Krishnavataram Review: दिल छू जाएगी यह फिल्म, सिद्धार्थ ने गढ़ी श्रीकृष्ण की नई परिभाषा; ढाई घंटे लगेंगे कम
Krishnaavtaram Movie Review in Hindi: श्रीकृष्ण के प्रेम और समर्पण को दर्शाती फिल्म ‘कृष्णावतारम पार्ट 1: हृदयम’ थिएटर्स में रिलीज हो चुकी है। यहां जानिए कैसी है यह फिल्म..
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विस्तार
श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करती अब तक कई फिल्में आपने देखी होंगी पर इन दिनों थिएटर में जो ‘कृष्णावतारम पार्ट 1: हृदयम’ रिलीज हुई है इसे मिस मत करिएगा। ऐसी फिल्में देखने जाने से पहले मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि इसमें नया क्या होगा? पर मेरी मानिए बिना कुछ सोचे जाइये और यह फिल्म देख आइये। ये आपके बरसों पुरानी वही कहानी एक ऐसे कमाल के अंदाज में दिखाएगी कि आप खो जाएंगे और द्वापर युग में जाकर भगवान श्री कृष्ण को महसूस करने लगेंगे। तीन भागों में बनी इस फिल्म का पहला पार्ट कृष्ण की प्रेम कहानी और उनके समर्पण पर आधारित है।
कहानी
यह फिल्म शुरू होती है भालका तीर्थ से। यह वहीं जगह है जहां श्रीकृष्ण ने अपने प्राण त्यागे थे। आगे बताया जाता है कि जगन्नाथ पुरी मंदिर में जो कृष्ण की मूर्ति में उसमें आज भी उनका दिल धड़कता है। जब स्वामी (जैकी श्रॉफ) श्रीकृष्ण की कथा सुनाते हैं तो विज्ञान और आस्था के बीच बहस शुरू होती है। इसके बाद कहानी द्वापर युग में जाती है, जहां श्रीकृष्ण (सिद्धार्थ गुप्ता) का जन्म, गोकुल से वृंदावन जाना, द्वारकाधीश बनना, राधा (सुष्मिता भट्ट) से मिलना और रुक्मिणी (निवासिनी कृष्णन) व सत्यभामा (संस्कृति जयना) से विवाह करने तक की कहानी दिखाई जाती है। यह फिल्म महाभारत की शुरुआत पर खत्म होती है पर अभी इसे दो पार्ट और आना बाकी हैं, जिनमें आगे की कहानी दिखाई जाएगी।
अभिनय
फिल्म की सबसे अच्छी बात यही है कि इसके मुख्य कलाकार नए और फ्रेश हैं। यहां मेकर्स ने किसी ए लिस्टर को लेकर कोई एक्सपेरिमेंट नहीं किया। कृष्ण के किरदार में सिद्धार्थ गुप्ता बखूबी जमे हैं। उनके चेहरे पर मासूमियत और डायलॉग डिलिवरी में ठहराव है। बस कुछ दृश्य में उनकी विग साथ नहीं देती पर इसे इग्नोर कर सकते है। कमाल ही बात यह है कि वो जिस खूबसूरती से प्रेम दर्शाते हैं, उनके चेहरे पर क्रोध की भावना भी उतना ही जमती है।
दूसरी तरफ राधा के किरदार में सुष्मिता भट्ट हर फ्रेम में कमाल लगी हैं। वो इस किरदार में पूरी तरह फिट हैं। ऐसा लगा जैसे उन्होंने राधा के किरदार को आत्मसाध कर लिया हो। वहीं रुक्मिणि के किरदार में निवासिनी कृष्णन और सत्यभामा के किरदार में संस्कृति जयना ने भी कमाल अभिनय किया है। इन चारों कलाकारों ने इन लीड़ किरदारों की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
बाकी फिल्म में जैकी श्रॉफ, अमनजोत सिंह, दीपक डोबरियाल, गोविंद नामदेव, जरीना वहाब, कुमुद मिश्रा और आशुतोष राणा समेत कई बड़े कलाकार अपने छोटे छोटे किरदरों में छाप छोड़ जाते हैं।
निर्देशन
इस फिल्म के निर्देशक हार्दिक गज्जर इससे पहले टीवी शो ‘देवों के देव- महादेव’ का भी निर्देशन कर चुके हैं। वह शो भी अपने आप में कल्ट था। इसके अलावा हार्दिक, नीना गुप्ता को लेकर 'अचारी बा' जैसी फिल्में बना चुके हैं। वो फिल्में छोटे बजट की थीं पर बड़ी खूबसूरती से पेश की गई थीं। यहां हार्दिक का बजट बड़ा है और स्केल भी पर इस फिल्म को भी उन्होंने खूबसूरती से संभाला। प्रकाश कपाड़िया और राम मोरी के साथ मिलकर उन्होंने जो इसकी कहानी लिखी है वो बयां करने का तरीका कुछ अलग ही है।
फिल्म की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसका वीएफएक्स कहीं भी ओवर नहीं होता। द्वारका हो या वृंदावन असली सा लगता है। भव्य सेट और भव्य गाने, फिल्म के विजुअल्स देखकर आपकी आंखे खुली ही रह जाती है। फिल्म में रंगों की कोई कमी नहीं है। पूरे ढाई घंटे तक स्क्रीन किसी कैनवास की तरह नजर आती है।
कई सीन ऐसे हैं कि रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इनमें से एक है जब श्रीकृष्ण, द्रौपदी को उनके मांगे हुए वरदान पर 'तथास्तु' कहते हैं। वहीं कई दृश्य ऐसे हैं कि लगता ही नहीं आप फिल्म देख रहे हैं। बाकी हर चीज में हार्दिक ने सटीक काम किया है। किसी भी तरह से फिल्म को भटकने नहीं दिया।
क्या कमी?
कहीं कहीं फिल्म की गति थोड़ी धीमी है। खास तौर पर गाने कुछ ज्यादा और लंबे हैं। इन्हें एडिट किया जा सकता था। हालांकि, यह कमी इसके अगले दो भागों में नहीं होगी क्योंकि वो महाभारत और उसके बाद के दौर पर केंद्रित होंगे। फिल्म में ग्राफिक्स के जरिए कृष्ण का बचपन और बाल लीलाओं को दिखाया गया। यह काम तो करता है पर तीन भागाें में बनने वाली फिल्म में इसे और बेहतर दिखा सकते थे।
संगीत
फिल्म में कई गाने हैं। ये सभी गाने इरशाद कामिल ने लिखे हैं। श्रेया घोषाल और सोनू निगम की आवाज में ये कानों में मिश्री सी घोल जाते हैं। ज्यादातर कान्हा की प्रेमलीला का वर्णन करते हैं। ये सभी सुनने में अच्छे लगते हैं पर कुछ एक जगह फिल्म की गति को धीमा करते हैं।
देखें या नहीं
फिल्म के इस भाग में कृष्ण के प्रेम का जिक्र ज्यादा है। अगर आप प्रेम नहीं समझते तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। बाकी भव्यता का आनंद लेना हो तो इसे थिएटर में ही पूरे परिवार के साथ जरूर देखें। इसे देखकर आपको पुराणों और आस्था से जुड़े कई सवलों के जवाब जरूर मिलेंगे।