{"_id":"6abe34e33f7ee9908e0a0ffb","slug":"veer-pahariya-and-aparshakti-khurana-starrer-prem-keetanu-director-apoorv-singh-karki-shared-view-on-his-film-2026-10-01","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"इंटरव्यू: ‘प्रेमलु’ के ओटीटी से हटने पर उठे सवाल, ‘प्रेम कीटाणु’ के निर्देशक बोले- मुझे अपनी फिल्म पर भरोसा","category":{"title":"Celebs Interviews","title_hn":"साक्षात्कार","slug":"celebs-interviews"}}
इंटरव्यू: ‘प्रेमलु’ के ओटीटी से हटने पर उठे सवाल, ‘प्रेम कीटाणु’ के निर्देशक बोले- मुझे अपनी फिल्म पर भरोसा
सार
Apoorva Singh Karki Interview: वीर पहाड़िया, आफिया सैयद और अपारशक्ति खुराना स्टारर ‘प्रेम कीटाणु’ 2 अक्तूबर को रिलीज हो रही है। फिल्म को मलयालम की चर्चित फिल्म ‘प्रेमलु’ का हिंदी एडाप्टेशन माना जा रहा है। इस पर अमर उजाला से खास बातचीत में ‘प्रेम कीटाणु’ के निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने अपनी राय रखी।
विज्ञापन
अपूर्व सिंह कार्की, निर्देशक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस फिल्म का टीजर और ट्रेलर आने से कुछ दिन पहले ओरिजिनल फिल्म के ओटीटी से हटने को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हुई थी। ‘प्रेमलु’ के मलयालम वर्जन के साथ ही तमिल और हिंदी वर्जन भी ओटीटी से हटा लिए गए थे।
कुछ दर्शकों ने इसे लेकर सवाल उठाए। उनका सवाल था कि क्या मूल फिल्म के ओटीटी से हटने का ‘प्रेम कीटाणु’ की रिलीज से कोई संबंध है? इस विषय पर फिल्म के निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने अमर उजाला से खास बातचीत की। जानें क्या बोले अपूर्व?
विज्ञापन
कुछ दर्शकों ने इसे लेकर सवाल उठाए। उनका सवाल था कि क्या मूल फिल्म के ओटीटी से हटने का ‘प्रेम कीटाणु’ की रिलीज से कोई संबंध है? इस विषय पर फिल्म के निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने अमर उजाला से खास बातचीत की। जानें क्या बोले अपूर्व?
विज्ञापन
अपूर्व सिंह कार्की, निर्देशक
- फोटो : इंस्टाग्राम- @apoorvsinghkarki
‘मुझे अपनी फिल्म पर भरोसा है’
अब जब ‘प्रेम कीटाणु’ रिलीज के लिए तैयार है तो ‘अमर उजाला’ से इस बारे में निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने कहा, ‘मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं है। लेकिन हमने अपनी फिल्म के लिए पूरी मेहनत की है। दोनों ने अपनी-अपनी तरफ से बहुत मेहनत की है। मुझे अपनी फिल्म पर भरोसा है। बाकी तो दर्शकों के हाथ में है। हम जो भी बनाते हैं, दर्शकों के लिए बनाते हैं। चाहते हैं कि उन्हें फिल्म पसंद आए।’
अब जब ‘प्रेम कीटाणु’ रिलीज के लिए तैयार है तो ‘अमर उजाला’ से इस बारे में निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने कहा, ‘मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं है। लेकिन हमने अपनी फिल्म के लिए पूरी मेहनत की है। दोनों ने अपनी-अपनी तरफ से बहुत मेहनत की है। मुझे अपनी फिल्म पर भरोसा है। बाकी तो दर्शकों के हाथ में है। हम जो भी बनाते हैं, दर्शकों के लिए बनाते हैं। चाहते हैं कि उन्हें फिल्म पसंद आए।’
विज्ञापन
प्रेम कीटाणु
- फोटो : यूट्यूब
‘प्यार कॉमन है, बाकी सब बदल देना चाहिए’
अब सबसे अहम सवाल यही है कि मूल कहानी से अलग इसमें क्या रखा गया है। अपूर्व कहते है, 'देखिए, मेरा सीधा मानना है कि किसी दूसरी भाषा की कहानी को एडॉप्ट करते समय उसकी सिर्फ मूल भावना रखनी चाहिए, उसकी कॉपी नहीं करनी चाहिए। प्यार, कॉलेज का दौर, करियर का तनाव और पैसे की परेशानी जैसे भाव हर जगह एक जैसे होते हैं। लेकिन उस भाव के आसपास की दुनिया - शहर, माहौल, संवाद और किरदार - बदलने चाहिए। अगर हिंदी में बनी फिल्म में दर्शक अपनी भाषा और अपनी जिंदगी नहीं देख पाए, तो एडैप्टेशन का मतलब ही क्या रह जाता है? मेरी और लेखक दीपक किंगरानी की सबसे ज्यादा मेहनत इसी पर हुई है। हमने कहानी के विकास पर काफी काम किया, ताकि थिएटर में बैठकर दर्शक इसे रीमेक न समझें, बल्कि कहें - ‘अरे यार, ये तो हमारी कहानी है।’
अब सबसे अहम सवाल यही है कि मूल कहानी से अलग इसमें क्या रखा गया है। अपूर्व कहते है, 'देखिए, मेरा सीधा मानना है कि किसी दूसरी भाषा की कहानी को एडॉप्ट करते समय उसकी सिर्फ मूल भावना रखनी चाहिए, उसकी कॉपी नहीं करनी चाहिए। प्यार, कॉलेज का दौर, करियर का तनाव और पैसे की परेशानी जैसे भाव हर जगह एक जैसे होते हैं। लेकिन उस भाव के आसपास की दुनिया - शहर, माहौल, संवाद और किरदार - बदलने चाहिए। अगर हिंदी में बनी फिल्म में दर्शक अपनी भाषा और अपनी जिंदगी नहीं देख पाए, तो एडैप्टेशन का मतलब ही क्या रह जाता है? मेरी और लेखक दीपक किंगरानी की सबसे ज्यादा मेहनत इसी पर हुई है। हमने कहानी के विकास पर काफी काम किया, ताकि थिएटर में बैठकर दर्शक इसे रीमेक न समझें, बल्कि कहें - ‘अरे यार, ये तो हमारी कहानी है।’
फिल्म 'प्रेम कीटाणु'
- फोटो : सोशल मीडिया
'आजकल ऐसी फिल्में बनती कहां हैं'
फिल्म के आइडिया पर अपूर्व कहते हैं, 'आज के समय में स्क्रीन पर सब कुछ है, लेकिन वो अपनापन गायब है जो हम असल जिंदगी में जीते हैं। ऐसी कहानी कम देखने को मिलती है, जो उस अहसास की बात करें, जो हम कॉलेज में और उसके बाद महसूस करते हैं। कॉलेज में किसी लड़की को पसंद कर लेना आसान लगता है, लेकिन कॉलेज खत्म होते ही जिंदगी बदल जाती है। नौकरी की चिंता, पैसे की परेशानी और पिता जी के ताने शुरू हो जाते हैं। दूसरी तरफ लड़की की अपनी नौकरी और करियर है। ऐसे में क्या वह इस रिश्ते को स्वीकार करेगी? हमें इन्हीं भावनाओं में कहानी नजर आई। लगा जैसे, बड़ी-बड़ी और फैंटेसी वाली कहानियों से हटकर कोई ऐसी प्रेम कहानी भी तो कहो जो बिल्कुल हमारी-आपकी जिंदगी जैसी लगे।'
फिल्म के आइडिया पर अपूर्व कहते हैं, 'आज के समय में स्क्रीन पर सब कुछ है, लेकिन वो अपनापन गायब है जो हम असल जिंदगी में जीते हैं। ऐसी कहानी कम देखने को मिलती है, जो उस अहसास की बात करें, जो हम कॉलेज में और उसके बाद महसूस करते हैं। कॉलेज में किसी लड़की को पसंद कर लेना आसान लगता है, लेकिन कॉलेज खत्म होते ही जिंदगी बदल जाती है। नौकरी की चिंता, पैसे की परेशानी और पिता जी के ताने शुरू हो जाते हैं। दूसरी तरफ लड़की की अपनी नौकरी और करियर है। ऐसे में क्या वह इस रिश्ते को स्वीकार करेगी? हमें इन्हीं भावनाओं में कहानी नजर आई। लगा जैसे, बड़ी-बड़ी और फैंटेसी वाली कहानियों से हटकर कोई ऐसी प्रेम कहानी भी तो कहो जो बिल्कुल हमारी-आपकी जिंदगी जैसी लगे।'