Exclusive: 'मटका किंग' एक्ट्रेस सई ताम्हणकर बोलीं, ‘टाइपकास्टिंग से बचने के लिए ‘ना’ कहना पड़ता है’
Sai Tamhankar Exclusive Interview: अभिनेत्री सई ताम्हणकर इन दिनों वेब सीरीज 'मटका किंग' को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अमर उजाला के साथ खास बातचीत में अपने करियर और जिंदगी पर दिलचस्प बातें साझा कीं।
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साई ताम्हणकर इन दिनों वेब सीरीज 'मटका किंग' में नजर आ रही हैं, जो 60 के दशक के बैकग्राउंड पर आधारित एक दिलचस्प कहानी है। इस प्रोजेक्ट में वे ‘बरखा’ जैसे दमदार किरदार में दिखाई दी हैं। हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत में अभिनेत्री ने अपने किरदार, इंडस्ट्री में टाइपकास्टिंग, पैन इंडिया ट्रेंड, पर्सनल लाइफ और एक्टिंग के बदलते दौर और अपनी शादी पर खुलकर बात की। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:
‘मैं तो खुशी से उछल पड़ी थी’
कुछ साल पहले मैंने एक फाउंडेशन के लिए एक गाने पर काम किया था, जिसे नागराज मुंगले ने डायरेक्ट किया था। उस दौरान हमारी थोड़ी सी बातचीत हुई थी और तभी से मेरे मन में कहीं न कहीं ये इच्छा थी कि मुझे उनके साथ फिर से काम करना है। जब मुझे पता चला कि 'मटका किंग' को वही डायरेक्ट कर रहे हैं, तो मेरे पास ‘ना’ कहने की कोई वजह ही नहीं थी। मुझे लगा कि यह एक बेहतरीन कोलैबोरेशन होगा, अच्छे कलाकार और पूरी टीम के साथ काम करने का मौका मिलेगा। कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे होते हैं, जिनके बारे में आपको पहले से ही भरोसा होता है कि यह प्रोडक्शन हाउस कुछ दिलचस्प ही बनाएगा। अगर आप अदिति रॉय के काम को देखें, तो उन्होंने हमेशा अलग और इंट्रेस्टिंग प्रोजेक्ट्स किए हैं। सच कहूं तो मेरा रिएक्शन यही था, मैं तो खुशी से उछल पड़ी थी।
‘50-90 के दौर में जीना चाहूंगी’
इस सीरीज में हमने 60's का दौर दिखाया है। मुझे ऐसा लगता है कि उस दौर में लोग जिंदगी को ज्यादा एंजॉय करते थे। लाइफ थोड़ी ज्यादा लेड बैक थी, लेकिन साथ ही उसकी क्वालिटी भी बहुत अच्छी थी। वो दौर अपने आप में काफी फैशनेबल भी था। कॉस्ट्यूम्स को देखकर मैं सच में हैरान रह गई थी, लोग वेलवेट जैसे फैब्रिक्स पहनते थे, जो बहुत ही रॉयल और एलिगेंट लगता था।
अगर कुछ साल पहले मुझसे पूछा जाता कि मैं किस दौर में टेलिपोर्ट करना चाहूंगी, तो शायद मैं किसी ऐतिहासिक युग का नाम लेती। लेकिन अब अगर आप मुझसे पूछेंगे, तो मैं कहूंगी कि मैं 50 के दशक से 90 के दशक के बीच के दौर में वापस जाना चाहूंगी। वो समय मुझे बेहद खूबसूरत, स्टाइलिश और दिल के करीब लगता है।
‘ओटीटी, थिएटर फिल्म - तीनों मीडियम के अपने अपने चैलेंज हैं’
आजकल एक्टर की लाइफ पहले से ज्यादा चैलेंजिंग हो गई है, क्योंकि हम एक साथ कई तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे होते हैं। जैसे मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि मैं एक मराठी फिल्म कर रही होती हूं और साथ ही कोई दूसरा प्रोजेक्ट भी चल रहा होता है। कई बार डेट्स भी बिखरी हुई होती हैं, तो आपको बीच बीच में किसी प्रोजेक्ट से जुड़ना पड़ता है। ऐसे में एक्टर के तौर पर फिर से उसी किरदार में वापस जाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। मेरे लिए तो हर नए सेट के पहले चार से पांच दिन काफी रेस्टलेस होते हैं। मुझे लगता है कि यही मेरा प्रोसेस है, धीरे-धीरे उस किरदार में ढलना।
अगर तुलना करें, तो वेब सीरीज में यह थोड़ा ज्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि आपको बीच में ब्रेक लेकर फिर वापस उसी कैरेक्टर में आना पड़ता है। वहीं फिल्म में आप लगातार उस किरदार के साथ रहते हैं, हर दिन शूट करते हुए उसी फ्लो में बने रहते हैं। थिएटर की बात करें, तो वह बिल्कुल अलग दुनिया है। वहां सब कुछ लाइव होता है और एक अलग तरह की एनर्जी और अनुशासन की जरूरत होती है। मुझे लगता है कि एक्टिंग का कोई तय फॉर्मूला नहीं होता, यह एक फ्री फ्लो आर्ट है। तीनों मीडियम के अपने अपने चैलेंज हैं, लेकिन तीनों ही एक्टिंग के लिए बेहद खूबसूरत और संतोष देने वाले प्लेटफॉर्म हैं।
‘पैन इंडिया के पीछे असली भावना ऑडियंस तक पहुंचना है’
मैं पैन इंडिया टर्म को एक एक्टर के नजरिए से थोड़ा अलग तरीके से देखना चाहती हूं। जब कोई एक्टर पैन इंडिया की बात करता है या ऐसी ख्वाहिश रखता है, तो उसके पीछे असली भावना यही होती है कि वह किसी एक रीजन तक सीमित न रहे। हर एक्टर कहीं न कहीं यह चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग उसका काम देखें, उसकी परफॉर्मेंस को नोटिस करें। यही उस शब्द के पीछे की असली भावना है।
लेकिन इसके साथ एक और सच भी जुड़ा हुआ है और वो है नंबर गेम। अगर आपका बनाया हुआ प्रोजेक्ट लोगों तक नहीं पहुंचता या चलता नहीं है, तो उसे उस तरह की पहचान नहीं मिलती। मुझे लगता है कि जब ये दोनों चीजें, अच्छा काम और दर्शकों तक पहुंच, साथ में आ जाती हैं, तब उसे हम पैन इंडिया कह सकते हैं। लेकिन आखिर में हर एक्टर की ख्वाहिश बस इतनी ही होती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग उसका काम देखें, यही इस पैन इंडिया शब्द के पीछे की असली भावना है।
‘टाइपकास्टिंग से बचने के लिए ना कहना पड़ता है’
टाइपकास्टिंग से बचना बहुत मुश्किल रास्ता है। इसके लिए एक एक्टर को अक्सर इंतजार करना पड़ता है कि उसे कुछ अलग और चुनौतीपूर्ण ऑफर किया जाए। मैं इंडस्ट्री के दूसरे पक्ष को भी समझती हूं, जब कोई एक्टर किसी खास तरह के रोल में खुद को साबित कर देता है, तो उसे उसी तरह के रोल में कास्ट करना एक सेफ बेट माना जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि अब थोड़ा रिस्क लेने की जरूरत है। एक्टर्स को रीइमैजिन करना चाहिए, उन्हें नए नजरिए से देखना चाहिए और अलग अलग तरह के किरदारों में मौका देना चाहिए। मैंने खुद भी टाइपकास्टिंग का अनुभव किया है। ऐसे में इससे बचने का एक ही तरीका है, एक जैसे रोल्स को ना कहना।
हालांकि यह फैसला आसान नहीं होता। यह जर्नी कई बार मानसिक, पेशेवर और आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। लेकिन अगर आपको अपने करियर में कुछ अलग हासिल करना है, तो यह कदम उठाना जरूरी होता है।
‘पब्लिक फिगर बनने के साथ पर्सनल स्पेस कम हो जाता है’
ऐसे मोमेंट्स तो लगभग रोज ही आते हैं, खासकर सोशल मीडिया पर। हम कई बार कह चुके हैं कि एक सीमा होनी चाहिए, लेकिन सच यह है कि आप दूसरों के एक्शन्स को कंट्रोल नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि जब आप पब्लिक फिगर बनते हैं, तो आपको यह समझना पड़ता है कि आपकी पर्सनल स्पेस काफी लिमिटेड हो जाएगी। यह एक तरह की ट्रेनिंग होती है, जो धीरे धीरे आप सीख जाते हैं।
जहां तक अटेंशन की बात है, तो वह एक तरह से अच्छी भी लगती है। आखिर हम एक्टर हैं, अगर लोग आपको नोटिस ही न करें, तो वो भी एक समस्या है। लेकिन हर चीज की एक सीमा होनी चाहिए। मुझे लगता है कि आजकल मीडिया में भी काफी डीसेंसी है। अगर आप विनम्रता से रिक्वेस्ट करें, तो वे आपकी बात समझते हैं। मीडिया को हमेशा नेगेटिव तरीके से दिखाया जाता है, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है।
‘मैं प्यार के लिए खुली हूं, लेकिन शादी पता नहीं’
मैं ऐसी इंसान हूं, जो अपनी ही कंपनी को हमेशा एंजॉय नहीं करता। लंबे समय तक खुद के साथ रहने के बाद एक समय ऐसा आता है जब आप खुद से ही थोड़ा बोर हो जाते हैं। कई बार मन करता है कि बस, अब थोड़ी देर खुद से भी दूर रहूं, लेकिन आप खुद से यह कह नहीं सकते कि ‘थोड़ी देर मत मिलो’। इसलिए अब मैं खुद को नए तरीके से समझने की कोशिश कर रही हूं। खुद को ढूंढ रही हूं, अपना संतुलन और अपना केंद्र खोजने की कोशिश कर रही हूं और इस प्रोसेस को एंजॉय कर रही हूं। जहां तक प्यार की बात है, हां, मैं उसके लिए खुली हूं, लेकिन शादी को लेकर अभी कुछ तय नहीं है।

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