Exclusive: 'एक वक्त था जब ये दर्द सहा नहीं जाता था'; 'धूम 3' फेम सिद्धार्थ निगम ने याद किए संघर्ष के दिन
Siddharth Nigam Exclusive Interview: अभिनेता सिद्धार्थ निगम इन दिनों वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं, जो इसी महीने रिलीज हुई है। इंडस्ट्री में आज वे एक चर्चित नाम बन गए हैं। मगर, इससे पहले उन्होंने संघर्ष का एक लंबा दौर देखा है। हाल ही में अमर उजाला के साथ बातचीत में उन्होंने अपने करियर और जिंदगी को लेकर कई बातें साझा कीं।
विस्तार
बैक टू बैक वेब सीरीज ‘हेडशॉट’ और ‘कप्तान’ के साथ अभिनेता सिद्धार्थ निगम इन दिनों अपने करियर के खास दौर में हैं। टीवी की छवि से निकलकर ओटीटी पर अपनी पहचान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत ने आज उन्हें उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां उनकी कहानी खुद एक प्रेरणा बन चुकी है। हाल ही में अमर उजाला डिजिटल को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने अपनी जिंदगी के कई अनसुने और चौंकाने वाले पहलुओं को साझा किया। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:
‘ओटीटी में मेरा हो नहीं रहा था, टीवी एक्टर का टैग पीछा नहीं छोड़ रहा था’
सिद्धार्थ अपने करियर के संघर्ष को याद करते हुए कहते हैं, ‘मैं काफी एन्जॉय कर रहा हूं इस जर्नी को। बैक टू बैक प्रोजेक्ट्स। दो साल पहले मैं ये सोचता था कि कैसे करूंगा, ओटीटी में मेरा हो नहीं रहा है। टीवी एक्टर होने की छाप थी, लोग आपको उसी नजरिये से देखते हैं। मुझे वो चीज महसूस हो रही थी, लेकिन हां, मैंने मेहनत करना नहीं छोड़ा, काम करना नहीं छोड़ा। मैंने बस एक रास्ता अपनाया कर्म करते जाओ, फल मिलता जाएगा। वही हुआ भी। इस साल फल मिला। एक साथ दो प्रोजेक्ट रिलीज हो गए।’
‘हमारे पास घर नहीं था, एनजीओ में तख्त पर सोते थे’
यह वो दौर था, जिसे याद करते हुए आज भी उनकी आवाज भर जाती है। ‘एक वक्त था जब हमारे पास घर नहीं था, हम एनजीओ में रहते थे। एक तख्त होता था, हम उस पर सोते थे, फिर कपड़े उसके नीचे रखते थे। कमरे में छोटा सा चूल्हा, छोटी सी अलमारी। मैं ऐसे प्रयागराज में रहता था। मम्मी टीचिंग करती थीं। आज हमारे पास सब कुछ है, जो किसी सपने से कम नहीं।
एक वक्त था जब ये दर्द और स्ट्रगल सहा नहीं जाता था। मां की मुस्कुराहट में भी आंसू होते थे, उन्हें उस दर्द में देखना मुश्किल था। मेरे साथ भी जो रोज होता था, अच्छा नहीं लगता था। लोगों के ताने सुनना, कई सारी ऐसी चीजें थीं। फिर जब सोचा कि अब मुझे कुछ करके दिखाना है, कहां पहुंचोगे, कब पहुंचोगे ये कभी नहीं सोचा, बस रुकना नहीं था।’
‘मुझे कभी एक्टर नहीं बनना था, अचानक जिंदगी बदल गई’
सिद्धार्थ ने अपने करियर में आए टर्निंग मोड़ के बारे में खुलासा किया। उन्होंने कहा, ‘हाल ही में एक साल पहले जब मुझे कप्तान ऑफर हुई, वही मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट लगा, क्योंकि इंडस्ट्री में आना मेरा मन नहीं था, मुझे कभी एक्टिंग नहीं करनी थी। इंडस्ट्री के बारे में कुछ पता नहीं था। फिर अचानक से प्रयागराज के लड़के को बॉर्नविटा का विज्ञापन मिल गया, 'धूम 3' के लिए कॉल आ गया और पहले ही लुक टेस्ट में चयन हो गया।
टीवी शो 'अशोका' के बाद लोकप्रिय हो गया, नाम और पैसे मिले। लेकिन जब टीवी शो 'अलादीन' के बाद ब्रेक लिया, तब सोचा कि क्या करना है। असली मेहनत तब शुरू हुई, जब मैंने टीवी से ब्रेक लेकर ओटीटी और फिल्मों की तरफ कदम बढ़ाया। जिस दिन कप्तान और हेडशॉट साइन किया, तब लगा कि मेहनत सफल हुई।’
‘अवनीत कौर से लिंकअप की खबरों का जवाब देने का कोई मतलब नहीं था’
टीवी शो ‘अलादीन’ के दौरान अवनीत कौर के साथ जुड़ी खबरों पर सिद्धार्थ ने साफ कहा, ‘हमने कभी इसका जवाब दिया नहीं क्योंकि जवाब होता ही नहीं था। स्क्रीन पर जब लोग हमें देखते थे तो उन्हें अच्छा लगता था और इसी वजह से वो ऐसे लिंकअप करते थे। हमारा फायदा ये था कि इससे हमारे शो का प्रमोशन भी होता था और मेकर्स खुश होते थे। मैंने कभी अपने असली रिश्तों को नहीं भुलाया। जो चीज सही है उसका जवाब दो और जो सही नहीं है, कई चीजों को नजरअंदाज करो।’
‘प्यार दोस्ती है, बस लॉयल्टी और ईमानदारी मिल जाए तो काफी है’
प्यार को लेकर सिद्धार्थ का नजरिया बेहद साफ है - ‘प्यार दोस्ती है और आज के समय में अगर लॉयल्टी, ट्रांसपेरेंसी और ईमानदारी मिल जाए तो क्या बात है।'
