{"_id":"69df7190a1bb2b05eb02f30b","slug":"divya-dutta-exclusive-interview-actress-share-her-life-and-career-unknown-facts-2026-04-15","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Exclusive: डॉक्टर परिवार की दिव्या दत्ता कैसे बनीं अदाकारा? शादी न करने को लेकर खोला राज; साझा की अनसुनी बातें","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
Exclusive: डॉक्टर परिवार की दिव्या दत्ता कैसे बनीं अदाकारा? शादी न करने को लेकर खोला राज; साझा की अनसुनी बातें
Divya Dutta Exclusive Interview: लुधियाना जैसे छोटे शहर से निकलकर मायानगरी मुंबई में एक लंबा संघर्ष करते हुए दिव्या दत्ता ने अपने लिए अलग मुकाम बनाया। वह आज हिंदी सिनेमा की मंझी हुईं अभिनेत्रियों में शामिल हैं। वेब सीरीज ‘चिरैया’ में दमदार अभिनय से दिव्या दत्ता ने सबको कायल बना लिया है। हाल ही में इस अदाकारा ने अमर उजाला से लंबी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े अनसुने किस्से साझा किए।
‘डैडी का स्कूटर होता था, जब उसके आगे खड़ी होती थी तो लगता था मैं राजकुमारी हूं और ये मेरी दुनिया है। डैडी को भी पता था कि मैं उनसे और मां से बहुत प्यार करती हूं। एक दिन दोनों मुझे स्कूल लेने आए, मैं चार साल की रही होंगी। लेकिन दोनों छिप गए। डैडी और मम्मी को सामने ना पाकर मेरा दिल धक से रह गया। जब सभी बच्चे चले गए, सहेली भी जाने लगी तो मैं रोने लगी। तब मम्मी सामने आ गईं, मैंने उसने कहा कि ये मजाक आपने आज किया है, फिर मत करना।’ लुधियाना में गुजरे अपने बचपन, मां और पिता के साथ अपने अटूट रिश्ते, एक्ट्रेस बनने के अपने सफर और अब तक शादी न करने के फैसले से जुड़ी कई बातें दिव्या दत्ता ने साझा की हैं। पढ़िए दिव्या दत्ता से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
Trending Videos
2 of 6
दिव्या दत्ता
- फोटो : इंस्टाग्राम@divyadutta25
दिल्ली आकर फिल्मों की तरफ हुआ झुकाव
दिव्या दत्ता के माता-पिता दोनों ही सरकारी डॉक्टर थे। लुधियाना में वह जब अपने पैरेंट्स के साथ रहती थीं तो कई मरीज घर भी आया करते थे। इस दौरान दिव्या दत्ता ने लोगों की भाषा को सीख लिया, इसमें गालियां भी शामिल थीं। ऐसे में पिता ने फैसला किया कि वह दिल्ली में रहने वाली अपनी बुआ के पास जाएंगी। दिल्ली में दिव्या की तीन बुआ रहती थीं। तीनों ने दिव्या को 7 साल तक पाला-पोसा। दिव्या दत्ता कहती हैं, ‘दिल्ली में मेरी तीन बुआ थीं, वो टीचर्स थीं, किसी ने मुझे पढ़ाया, हिंदी और अंग्रेजी सिखाई। वहीं सबसे छोटी बुआ को फिल्में देखने का शौक था। उनके साथ मैंने फिल्में देखीं, साथ ही मैं उनसे कहती थीं कि मुझे हीरोइनों वाला हेयरस्टाइल बनाकर स्कूल भेजो। किसी दिन मैं नीतू कपूर बनतीं, किसी दिन जीनत अमान, किसी दिन हेमा मालिनी। यहां से ही मेरे अंदर फिल्मों को लेकर झुकाव पैदा हुआ।’
पूरा इंटरव्यू यहां देखें
विज्ञापन
विज्ञापन
3 of 6
दिव्या दत्ता
- फोटो : इंस्टाग्राम@divyadutta25
पिता के अचानक गुजरने के बाद बदल गई जिंदगी
दिव्या आगे कहती हैं, ‘इसी बीच एक दिन पापा ने फोन करके कहा था कि वह मेरे स्कूल फंक्शन में दिल्ली आएंगे। लेकिन वह नहीं आए। एक फोन आया, जिसे बुआ ने उठाया। पता चला कि पापा अब हमारे बीच नहीं थे। वह हमेशा के लिए जा चुके थे। मैं सात साल की थी लेकिन अचानक बड़ी हो गई। मैंने बुआ से कहा कि मां को मेरी जरूरत है और मुझे उनकी। इसके बाद मां के पास लुधियाना वापस चली गई। मां को लिखने का शौक था, मैं भी मां की सहेली बन गई थी। मां, मैं और भाई, अक्सर छत पर गाने लाकर डांस करते थे। मैं मम्मी की नकल करती थी। मां को पुरानी एक्ट्रेस पसंद थीं, वो उनकी तरह एक्सप्रेशन देती थीं। मैंने उनसे अनजाने में ही ये चीजें सीख लीं। आगे चलकर जब फिल्म ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ की तो मां से सीखी वो बातें काम आईं।’
4 of 6
दिव्या दत्ता
- फोटो : इंस्टाग्राम@divyadutta25
जब रिश्तेदारों से झगड़कर मां ने दिव्या के सपनों को दी उड़ान
दिव्या दत्ता ने कब तय किया कि वह अभिनय में आगे बढ़ने के लिए मायानगरी मुंबई आएंगी? इस पर दिव्या दत्ता कहती हैं, ‘मुझे खाली समय में फिल्मी मैगजीन पढ़ना पसंद था, एक बार स्टारडस्ट में एक फॉर्म निकला था, एक टैलेंट हंट कॉम्पिटिशन था। मैंने वो फॉर्म भर दिया और भूल गईं। लेकिन वो फॉर्म स्वीकार हो गया। इसके बाद मां को बताना पड़ा कि मुझे एक्ट्रेस बनना है और मुंबई जाना है। मां डॉक्टर थीं, मेरे परिवार में अधिकतर लोग डॉक्टर थे लेकिन मां ने मेरी एक्टिंग के सपने को सपोर्ट किया। वैसे कई रिश्तेदार आ गए थे घर पर, कोई नहीं चाहता था कि मैं एक्टिंग की दुनिया में जाऊं। लेकिन मां ढाल बनकर आगे खड़ी रहीं और बोलीं कि जो कुछ होगा, उसकी जिम्मेदारी वह लेंगी।’ इस तरह मायानगरी मुंबई आने की राह दिव्या दत्ता के लिए खुली।
दिव्या आगे कहती हैं, ‘कॉम्पिटिशन में मुझे कई दिग्गज फिल्ममेकर्स ने जज किया, कुछ ने फिल्मों में काम देने का वादा किया, किसी ने साइनिंग अमाउंट तक दिया। मां ने मुझे सीख दी थी कि जब भी किसी से मिलाे तो मिठाई लेकर जाओ। मैं ऐसा ही करती थी। कई लोगों की नजर में मैं एक प्यारी सी लड़की थी। लेकिन रिजेक्शन मुझे भी देखना पड़ा। एक बार तो फिल्म के सेट पर पहुंचकर फिल्म से बाहर किया गया। ऐसा अधिकतर कलाकारों के साथ होता है।’
विज्ञापन
5 of 6
दिव्या दत्ता
- फोटो : इंस्टाग्राम@divyadutta25
किरदार का छोटा या बड़ा होना मायने नहीं रखता है
तमाम रिजेक्शन के बाद भी दिव्या दत्ता ने हार नहीं मानी, मां के विश्वास को टूटने नहीं दिया। कुछ ही वर्षों में अपने उम्दा अभिनय से बॉलीवुड में एक खास जगह हासिल की। अब वह जब कोई फिल्म साइन करती हैं तो देखती हैं कि इसमें सबसे प्यार और इंपैक्टफुल किरदार कौन सा है। दिव्या दत्ता कहती हैं, ‘किसी फिल्म में बतौर ऑडियंस जाे किरदार मुझे सबसे पॉवरफुल लगता है, वो ही मैं करती हूं। फिर जब लोग कहते हैं कि कोई फिल्म और सीरीज आपकी वजह से देखी है तो सुनकर बहुत अच्छा लगता है।’
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X