Raja Shivaji Movie Review: सबकुछ होने के बाद भी कुछ रहा अधूरा, कैसी है रितेश देशमुख की ‘राजा शिवाजी’?
Raja Shivaji Movie Review: रितेश देशमुख के निर्देशन में बनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। कैसी है यह फिल्म? आइये जान लेते हैं…
विस्तार
एक ही फिल्म में रितेश देशमुख, संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, जेनेलिया देशमुख, फरदीन खान, विद्या बालन, सचिन खेड़ेकर, महेश मांजरेकर और भाग्यश्री जैसे बड़े-बड़े कलाकार। ऊपर से सुपरस्टार सलमान खान का कैमियो भी। मराठी भाषा में वीर छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठाओं की वीर गाथा बयां करती एक फिल्म, जिसका निर्देशन भी एक मराठी ने ही किया है। अजय-अतुल का म्यूजिक और 100 करोड़ के बजट में बनी सबसे महंगी मराठी फिल्म। एक नहीं.. ऐसी कई वजहें हैं जो आपसे कहेंगी कि इस फिल्म को आपको थिएटर में जाकर देखना चाहिए…पर इतना सब होने के बावजूद भी फिल्म में कुछ खालीपन सा है। क्या है वो? आइये जानते हैं..
कहानी
फिल्म की कहानी मराठियों के लिए तो सुनी-सुनाई है लेकिन अगर आप हिंदी भाषी हैं तो यह आपको इतिहास को और बेहतर समझने में मदद करेगी। इसके लिए राइटर्स ने गहरी रिसर्च की है और यह छत्रपति शिवाजी महाराजा (रितेश देशमुख) के जन्म से शुरू होकर अफजल खान (संजय दत्त) की मौत तक जाती है। सभी किरदारों को अच्छे से प्रेजेंट भी किया गया है।
अभिनय
रितेश देशमुख के लिए ये किरदार निभाना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी और इसके साथ ही उन्होंने निर्देशन की भी कमान संभाली। रितेश ने दोनों ही फील्ड में अपना बेस्ट दिया। फिल्म में वो दमदार भी लगे हैं पर वो उस बेंचमार्क को नहीं छू पाते जो शरद केलकर ने 'हर हर महादेव' और 'तान्हाजी', अजय देवगन ने 'तान्हाजी', रणवीर सिंह ने 'बाजीराव मस्तानी' और विक्की कौशल ने 'छावा' में सेट कर दिया है। वजह एक यह भी है कि रितेश को हमने इतने मजाकिया किरदारों में देखा है कि छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में उनको स्वीकार करने में समय लगता है। फिर भी इसे उनके करियर का बेस्ट तो कह ही सकते हैं।
सलमान खान का कैमियो सीटियां जरूर बटोरता है पर उनसे कुछ करवाया नहीं जाता। एक आध एक्शन सीन उनका भी दिखा देते तो मजा ही आ जाता। संजय दत्त को आप ऐसे किरदार में पहले भी देख चुके हैं उन्होंने कुछ बहुत खास काम नहीं किया। हालांकि, उनका यह रोल ‘पानीपत’ वाले रोल से काफी बेहतर है।
अभिषेक बच्चन की एक्टिंग अच्छी है। लंबे समय बाद उन्हें सही किरदार मिला है। फरदीन खान, विद्या बालन और भाग्यश्री ने अपने किरदार को बढ़िया निभाया। जेनेलिया देशमुख ने खुद को गंभीर रखने की बहुत कोशिश की। वो खूबसूरत दिखीं पर कुछ जगह ओवरएक्टिंग करती भी नजर आईं। बाकी सभी कलाकारों ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है।
निर्देशन
रितेश ने इसे अब तक की सबसे महंगी मराठी फिल्म बनाते हुए इस पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए हैं पर हैरानी है कि इसके बावजूद फिल्म के वीएफएक्स कई जगह कमजोर हैं। फिल्म के फर्स्ट हाफ पर जितनी मेहनत की गई है, किरदारों को स्पेस देकर अच्छे से समझाया गया है। सेकंड हाफ में यह उतनी ही तेजी से खत्म हो जाती है। रितेश, कुछ और अच्छे फैसले लेते तो यह फिल्म बहुत यादगार बन सकती थी।
म्यूजिक
अजय-अतुल का म्यूजिक आपको कभी निराश नहीं करता। यहां भी म्यूजिक आपको हर सीन महसूस करने में मदद करता है और फिल्म में बांधे रखता है।
देखें या नहीं
थिएटर में जाकर एक बार जरूर देखना चाहिए। फिल्म से आपको काफी कुछ नया जानने को मिलेगा। कुछ बातें छोड़ देंगे तो यह आपको अच्छा एक्सपीरियंस देगी पर ऐसी फिल्में देखते वक्त आप बेहतर की उम्मीद करते हैं।
