बॉलीवुड अभिनेता पुलकित सम्राट हाल ही में एक्शन-स्पोर्ट ड्रामा सीरीज ‘ग्लोरी’ में नजर आए हैं। इस सीरीज में पुलकित बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए हैं। उन्होंने बॉक्सर की भूमिका निभाई है, जिसके लिए पुलकित ने खुद को फिजिकल और मेंटल तौर पर काफी तैयार किया है। अमर उजाला से बातचीत में पुलकित ने ‘ग्लोरी’ में अपने किरदार, तैयारी और अनुभव को लेकर विस्तार से बात की।
Exclusive: ‘बॉक्सर के रोल के लिए वैसी ही जिंदगी जीनी पड़ती है’, पुलकित सम्राट ने ‘ग्लोरी’ को बताया गेम चेंजिंग
Pulkit Samrat Interview: पुलकित सम्राट पहली बार ‘ग्लोरी’ में एक अलग तरह के किरदार में नजर आए हैं। जानिए अपने किरदार और तैयारी को लेकर एक्टर ने क्या कुछ कहा…
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चॉकलेटी इमेज से बाहर निकलना नहीं था आसान
पुलकित ने बताया कि यह बदलाव उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने कहा, ‘इस किरदार के लिए सबसे जरूरी चीज ईमानदारी थी और मैंने पूरी सच्चाई के साथ इस पर काम किया।
जो कहानी कागज पर लिखी होती है, उसमें अपनी एक जान होती है और उसी को महसूस करके निभाना पड़ता है। शरीर को बदलना भी आसान नहीं था। पहले भी फिट रहा हूं, लेकिन एक खिलाड़ी जैसा दिखने के लिए आपको सच में उसी तरह की जिंदगी जीनी पड़ती है। सिर्फ बॉक्सर जैसा दिखना काफी नहीं है, आपको बॉक्सर बनना पड़ता है।’
कड़ी ट्रेनिंग और टीम का साथ
इस किरदार की तैयारी को लेकर पुलकित ने विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हैंड ग्लव्स पहनने के बाद तो मैं सच में उसी दुनिया में जी रहा था। मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानता हूं कि जितनी मेहनत मैंने की, उसे सही तरह से दिखाने के लिए हमारे पास एक बहुत अच्छी टीम और शानदार निर्देशक थे। इसलिए नतीजा भी अच्छा आया है।
दिन में दो से तीन बार ट्रेनिंग होती थी, जिसमें एक्सरसाइज, फिजियोथेरेपी और बॉक्सिंग की प्रैक्टिस शामिल थी। खास तौर पर स्पीड और रिएक्शन पर काम किया, क्योंकि बॉक्सर्स की यही ताकत होती है। सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर था कि कोई चोट न लगे, ताकि शूट न रुके। मेरी पूरी टीम ने पूरा साथ दिया। सेट पर भी बॉक्सिंग कोऑर्डिनेटर मानस हर समय मेरी फॉर्म पर नजर रखते थे।
बॉक्सिंग सिर्फ ताकत नहीं, दिमाग का खेल है
पुलकित ने बॉक्सिंग के मानसिक पहलू पर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘जब हम बॉक्सिंग की बात करते हैं, तो दिमाग में गुस्सा, पंच और एक-दूसरे को हराने की तस्वीर आती है। लेकिन रिंग में उतरकर समझ आता है कि यह बिल्कुल आसान नहीं है।
रिंग के अंदर यह पूरी तरह दिमाग का खेल होता है। यह शतरंज की तरह है, जहां आपको सामने वाले खिलाड़ी की बॉडी लैंग्वेज और खेलने का तरीका समझना होता है, उसकी कमजोरियां पकड़नी होती हैं। उसे गलती करने पर मजबूर करना होता है।
साथ ही सामने वाला भी आपके साथ यही कर रहा होता है। अगर आप पूरा बॉक्सिंग मैच देखें, तो समझ आएगा कि दोनों खिलाड़ी लगातार एक-दूसरे को पढ़ने की कोशिश करते रहते हैं। यह धैर्य और फोकस का खेल है।’
अभिनेता ने आगे कहा कि बॉक्सिंग ने मुझे फोकस करना सिखाया है। पहले मैं ध्यान के लिए आंखें बंद करके बैठता था, लेकिन अब मैं सीधे स्पीड बैग के पास जाता हूं और पंद्रह मिनट उसी पर लगा रहता हूं। उस समय मेरा ध्यान कहीं और नहीं जाता। इस अनुभव ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है और कई बातें ऐसी हैं, जिन्हें मैं अपनी असल जिंदगी में भी अपनाता हूं।
‘ग्लोरी’ को अपने करियर का गेम चेंजर बताते हुए पुलकित ने कहा कि ग्लोरी मेरे लिए लाइफ चेंजिंग भी है, गेम चेंजिंग भी और करियर के हिसाब से बहुत फुलफिलिंग है। मुझे पूरा भरोसा है कि हमने जो किया है, वह सही किया है। मैं हमेशा उम्मीद के साथ काम करता हूं, लेकिन इस बार मैं काफी संतुष्ट और बहुत खुश हूं।