांकि, सीरीज में उनका किरदार भी अपरिपक्व दिखाया गया है। मगर पलक तिवारी उन उम्मीदों को पूरा नहीं करतीं जो अपने सोचा होगा। इसके उलट शिवांकित सिंह ओजी के किरदार में पूरी विलेन वाली फील देते हैं। निहार का बदला, गुस्सा और क्राइम तीनों ही इस सीरीज की मजबूत कड़ी हैं।
सीरीज की कास्टिंग अच्छी है और सभी कलाकारों की एक्टिंग भी शानदार है। लक्ष्यवीर सरन अपने रोल लक्की में काफी फिट बैठे हैं। कहीं-कहीं राशी खन्ना आपको ओवर एक्टिंग करती नजर आ सकती हैं। मगर बाकी में वो अपने रोल में ठीक-ठाक लगीं। एक्टिंग में बाकी सब बढ़िया हैं पर श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी को अभी और सीखने की जरूरत है। ना तो उनका रोमांस समझ आता है और ना ही इमोशंस।
हालांकि, सीरीज में उनका किरदार भी अपरिपक्व दिखाया गया है। मगर पलक तिवारी उन उम्मीदों को पूरा नहीं करतीं जो अपने सोचा होगा। इसके उलट शिवांकित सिंह ओजी के किरदार में पूरी विलेन वाली फील देते हैं। निहार का बदला, गुस्सा और क्राइम तीनों ही इस सीरीज की मजबूत कड़ी हैं।
वेब सीरीज 'लुक्खे'
- फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशन और स्क्रिप्ट रह गई कमजोर
सीरीज का निर्देशन हिमांक गौर ने किया है। साथ ही इसकी स्क्रिप्ट अग्रिम जोशी और देबोजीत दास ने लिखी है। निर्देशन कहीं-कहीं आपको कमजोर पड़ता लग सकता है। कुछ जगह ड्रामा थोड़ा ज्यादा कहानी थोड़ा कम वाला मामला भी है। कुछ सीन में आपको लगता है कि आप हंसने वाले हैं मगर फिर वो सीन न ही कॉमेडी निकलता है न सस्पेंस।
आपको लगता है कि आप पूरी तरह ड्रग से जुड़े क्राइम, इस्केप देखेंगे। मगर साइकोलॉजिकल रंग बीच में होने से न सीरीज में क्राइम दिखता है, न सस्पेंस और न ही यह फीलिंग्स से जुड़ पाती है। हालांकि, इसके बाद भी सीरीज मनोरंजक है और इसे एक बार देखा जा सकता है।
सीरीज का निर्देशन हिमांक गौर ने किया है। साथ ही इसकी स्क्रिप्ट अग्रिम जोशी और देबोजीत दास ने लिखी है। निर्देशन कहीं-कहीं आपको कमजोर पड़ता लग सकता है। कुछ जगह ड्रामा थोड़ा ज्यादा कहानी थोड़ा कम वाला मामला भी है। कुछ सीन में आपको लगता है कि आप हंसने वाले हैं मगर फिर वो सीन न ही कॉमेडी निकलता है न सस्पेंस।
आपको लगता है कि आप पूरी तरह ड्रग से जुड़े क्राइम, इस्केप देखेंगे। मगर साइकोलॉजिकल रंग बीच में होने से न सीरीज में क्राइम दिखता है, न सस्पेंस और न ही यह फीलिंग्स से जुड़ पाती है। हालांकि, इसके बाद भी सीरीज मनोरंजक है और इसे एक बार देखा जा सकता है।
देखें या नहीं?
अगर रोमांच और हार्डकोर वेब सीरीज के फैन हैं तो 'लुक्खे' आपके लिए है। इसमें रोमांच,थ्रिल और कुछ टर्न भी हैं। अगर इस वीकेंड फिल्म देखने का मन नहीं पर दोस्तों के साथ एंजॉय करने का मन है तो यह काफी अच्छा ऑप्शन है।
अगर रोमांच और हार्डकोर वेब सीरीज के फैन हैं तो 'लुक्खे' आपके लिए है। इसमें रोमांच,थ्रिल और कुछ टर्न भी हैं। अगर इस वीकेंड फिल्म देखने का मन नहीं पर दोस्तों के साथ एंजॉय करने का मन है तो यह काफी अच्छा ऑप्शन है।